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हमने हर दर्द को मुस्कान बना कर देखा

आनंद कुमार पांडेय
बलिया (उत्तर प्रदेश)
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हमने हर दर्द को मुस्कान बना कर देखा,
ज़िंदगी तुझको भी आसान बना कर देखा।
दिल में उम्मीद का इक दीप जलाए रखा,
हर एक अँधेरे को चराग़ बना कर देखा।

जो भी पत्थर थे, वो किरदार सिखाते ही रहे,
हमने हर ज़ख़्म को अरमान बना कर देखा।
नफ़रतों से न कभी घर कोई आबाद हुआ,
प्यार को सबसे बड़ा मान बना कर देखा।

सच की राहों में भले काँटे बहुत मिलते हैं,
हमने हर मोड़ को मैदान बना कर देखा।
झूठ की उम्र तो होती है ज़रा-सी लेकिन,
सच को सदियों का निगहबान बना कर देखा।

जो सितमगर थे अब उन्हीं से नयी राह मिली,
जो थे तलवार उन्हें म्यान बना कर देखा।
जिंदगी का सफर आसान नहीं होता मगर,
मैंने उनमें भी इक उड़ान बना कर देखा।

इश्क में रिश्क है पर इश्क है सभी से हमें,
आज सरेआम अपना काम बना कर देखा।
“आनंद” अपनी क़लम बिकने न देना हरगिज़,
नाम को हमने ही पहचान बना कर देखा।

परिचय :- आनंद कुमार पांडेय
पिता : स्व. वशिष्ठ मुनि पांडेय
माता : श्रीमती राजकिशोरी देवी
जन्मतिथि : ३०/१०/१९९४
निवासी : जनपद- बलिया (उत्तर प्रदेश)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।


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