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स्व. उमाशंकर सिंह जी की स्मृति में

आनंद कुमार पांडेय
बलिया (उत्तर प्रदेश)
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कहाँ गया वो मुस्कुराता कारवाँ, कौन बताएगा,
हर गली अब आपका किस्सा ही बस दोहराएगा।

रसड़ा की राहें पूछती हैं, लौटकर कब आएँगे,
सूना-सूना हर चमन अब अश्क ही बरसाएगा।

जनसेवा की लौ जलाकर जो स्वयं सूरज बना,
उसके जाने का अँधेरा उम्र भर तड़पाएगा।

सिर्फ़ नेता ही नहीं थे, एक सहारा थे सभी का,
नाम उनका हर धड़कन में सदा गूँजता जाएगा।

वक्त ने कैसी लिखी तक़दीर, दिल यह मानता नहीं,
इतना जल्दी छोड़ जाना हर किसी को रुलाएगा।

बलिया की इस पावन मिट्टी का था वह गौरव महान,
उनका हर संघर्ष इतिहासों में अमर हो जाएगा।

बसपा का वह एक दीपक, आँधियों में भी जला,
अब वही दीपक फ़लक पर बन सितारा छा जाएगा।

“आनंद” की आँखों में भी आज सावन उतर आया,
ऐसा जननायक सदियों में एक ही कहलाएगा।

परिचय :- आनंद कुमार पांडेय
पिता : स्व. वशिष्ठ मुनि पांडेय
माता : श्रीमती राजकिशोरी देवी
जन्मतिथि : ३०/१०/१९९४
निवासी : जनपद- बलिया (उत्तर प्रदेश)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।


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