
सुषमा शुक्ला
आबिदजान (अफ्रीका)
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उत्तरोत्तर उन्नति का दीप, संघर्षों से जलता है,
प्रखर लेखनी का हर अक्षर, यश का पथ बनता है।
काँटों वाली राहों में भी, जिसने हिम्मत थामी है,
उसकी लेखनी ने जग में, अपनी छाप निभाई है।
शब्दों में जब सत्य जगे, तब सम्मान स्वयं आता,
संघर्षों की तपती धूप, यश का चंदन बन जाता।
मेहनत की स्याही से जब, सपनों को आकार मिले,
प्रखर विचारों की गाथा, हर मन को उपहार मिले।
गिरकर फिर उठ जाना ही, उन्नति का आधार बना,
लेखनी की दृढ़ता से ही, जीवन का विस्तार बना।
यश की सीढ़ी चढ़ने को, धैर्य जरूरी होता है,
संघर्षों का हर अनुभव, लेखन में मोती होता है।
जिसने पीड़ा को शब्दों की, शक्ति बना कर गाया है,
उसकी प्रखर लेखनी ने, जग में मान बढ़ाया है।
उत्तरोत्तर उन्नति वहीं, जहाँ कर्म निरंतर हो,
लेखनी में तेज वही, जिसमें संघर्ष समंदर हो
परिचय :- सुषमा शुक्ला
जन्म : 25 अप्रैल
निवास : आबिदजान (अफ्रीका)
मूल निवासी : इंदौर (मध्य प्रदेश)
शिक्षा : एमए राजनीति शास्त्र बरकतुल्लाह भोपाल विश्वविद्यालय
लेखन विधा : कविता, हायकु, पिरामिड, लघु कथा
लेखन : लेखन के क्षेत्र में कोविद में जीवनसाथी की प्रेरणा से लेखन का कार्य शुरू किया। धर्म और संस्कृति इन मंचों पर काव्य गोश्तियां संचालन किया मनपसंद हास्य कला साहित्य मंच पर कम से कम १२५ बार संचालन किया,, और चार बार अध्यक्ष पद प्राप्त किया। इन सभी संस्थाओं से अब तक कुल मिलाकर १२५ सम्मान पत्र प्राप्त हुए।
विशेष : नाइजीरिया में, लागोस शहर में हिंदी भाषा का प्रचार प्रसार किया। अफ्रीका के आबिदजान शहर में हिंदी विश्व दिवस पर हिंदी के बावत भूषण और एक छोटी सी कविता पढ़ने का भारतीय दूतावास इंडियन एंबेसी में शुभ अवसर प्राप्त हुआ। तात्कालीन भारतीय राजदूत डॉक्टर राजेश रंजन के हाथों ससम्मान १०,००० सीफा राशि आबिदजान की मुद्रा, जिसे स्थानीय भाषा में सीफा कहा जाता है प्रदान की गई।
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