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ऐसा क्यों है?
कहानी

ऐसा क्यों है?

सुधीर श्रीवास्तव बड़गाँव, गोण्डा, (उत्तर प्रदेश) ******************** अभी मैं सोकर उठा भी नहीं था कि मोबाइल की बज रही लगातार घंटी ने मुझे जगा दिया। मैंने रिसीव किया और उनींदी आवाज़ में पूछा -कौन? उधर से आवाज आई- अबे! अब तू भी परेशान करेगा क्या? कर ले बेटा ओह! मधुर, क्या हुआ यार? कुछ नहीं यार! बस थोड़ा ज्यादा ही उलझ गया हूँ, सोचा तुझसे बात कर शायद कुछ हल्का हो जाऊं। बोल न ऐसी क्या बात हो गई? मैं तेरे पास थोड़ी देर में आता हूं, फिर बताता हूं। मधुर ने जवाब देते हुए फोन काट दिया। मैं भी जल्दी से उठा और दैनिक क्रिया कलापों से निपट मधुर की प्रतीक्षा करने लगा। लगभग एक घंटे की प्रतीक्षा के बाद मधुर महोदय नुमाया हुए। मां दोनों को नाश्ता देकर चली गई। नाश्ते के दौरान ही मधुर ने बात शुरू की। यार मेरी एक मित्र (गिरीशा) है। जिससे थोड़े दिन पहले ही आमने सामने भेंट भी हुई थी। वैसे त...
मन का मौसम
कविता

मन का मौसम

डॉ. संगीता आवचार परभणी (महाराष्ट्र) ******************** मन का मौसम है अपने ही मन का फेर, दूसरों को देखोगे तो हो ही जाएगी अंधेर। मन अपनी खुशी क्यों औरों से जोड़ते हो? तोड़ने वाले बहुत है फिर  मायूस हो जाते हो! मन अपना फूल से बढ़कर नाजूक होता है, औरों से कहा आज-कल समझा जाता है? मन रे कहा है किसी कवि ने तू धीर धर, औरों की वजह से खुद को बरबाद न कर। मन रे मोह माया से सम्भाल कर रहा कर, मुफ्त में सुख चैन का सौदा न किया कर मन का मौसम खुद के काबू में रखा कर, इसे औरों के भरोसे नहीं कभी सौंपा कर। परिचय :- डॉ. संगीता आवचार निवासी : परभणी (महाराष्ट्र) सम्प्रति : उप प्रधानाचार्य तथा अंग्रेजी विभागाध्यक्ष, कै सौ कमलताई जामकर महिला महाविद्यालय, परभणी महाराष्ट्र घोषणा पत्र : प्रमाणित किया जाता है कि रचना पूर्णतः मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि रा...
जीने का सहारा
कविता

जीने का सहारा

सरला मेहता इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** हरा भरा था देश हमारा शस्य श्यामला था थल सारा वृक्षों का झुरमुठ था न्यारा सब जीवों के जीने का सहारा पोखर ताल व नदी किनारा जल ने जीवन को था तारा यूँ तो समंदर भी है खारा देता पर्यावरण का नारा यदि चाहिए मलय मंद फूलों में मीठी सी सुगंध नृत्य करे जल में तरंग तोड़ो प्रदूषण से संबंध रोक वनों की व्यर्थ कटाई नव पौधों की कर सेवकाई शुरू करो इक नई कहानी सहेज लो बारिश का पानी कचरा प्रबंधन सहज बनाओ गीले कचरे से खाद बनाओ गंदगी यहाँ वहाँ ना फैलाओ स्वच्छता अभियान चलाओ मग बाल्टी,उपयोग बढाओ व्यर्थ जल से सब्ज़ी उगाओ टोटियां नल की ठीक कराओ बून्द बून्द पानी की यूँ बचाओ अर्ध पात्र जल दीजिए प्यासा जब कोई होय पूरा जल पी लीजिए जल जितना पात्र में होय फूल पात व जली अस्थियां देवों की विसर्जित मूर्तियां विलुप्त हो गई...
भूलन द मेज़ : फिल्म समीक्षा
फिल्म

