अंकुरण का जश्न
विवेक नीमा
देवास (मध्य प्रदेश)
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जीवन की सुंदरता वन से,
करो रक्षा धरती की मन से।
धरा हरित और शोभित वन हो,
पोषण का संकल्प सघन हो।
भर दो धरती का कोष अपार,
पुनः करो एक बार विचार।
यदि नहीं होगी हरीतिमा धरा पर,
संकट होगा बड़ा जीवन पर।
बंजर भूमि और दूषित वायु,
काया रोगी और अल्पायु।
मत भूलो जीवन का मूल,
लालच को सब जाओ भूल।
चहुँ ओर सब वृक्ष लगाओ,
अंकुरण का जश्न मनाओ।
परिचय : विवेक नीमा
निवासी : देवास (मध्य प्रदेश)
शिक्षा : बी कॉम, बी.ए, एम ए (जनसंचार), एम.ए. (हिंदी साहित्य), पी.जी.डी.एफ.एम
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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