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किस बात का ग़ुरूर है

निज़ाम फतेहपुरी
मदोकीपुर ज़िला-फतेहपुर (उत्तर प्रदेश)
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(दोहा उर्दू छंद)

किस बात का ग़ुरूर है, चले न कोई साथ।
सब मरने के बाद में, छूकर धोते हाथ।।

ज़िंदग़ी एक वहम है, कर्मों का है खेल।
सच तो है बस मौत ये, दुनिया है इक जेल।।

कर्म सही तो सब सही, पटरी पर है रेल।
बुरा भला कोई नहीं, क़ुदरत का सब खेल।।

डॉक्टर और वैद्य को, सब कहते हैं भगवान।
कुछ सौदागर लाश के, बेच रहे ईमान।।

हिम्मत सब में है नहीं, सच कहने की बात।
सच को सच कहता वही, जो सच पर दिन रात।।

आज यहाॅं तो कल वहाॅं, जग में फिरे फ़क़ीर।।
अच्छे दिन के आस में, नैनन बरसे नीर।।

सच से फ़ुर्सत है नहीं, कैसे बोले झूठ।
दुकान उसकी झूठ की, धन्था है मत रूठ।।

भाग गया सलवार में, डर की ऐसी पीर।
सबको योग सीखा रहा, कहता खुद को वीर।।

फ़रियादी अब कर रहे, क़ातिल से फ़रियाद।
बुज़दिल इतना मत बनो, सब कुछ हो बर्बाद।।

राजा अच्छा है वही, कर जो करे मुआफ़।
भेद-भाव भी मत करे, सही करे इंसाफ़।।

परिचय :- निज़ाम फतेहपुरी
निवासी : मदोकीपुर ज़िला-फतेहपुर (उत्तर प्रदेश) भारत
शपथ : मेरी कविताएँ और गजल पूर्णतः मौलिक, स्वरचित हैं।


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