भूलन द मेज़ : फिल्म समीक्षा

उत्कर्ष सोनबोइर खुर्सीपार भिलाई ******************** मुझे इस छत्तीसगढ़ी फिल्म का, बहुत दिनों से इंतजार था, २७ मई को रिलीज़ होनें के बाद, मुझे इस फिल्म को देखने की उत्सुकता और भी बढ़ गई, हां और मेरें परीक्षा होतें ही मैंने भिलाई के मुक्ता सिनेमा में देख ही लिया। भूलन द मेज़, पहली ऐसी छत्तीसगढ़ी फिल्म है जो राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए नामित हुई और गत वर्ष उपराष्ट्रपति, श्री एम वेंकैया नायडू जी के कर कमलों द्वारा भूलन द मेज़ को राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाज़ा भी गया। छत्तीसगढ़ नई फिल्म नीति के तहत इस फिल्म को एक करोड़ रूपये का अनुदान राशि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा दिया जाएगा। यह फिल्म संजीव बख्शी के उपन्यास 'भूलन कांदा' पर आधारित है, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी जी वरिष्ठ निबंधकार के सानिध्य और दादी की दुलार ने उन्हें लेखक बनने प्रेरित किया, मैं तो कहूंगा की उन्हें साहित्य प्रेम विरासत में मिली थी।...
जन्मदिवस पर अनंत शुभकामनाएं …
जन्मदिवस

जन्मदिवस पर अनंत शुभकामनाएं …

राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच www.hindirakshak.com के साहित्यकार श्री डॉ. विकासजी दवे (निदेशक साहित्य अकादमी भोपाल म.प्र.) का आज ३० मई को जन्मदिवस है ... इस पटल के माध्यम से नीचे दिए गए कमेंट्स बॉक्स में संदेश भेजकर आप शुभकामनाएं दे सकते हैं…. आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं छायाचित्र के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर अणु डाक (मेल) कीजिये, अणु डाक करने के बाद हमे हमारे नंबर ९८२७३ ६०३६० पर सूचित अवश्य करें …🙏🏻 आपको यह रचना अच्छी लगे तो साझा अवश्य कीजिये और पढते रहे hindirakshak.com राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच से जुड़ने व कविताएं, कहानियां, लेख...
जन्मदिवस पर अनंत शुभकामनाएं …
जन्मदिवस

जन्मदिवस पर अनंत शुभकामनाएं …

राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच www.hindirakshak.com की वरिष्ठ श्रीमती संगीता मुरसेनिया (भोपाल, मध्य प्रदेश) का आज २९ मई को जन्मदिवस है ... इस पटल के माध्यम से नीचे दिए गए कमेंट्स बॉक्स में संदेश भेजकर आप शुभकामनाएं दे सकते हैं…. आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं छायाचित्र के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर अणु डाक (मेल) कीजिये, अणु डाक करने के बाद हमे हमारे नंबर ९८२७३ ६०३६० पर सूचित अवश्य करें …🙏🏻 आपको यह रचना अच्छी लगे तो साझा अवश्य कीजिये और पढते रहे hindirakshak.com राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच से जुड़ने व कविताएं, कहानियां, लेख, आदि अपने चलभाष...
जन्मदिवस पर अनंत शुभकामनाएं …
जन्मदिवस

जन्मदिवस पर अनंत शुभकामनाएं …

राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच www.hindirakshak.com की वरिष्ठ श्रीमती छाया मंगल मिश्रा (इंदौर, मध्य प्रदेश) का आज २९ मई को जन्मदिवस है ... इस पटल के माध्यम से नीचे दिए गए कमेंट्स बॉक्स में संदेश भेजकर आप शुभकामनाएं दे सकते हैं…. आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं छायाचित्र के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर अणु डाक (मेल) कीजिये, अणु डाक करने के बाद हमे हमारे नंबर ९८२७३ ६०३६० पर सूचित अवश्य करें …🙏🏻 आपको यह रचना अच्छी लगे तो साझा अवश्य कीजिये और पढते रहे hindirakshak.com राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच से जुड़ने व कविताएं, कहानियां, लेख, आदि अपने चलभाष...
प्रेम
कविता

प्रेम

श्रीमती क्षिप्रा चतुर्वेदी लखनऊ (उत्तर प्रदेश) ******************** क्या है परिभाषा पवित्र प्रेम की?? स्नेह, लगाव, भावना, एक सुखद अहसास?? यहीं समाप्त नहीं हो सकती "परिभाषा "प्रेम की! प्रेम शाश्वत है, कल था, आज है, कल भी रहेगा!! शुभ का आरंभ, निरंतरता का बहाव है प्रेम, सूकून है, लगन है, मुक्ति है प्रेम! ईश्वर की अराधना, हवन कुंड का पवित्र धुआं है प्रेम, प्रकृति का कण-कण है प्रेम, जीवों के प्रति करुणा है प्रेम! शब्दों में ना वर्णित हो पाए वो उपासना है प्रेम, सृष्टि की रचना का आधार, जीवन की सार्थकता है प्रेम! एक मौन अभिव्यक्ति, ईश्वरlनुभूति है प्रेम! समर्पण, विश्वास, वचन बद्धता, अद्विती यता है प्रेम! प्रेम आदि-अनादि है, जगत में परमात्मा का प्रतिनिधि है प्रेम! सत्य है, शिव है, सुन्दरतम है "प्रेम" !!! परिचय :- श्रीमती क्षिप्रा चतुर्वेदी पति : श्री ...
जान लिया
कविता

जान लिया

राजीव डोगरा "विमल" कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) ******************** क्या फर्क पड़ता है अब तेरे आने से क्या फर्क पड़ता है, अब तेरे जाने से हम तो चर्चित रहेंगे फिर भी इस जमाने में। क्या फर्क पड़ता है अब तेरे रोने से क्या फर्क पड़ता है अब तेरे मुस्कुराने से। हमने जान लिए हैं अब हर तरीके तेरे दिल बहलाने के। क्या फर्क पड़ता है अब दिल लगाने से क्या फर्क पड़ता है अब दिल दुखाने से हमने जान लिया है, महज ये पल भर की खुशी है पल भर की हंसी है। परिचय :- राजीव डोगरा "विमल" निवासी - कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) सम्प्रति - भाषा अध्यापक गवर्नमेंट हाई स्कूल, ठाकुरद्वारा घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय ...
कर्तव्य के मोल
कविता

कर्तव्य के मोल

डॉ. मिनाक्षी अनुराग डालके मनावर जिला धार (मध्य प्रदेश) ******************** सपने अपने त्याग कर जो निभाए अपनों का संग आशाओं का समुद्र ना पहचाने बस जाने अपनों के सपनों के रंग जो ना करें रिश्तो में तोल मोल बस वही जाने कर्तव्य का मोल, वह लड़े कभी अपनों के लिए और कभी लड़े उनके सपनों के लिए लेकिन बांधे ना कभी अपनी ख्वाहिशों की पुड़िया उसकी तो बस संघर्षों की दुनिया जो बोले प्रेम के बोल वही जाने कर्तव्य के मोल, जो ना समझे अपनों का मान उन्हें क्या होगी कर्तव्य की पहचान जो छोटा होकर भी बांधे परिवार की डोर जैसे मिले दो नदियों के छोर उसके आगे किसी का ना कोई मोल वही जाने कर्तव्यों के मोल, परिचय : डाॅ. मिनाक्षी अनुराग डालके निवासी : मनावर जिला धार मध्य प्रदेश घोषणा पत्र : प्रमाणित किया जाता है कि रचना पूर्णतः मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख,...
कविता

