Wednesday, May 27राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर आपका स्वागत है... अभी सम्पर्क करें ९८२७३६०३६०

बरखा की आस

डॉ. संध्या शुक्ल ‘मृदुल’
मंडला (मध्य प्रदेश)

********************

दिनकर की किरणों का,
फैला चहुं ओर है ताप।
गर्मी और उमस का है,
झेल रहा मानव संताप।

धरती का अंतस फटा।
चुभ रहे हृदय में शूल।
आसमां से नाता तोड़,
बदरा गए रास्ता भूल।

वृक्षों पर बैठे पंछी भी,
रहे सभी हैं अकुलाय।
अमवा की डाल-डाल,
कोयल रही है बौराय।

उमस भरे से दिन लगे,
अब शीतल भई शाम।
शीतल जल और पेय,
भाने लगे अब आम।

ताल तलैया सब सूखे,
नदिया रही हैं सुखाय।
गर्मी औ उमस से अब,
जियरा रहा अकुलाय।

गर्मी से नित बढ़ रही,
वातावरण में है तपन।
गर्म हवा लू लपटों से,
तन में लग रही अगन।

टूट रहा पल-पल अब,
मानव मन का विश्वास।
जेठ मास में है लग रही,
अब बरखा की है आस।

परिचय :- डॉ. संध्या शुक्ल ‘मृदुल’
निवासी : मंडला (मध्य प्रदेश)
सम्प्रति : प्रदेशाध्यक्ष- अखिल भारतीय हिंदी सेवा समिति म प्र., जिला संयोजक- मध्यप्रदेश राष्ट्र भाषा प्रचार समिति मंडला।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।


कृपया लिंक को टच कर रचना पढ़ें एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख कविता को लाइक करें …🙏🏻😊💐💐💐 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी रचनाएँ प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर अणु डाक (मेल) कीजिये, अणु डाक करने के बाद हमे हमारे नंबर 98273 60360 पर सूचित अवश्य करें …🙏🏻 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच का सदस्य बनने हेतु हमारे चलभाष क्रमांक 98273 60360 पर अपना नाम और कृपया मुझे जोड़ें लिखकर हमें भेजें…🙏🏻

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *