
सुषमा शुक्ला
आबिदजान (अफ्रीका)
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बोलती आँखें कहानियाँ सुनाएँ,
बिना शब्द सब कह जाती,
चमकती आँखों की रौशनी में,
हर भावना झिलमिलाती।
गहराई वाली आँखों में,
सागर सा राज छिपा होता,
जो डूबे इनकी लहरों में,
वो खुद से भी मिल जाता।
पनीली आँखों की नमी में,
दर्द भी मोती बन जाता,
हर आँसू चुपके से दिल का,
कोई राज बता जाता।
कवियों ने इन आँखों को,
चाँद-सितारों से सजाया,
कभी काजल की धारा बोली,
कभी इश्क़ का रंग चढ़ाया।
कभी इन्हें नयन-कमल कहा,
कभी प्रेम का दीपक माना,
कभी विरह की अग्नि बताई,
कभी स्नेह का मधुर तराना।
इनकी भाषा अनोखी होती,
शब्दों से परे ये बोलें,
कभी हँसी के फूल खिलाएँ,
कभी दुख के बादल घोलें।
आँखें ही दिल का आईना,
हर सच्चाई दिखलाती,
जो छिप जाए लबों से,
वो चुपके से कह जाती।
बोलती, चमकती, गहरी,
पनीली-हर रूप निराला होता,
आँखों के इस अद्भुत जग में,
हर भाव उजाला होता।
परिचय :- सुषमा शुक्ला
जन्म : 25 अप्रैल
निवास : आबिदजान (अफ्रीका)
मूल निवासी : इंदौर (मध्य प्रदेश)
शिक्षा : एमए राजनीति शास्त्र बरकतुल्लाह भोपाल विश्वविद्यालय
लेखन विधा : कविता, हायकु, पिरामिड, लघु कथा
लेखन : लेखन के क्षेत्र में कोविद में जीवनसाथी की प्रेरणा से लेखन का कार्य शुरू किया। धर्म और संस्कृति इन मंचों पर काव्य गोश्तियां संचालन किया मनपसंद हास्य कला साहित्य मंच पर कम से कम १२५ बार संचालन किया,, और चार बार अध्यक्ष पद प्राप्त किया। इन सभी संस्थाओं से अब तक कुल मिलाकर १२५ सम्मान पत्र प्राप्त हुए।
विशेष : नाइजीरिया में, लागोस शहर में हिंदी भाषा का प्रचार प्रसार किया। अफ्रीका के आबिदजान शहर में हिंदी विश्व दिवस पर हिंदी के बावत भूषण और एक छोटी सी कविता पढ़ने का भारतीय दूतावास इंडियन एंबेसी में शुभ अवसर प्राप्त हुआ। तात्कालीन भारतीय राजदूत डॉक्टर राजेश रंजन के हाथों ससम्मान १०,००० सीफा राशि आबिदजान की मुद्रा, जिसे स्थानीय भाषा में सीफा कहा जाता है प्रदान की गई।
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