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समय का पन्ना

विजय गुप्ता “मुन्ना”
दुर्ग (छत्तीसगढ़)
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बुढ़ा बच्चा स्वभाव सरीखा अक्सर हम सुनते आए।
जिद और अकल दोनों अब अंबर तक उड़ते जाए।

रट्टू तोता जैसा डायलॉग रोज कोई दोहराता है।
गिनी चुनी सोच प्रशंसा लाभ जग को सुनवाता है।
जागो उठो सुनो सभी ट्रंप चाल का भय दिखलाए।
जिद और अकल दोनों अब अंबर तक उड़ते जाए।

दुनिया लोहा मान समझौता रूप स्वीकार किया।
फिर धीरे से आँख दिखा छवि में बट्टा लगा दिया।
झेंप खीझ बेचैनी मिटाने फर्श पे ही लुढ़कते जाए।
जिद और अकल दोनों अब अंबर तक उड़ते जाए।

बरसों बरस की साख मिटती कैसे दुनिया ने जाना।
जल थल नभ अंतरिक्ष शक्तिमान का बहक जाना।
एक खिलौना खेलने बच्चे को ट्रंप इक्का ललचाए।
जिद और अकल दोनों अब अंबर तक उड़ते जाए।

रट्टू तोता कुछ तय शब्दों से अपनी शान दिखाता।
अपनी बोली में फिर निज उर बोली भी फिसलाता।
समर्थ राष्ट्र अर्थ तंत्र शस्त्र प्रगति से छक्के छुड़वाए।
जिद और अकल दोनों अब अंबर तक उड़ते जाए।

पूर्वज पीढ़ी नाम को हर कोई चाहे मन से बढ़वाना।
तेज कदम चलते बढ़ते जग में खुद शरीक हो जाना।
सोचे शर्तें लाद वैश्विक जगत में अधिक न बढ़ पाए।
जिद और अकल दोनों अब अंबर तक उड़ते जाए।

युग बदला है अब रोटी अपनी सेकने सभी शामिल।
श्रेष्ठ आटा तवा से अच्छे बुरे निर्णय में सब काबिल।
भीषण दहशत फैलाकर व्यर्थ पताका क्यों लहराए।
जिद और अकल दोनों अब अंबर तक उड़ते जाए।

जमाना कहता आया सदैव जमाने के साथ चलना।
निज साहस सौंदर्य का भी तुम कचरा नहीं करना।
विपरीत समय का पन्ना मुन्ना कमल खिलाता जाए।
जिद और अकल दोनों अब अंबर तक उड़ते जाए।

बुढ़ा बच्चा स्वभाव सरीखा अक्सर हम सुनते आए।
जिद और अकल दोनों अब अंबर तक उड़ते जाए।

परिचय :- विजय कुमार गुप्ता “मुन्ना”
जन्म : १२ मई १९५६
निवासी : दुर्ग छत्तीसगढ़

उद्योगपति : १९७८ से विजय इंडस्ट्रीज दुर्ग
साहित्य रुचि : १९९७ से काव्य लेखन, तत्कालीन प्रधान मंत्री अटल जी द्वारा प्रशंसा पत्र
काव्य संग्रह प्रकाशन : १ करवट लेता समय २०१६ में, २ वक़्त दरकता है २०१८
राष्ट्रीय प्रशिक्षक : (व्यक्तित्व विकास) अंतराष्ट्रीय जेसीस १९९६ से
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।


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