
ललित शर्मा
खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम)
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हे गोवर्धन गिरधारी,
तेरी लीला जगत में न्यारी,
संकट की घड़ियां में विपदा,
पल में मिटा दीनी सारी।।१।।
दूर देश से चलकर आते यात्री,
पूजा करते परिक्रमा लगाते
गोवर्धन में श्रद्धाभक्तिभाव से
कर पूजा आराधना, खो जाते।।२।।
गोवर्धन गिरिराज जी में
छोटी-बड़ी सात कोस की परिक्रमा
गोवर्धन पावन भूमि में पैदल चलकर,
सगुनपाते यात्रीघना।।३।।
भक्तिआंनद का लगाकर गोता,
गोवर्धन में भरता कोना कोना
जयकारा गिरिराज के नाम का,
तयपल में होता मिनटों में कोना।।४।।
जपते नाम गोवर्धन गिरिराज का,
मार्ग में करते मंदिरदर्शन
रटते रटते नाम गोवर्धन गिरधारी का,
मस्त रहते औऱ मगन।।५।।
गोबर के गोवर्धन में होता है
कितना अदुभुत महत्व श्रद्धालु
अन्तर्मन से दीप धूप फल
भेंट कर समझते तत्व।।६।।
लगाते लाखों की तादाद में
पूर्णिमा पर गोवर्धन की परिक्रमा
संकल्प से पूजा करते करते,
मनवांछित फल पाते यात्री घना।।७।।
गोवर्धन की महिमा का
जितना करो मन से गुणगान
रटते नाम गोवर्धन गिरिराज का,
होता जीवन मे कल्याण।।८।।
परिचय :- ललित शर्मा
निवासी : खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम)
संप्रति : वरिष्ठ पत्रकार व लेखक
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
