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रोटी से आगे

सुरेन्द्र कल्याण बुटाना
करनाल (हरियाणा)

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रोटी से आगे
भूख लगी हो
तो रोटी ही
सबसे बड़ा सत्य लगती है।
पर जीवन
केवल रोटी से नहीं चलता।
मनुष्य को
सम्मान भी चाहिए,
अपनापन भी,
और यह विश्वास भी
कि उसका होना
किसी के लिए मायने रखता है।
कई लोग
भरपेट भोजन के साथ भी
अधूरे रहते हैं।
और कई लोग
कठिन परिस्थितियों में भी
मुस्कुराते हैं।
क्योंकि
शरीर की भूख
अन्न से मिटती है,
पर आत्मा की भूख
प्रेम, सम्मान
और संवेदना से।
यही कारण है कि
सभ्यता की सबसे बड़ी चुनौती
रोटी देना नहीं,
मनुष्यता बचाए रखना है।

परिचय :-  सुरेन्द्र कल्याण बुटाना
जन्म : २१ जून १९९५
निवासी : ग्राम बुटाना, जिला जिला करनाल (हरियाणा)
प्रकाशित कृतियां : हिंदी कहानी पुस्तक “प्रतिज्ञा दोस्ताना (गज़ब दोस्ताना)”, हरियाणवी कविता संग्रह “समाज” शामिल हैं।
रुचि : हिंदी एवं हरियाणवी भाषा में काव्य लेखन के साथ पटकथा लेखन, संवाद लेखन तथा स्वतंत्र फिल्म निर्देशन में भी रुचि रखते हैं।
विशेष : आपकी रचनाओं के केंद्र में मानवीय संवेदना, सामाजिक यथार्थ, ग्रामीण जीवन, करुणा, पर्यावरण और समकालीन चिंतन प्रमुख रूप से रहते हैं। आपकी रचनाएँ विभिन्न साहित्यिक मंचों एवं पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। वर्ष २०१६ में प्रकाशित कविता “एक नज़र” के लिए उन्हें भारतीय दलित साहित्य अकादमी सम्मान प्राप्त हुआ।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।

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