Sunday, September 20राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर आपका स्वागत है... अभी सम्पर्क करें ९८२७३६०३६०

हरेली तिहार

अशोक कुमार यादव
मुंगेली (छत्तीसगढ़)

********************

(छत्तीसगढ़ी बोली)

बरखा रानी आगे, धान ह बोंवागे।
हरियर रंग छागे, किसान के भाग जागे।।
भुईयाँ महतारी के होगे सिंगार।
चलव मनाबो हरेली तिहार।।

अमावस के दिन ह, हे बड़ पावन।
बरस के पहिली परब, हे मनभावन।।
नांगर, कुदरी के पूजा करहीं संसार।
चलव मनाबो हरेली तिहार।।

लईका मन बाँस के गेड़ी खपाहीं।
रचमच-रचमच चघे, गली-खोर म आहीं।।
जम्मों कोती बगरही खुशी के उजियार।
चलव मनाबो हरेली तिहार।।

गुरतुर गुड़हा चीला ह बिकट मिठाही।
माईलोगिन मन उकेरहीं चित्र सवनाही।।
कुटकी देबी ह करही जन के उद्धार।
चलव मनाबो हरेली तिहार।।

बरदिहा, पहटिया मन डारी खोंचे आहीं।
लोहार मन चौंखट म खीला गड़ियाहीं।।
गोरइंया देवता ह सुनही सबके पुकार।
चलव मनाबो हरेली तिहार।।

परिचय : अशोक कुमार यादव
निवासी : मुंगेली, (छत्तीसगढ़)
संप्राप्ति : शिक्षक एल. बी., संस्थापक एवं अध्यक्ष यादव समाज सेवा, कला, संस्कृति एवं साहित्य उन्नयन समिति मुंगेली।
प्रकाशित पुस्तक : युगानुयुग
सम्मान : मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण ‘शिक्षादूत’ पुरस्कार से सम्मानित, उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान, छत्तीसगढ़ हिन्दी रत्न सम्मान, अटल स्मृति सम्मान, बेस्ट टीचर अवॉर्ड।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।


कृपया लिंक को टच कर रचना पढ़ें एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख कविता को लाइक करें …🙏🏻😊💐💐💐 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी रचनाएँ
प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख हिंदी में टाईप करके हमें
hindirakshak17@gmail.com पर अणु डाक (मेल) कीजिये, अणु डाक करने के बाद हमे हमारे नंबर 98273 60360 पर सूचित अवश्य करें …🙏🏻 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच का सदस्य बनने हेतु हमारे चलभाष क्रमांक 98273 60360 पर अपना नाम और कृपया मुझे जोड़ें लिखकर हमें भेजें…🙏🏻

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *