
ललित शर्मा
खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम)
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इंसान कलाओं के भंडार में पारंगत है। वह उपयोग कहां कब किस तरीके से कला को दर्शाता है उसका निखार लाता है यह व्यक्ति का व्यक्तिगत विषय है। इसमें व्यक्ति का व्यक्तित्व साफ झलकता है । कला का रूप प्रत्यक्ष होता है। व्यक्ति अपनी प्रतिभा का परिचय देने में सक्षम संबल होता है। अपने अंदर छुपी कला कब कहां किस रूप में उभारता है यह अपनेआप में पेचीदा प्रश्न है। यह जरूर है कि अवसर सुअवसर में श्रोता ही कला का निर्णयकारी सहित मूल्यांकन करता है। यकीनन मानिए तालियां की गड़गड़ाहट में वाक कला प्रमाणित करती है कि वक्ता के भावनात्मक विचार श्रोताओं के ह्र्दयमन में स्पर्श कर गए है।
व्यक्ति की प्रतिभा औऱ उसकी कला जब प्रकट होती है तो वह निश्चित चर्चित होती है। यह बयां करती है कि वाक कला में पारंगत है। इंसान वाक कला कौशलता में बोलकर खरा उतरता है। वाक कला इन्सान की सबसे मूल्यवान कलाओं में विशिष्ट व महत्वपूर्ण कला है। वाक कला यानि बोलना, इंसान से इंसान बोलकर लुभाता और सटीक समझा सकता है। अक्सर कई बार वक्ता की शैली अन्तर्मन को स्पर्श कर जाती है। वक्ता के बोलने के रस में वक्त का अंदाजा नहीं रहता है। क्या बोलना और बोलकर आकर्षित करना वाक कला में कौशलता की एक अद्भुत शक्ति है, यह इंसान का एक परिचय है। इंसान वाक कला में नई ऊर्जा पाता है, नई छवि कायम करता है। वाककला में सुंदर सटीक विचारों का त्वरित भाव उदय होता है। बोलने से भावनात्मक विचार नए रूप में उभरते है। इसमें जिज्ञासाओं का हल भी होता है। वाककला में निखार लाना स्वयं पर निर्भरशील विषय है। इसमें स्वयं को बदलाव करने में कायम होना पड़ता है।
वाक कला काफी प्रभावी होती है और इस कला की शक्ति से श्रोता मंत्रमुग्ध होता है वह अधिक सुनने को विवश हो जाता है। इंसान को वाक कला में स्पष्टता से बात रखने में मजबूत स्थिति मिलती है वही होना चाहिए। संक्षिप्त तरीके से मूल बातों को प्रकट करना एक गुण हो, सटीक रूप में तथ्यात्मक तरीके से पेश करना, भावनात्मक अभिव्यक्ति का तरीका समझने लायक हो इसमें श्रोता की इच्छाओं पर खास नजर रखते हुए आवश्यक बातें बोलना आदि पर ध्यान केंद्रित करना है। यह कला संचार में सुधार करती है। भीतरी भावनाओं को उजागर करने में सहायता करती है। इसकी जीत अर्जित करने में स्वयं के भीतर आत्मविश्वास में वृद्धि करने में निसंकोच आगे आना आवश्यक है। संबंधों में सुधार करने में वाक कला उत्तम उपाय है। सम्बन्ध सुधारने में उपयोगी के साथ हमारे तमाम काम को वाक कला से खींच सकते है। उनको आनंद से आसान कर सकते है।
हमारे कार्य का प्रभाव वाक कला से महत्वपूर्ण और विश्वसनीय हो जाता है। हमारी वाक कला शैली को अधिकतम उचित उच्च सटीक शब्दों से व्यवहृत किया जाए। किसी भी अंजान स्थान में हमारा प्रभाव वाक कला इतना बढ़ा देती है कि अलग पहचान बढ़ा देती। वाक कला से जुड़ने की आदतों को बनाये रखना अत्यंत लाभकारी है। प्रतिदिन खास बात विषय पर अभ्यास से बहुत सुधार की गुंजाइश बढ़ती है, हमारी सबसे अच्छी आदत सुनने की कला में बेहतरीन सुधार में बल दे। वाक कला में हमेशा ही अपने विचारों को व्यवस्थित ढंग से व्यक्त किया जाए।
प्रमुख बात यह है कि भावनात्मक अभिव्यक्ति में काफी अधिक सुधार करना हितकारी है। वाक कला में अपनेआप को प्रभावशाली बनाये रखना आवश्यक है। वाक कला करते समय मन स्थिर होना चाहिए जुबान बिना लड़खड़ाते हुए शुद्ध शब्दों के उच्चारण से सम्बोधन किया जाए। मुझे टोस्ट मास्टर से जुड़े सदस्यों में एक अजीब गुण देखा जो काफी लुभाने लायक था। पदाधिकारी, सदस्य विवेक देवड़ा व अंकित गाड़ोदिया के साथ अन्य युवा युवतियों के द्वारा समय की पाबंदी में बोलने की कला से हतप्रभ रह गया। इसकी शिक्षा समाज में बेरोकटोक नई शिक्षा से प्रेरित प्रोत्सहित ही करती है। इसीलिए युवा युवती वाक कला के प्रति अपने जीवन के विकास की बढ़ती सम्भावनाये त्वरित बढ़ाने में बढ़े।
परिचय :- ललित शर्मा
निवासी : खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम)
संप्रति : वरिष्ठ पत्रकार व लेखक
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।



















