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बदलते युग में भारत भूमि की पुकार

आशा शर्मा
धरमपुरी, इंदौर (मध्य प्रदेश)
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मैंने वो देखा है, जो शायद
किसी ने नहीं देखा।
युग बदलेगा,
बदला भी है, सुन रही हूं।
पर मैंने तो इंसान
बदलते देखा है।
पैबंद लगे थे
मेरे जंफर में,
और पेट मेरा,
पकवानों से भरा था।
हर कोई शामिल था,
मेरी दावत में,
पर अंदर सभी के
जहर भरा था।
मिठास भर सकूंगी,
पकवानों से,
और जहर के लिए
जगह ही नहीं होगी।
भूल जाऊंगी मैं,
पैबंध लगे जंफर को,
और मेरे चारो ओर,
खुशी की चुनरी होगी।
पर बह गया सब
आंसुओं में,
मैंने जो देखा।
युग तो युग,
मैंने तो
इंसान बदलते देखा।
इंसान बदलते देखा।

परिचय : आशा शर्मा
पति : श्रीहनुमान प्रसाद शर्मा
निवासी : धरमपुरी सांवेर रोड इंदौर (मध्य प्रदेश)
सम्प्रति : शिक्षिका हायरसैकैंडरी स्कूल
साहित्यिक परिचय : कविता, भजन, लघुकथा, लेख, आदि विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हैं। शिक्षण कार्य में निबंध लेखन किया है।
अन्य : विश्व रचनाकार मंच, शारदा साहित्य मंच, मनपसंद हास्य योग कला साहित्य मंच, शब्दसागर समूह, शुभ संकल्प समूह, आदि मंचों पर निरंतर लेखन कार्य। एवं पूर्व में आडियो कैसेट के लिए लेखन। अंतरराष्ट्रीय महिला प्रकोष्ठ अयोध्या मंच, पर संचालन, शुभ संकल्प समूह प्रकाशन से एवं अनेक मंचों से श्रेष्ठ लेखन के लिए सम्मानित।
प्रकाशन : “मैं कणिका मेरी कथा” आत्मकथा का प्रकाशन।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।


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