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हिन्दी मेरी पहचान

पुष्पा खंगारोत
जयपुर (राजस्थान)
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हर भाषा को मान मिला
पर इसे अलग समान मिला,
जो माँ समान पूजी जाती है
उस भाषा को हिन्दी नाम मिला।।

बिना स्वरो के ये गाई नही जाती
बिना वर्णो के ये लिखी नही जाती,
ये हिन्दी है हिन्दी मेरे माँझी
बिना प्यार के ये कभी बोली नही जाती।।

कोई मराठी मे मीठे बोल बोलता है
कोई गुजराती मे रस घोलता है,
और जिसे हिन्दी का ज्ञान है
वो सब संग स्वर मे ताल ठोकता है।।

माना हमें इतना ज्ञान नही
कलम तो पकड़ ली पर,
शब्दों पर कसी लगाम नहीं पर फिर भी
ये हृदय यही बोल, बोल रहा है।।

कितना भी घूम लो पूरे संसार मे
आराम तो अपने घर मे ही आता है,
किसी भी भाषा को बोल लो
मिश्री के घुलने सा मिठा
अहसास तो हिन्दी मे ही आता है।।

परिचय : पुष्पा खंगारोत
निवासी : जयपुर (राजस्थान)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।


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