
प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे
मंडला, (मध्य प्रदेश)
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तुमने दिया विवेक तो, हुआ सत्य का भान।
करूँ शुक्रिया आपका, गुरुवर ऐ भगवान।।
खिलता है जीवन तभी, जब गुरुवर हैं संग।
करूँ शुक्रिया ज़िन्दगी, गुरु से जो नवरंग।।
यदि गुरुवर हैं संग तो, मैं नित ही बलवान।
करूँ शुक्रिया तात हे!, है जीना आसान।।
नहीं ज्ञान बिन चेतना, जीवन जाता हार।
प्रभुवर करता शुक्रिया, पाया मैं उजियार।।
गुरु देते संस्कार नित, कर देते निर्माण।
सदा शुक्रिया ज्ञान का, जिससे रक्षित प्राण।।
हर दुर्गुण को दूर कर, गुरुवर लाते शान।
करूँ शुक्रिया सूर्य का, मिलती जिससे आन।।
गुरुवर का नित शुक्रिया, जिनका पावन काम।
जिनको समझो शिष्य तुम, पूरे चारों धाम।।
गुरुजी की महिमा बहुत, करो शुक्रिया खूब।
जो देते हैं ज्ञान को, गहराई में डूब।।
जन्म : २५-०९-१९६१
निवासी : मंडला, (मध्य प्रदेश)
शिक्षा : एम.ए (इतिहास) (मेरिट होल्डर), एल.एल.बी, पी-एच.डी. (इतिहास)
सम्प्रति : प्राध्यापक व विभागाध्यक्ष इतिहास/प्रभारी प्राचार्य शासकीय जेएमसी महिला महाविद्यालय
प्रकाशित रचनाएं व गतिविधियां : पांच हज़ार से अधिक फुचकर रचनाएं प्रकाशित
प्रसारण : रेडियो, भोपाल दूरदर्शन, ज़ी-स्माइल, ज़ी टी.वी., स्टार टी.वी., ई.टी.वी., सब-टी.वी., साधना चैनल से प्रसारण।
संपादन : ९ कृतियों व ८ पत्रिकाओं/विशेषांकों का सम्पादन। एम.ए.इतिहास की पुस्तकों का लेखन
सम्मान/अलंकरण/ प्रशस्ति पत्र : देश के लगभग सभी राज्यों में ७०० से अधिक सारस्वत सम्मान/ अवार्ड/ अभिनंदन। म.प्र.साहित्य अकादमी का अखिल भारतीय माखनलाल चतुर्वेदी अवार्ड (५१०००/ रु.)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।
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