
मीना भट्ट “सिद्धार्थ”
जबलपुर (मध्य प्रदेश)
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थोथे सारे वादे निकले,
सच्चाई के लाले।
आँखों बँधी लोभ की पट्टी,
होते नित घोटाले।।
उबड़-खाबड़ सड़क कोसती,
व्यस्त सभी चौराहे।
डामरीकरण का नाटक बस,
होता जब जी चाहे।।
मन में क्षोभ हज़ारों लेकिन,
ख़ुद ही दुश्मन पाले।
टौल-टैक्स भारी ले-लेकर
भरते रोज़ ख़ज़ाने।
सड़क सुधरती कागज़ पर ही,
काम सभी मनमाने।।
सच्चाई पर मौन भीष्म बन,
काम करें सब काले।
दुर्घटनाएँ होतीं प्रतिदिन,
रोतीं हैं माताएँ।
थोड़े दिन आन्दोलन होते,
चक्रव्यूह रचनाएँ।।
अन्धी नगरी चौपट राजा,
बुनता रहता जाले।
औरँगज़ेबी आदेशों से,
दिल पर चले कुल्हाड़ी।
गहरी चोट कुशासन देता,
उलट-पुलट हर गाड़ी।।
बस नीलामी आदर्शों की
करते टोपी वाले।
परिचय : मीना भट्ट “सिद्धार्थ”
निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश)
पति : पुरुषोत्तम भट्ट
माता : स्व. सुमित्रा पाठक
पिता : स्व. हरि मोहन पाठक
पुत्र : सौरभ भट्ट
पुत्र वधू : डॉ. प्रीति भट्ट
पौत्री : निहिरा, नैनिका
सम्प्रति : सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश (मध्य प्रदेश), लोकायुक्त संभागीय सतर्कता समिति जबलपुर की भूतपूर्व चेयरपर्सन।
प्रकाशित पुस्तक : पंचतंत्र में नारी, काव्यमेध, आहुति, सवैया संग्रह, पंख पसारे पंछी
सम्मान : विक्रमशिला हिंदी विश्वविद्यालय द्वारा, विद्या सागर और साहित्य संगम संस्थान दिल्ली द्वारा, विद्या वाचस्पति की मानद उपाधि, गुंजन कला सदन द्वारा, महिला रत्न अलंकरण, राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर द्वारा “उत्कृष्ट न्यायसेवा अंतर्राष्ट्रीय सम्मान २०२४” से सम्मानित तथा कई अन्य साहित्यिक संस्थाओं से सम्मानित
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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