नोंच लो जितना चाहों तुम

आनंद कुमार पांडेय बलिया (उत्तर प्रदेश) ******************** नोंच लो जितना चाहों तुम दोनों हमें, नोंचने से न ममता घटेगी मेरी। नोंचने से ये मतलब तनिक भी नहीं, नोंचना तो तु सारा बदन नोचना। कुछ भी करना है तुझको आजादी पूरी, गलती हो तुझसे तो खुद को हीं कोसना। अश्क आंखों में भरकर करूं मिन्नतें, तुझसे नजरें कभी ना हटेगी मेरी। नोंच लो जितना चाहो तुम दोनों हमें, नोंचने से न ममता घटेगी मेरी। तेरे हीं वास्ते मेरा जीवन भरा, है तेरे हीं लिए मेरा हर माजरा। तेरे बिन अब गुजारा तनिक भी नहीं, तु हीं पहली डगर और डगर आखिरी। नोंच लो जितना चाहो तुम दोनों हमें, नोंचने से न ममता घटेगी मेरी। इक मेरा लाडला इक जीवन संगीनी, चांह कर भी नहीं हो कभी फासला। प्रेम से बढ़कर कुछ भी जहां में नहीं, मिलती इतनी खुशी विघ्न सारा टला। नोंच लो जितना चाहो तुम दोनों हमें, नोंचने से न ममता घटेगी मेरी। ...
अरे भेड़िये अब तो, बदल अपनी खाल
कविता

अरे भेड़िये अब तो, बदल अपनी खाल

प्रमेशदीप मानिकपुरी भोथीडीह, धमतरी (छतीसगढ़) ******************** तेरा मेरा, मेरा तेरा ये सब भव के जाल। उड़ जाये हंस अकेला छूट जाये जंजाल।। आया है जग मे तो कर ले नेक काम। मुक्त हो जा भव से जीव पाये विश्राम।। नेक कर्म से ही काटिये भव के जाल। तेरा मेरा, मेरा तेरा ये सब भव के जाल।। आया है जग मे उसे जाना ही पड़ेगा। किस्मत से अपनी तू कब तक लड़ेगा।। मन मे इस जग की, तू चाहत ना पाल। तेरा मेरा, मेरा तेरा ये सब भव के जाल।। उसके दर पर लगेगी जिस दिन हाजिरी। वंहा ना चलेगी तब किसी की जी हुजूरी।। दर जाने से पहले, बदल ले अपनी हाल। तेरा मेरा, मेरा तेरा ये सब भव के जाल।। चार दिन की चकाचौँध मे सब फंसे है। संसारिकता की कीचड़ मे सब धंसे है।। जग मे रहते-रहते, बना ले अपनी ढाल। तेरा मेरा, मेरा तेरा ये सब भव के जाल।। तेरा मेरा, मेरा तेरा मे बीत गई जवानी। कर ले जतन कितनी बची है ज़िंदगानी।।...
जन्मदिवस पर अनंत शुभकामनाएं …
जन्मदिवस

जन्मदिवस पर अनंत शुभकामनाएं …

राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच www.hindirakshak.com के वरिष्ठ साहित्यकार श्री त्रिपुरारीजी शर्मा (इंदौर, मध्य प्रदेश) का आज २७ मई को जन्मदिवस है ... इस पटल के माध्यम से नीचे दिए गए कमेंट्स बॉक्स में संदेश भेजकर आप शुभकामनाएं दे सकते हैं…. आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं छायाचित्र के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर अणु डाक (मेल) कीजिये, अणु डाक करने के बाद हमे हमारे नंबर ९८२७३ ६०३६० पर सूचित अवश्य करें …🙏🏻 आपको यह रचना अच्छी लगे तो साझा अवश्य कीजिये और पढते रहे hindirakshak.com राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच से जुड़ने व कविताएं, कहानियां, लेख, आदि ...
जन्मदिवस पर अनंत शुभकामनाएं …
जन्मदिवस

जन्मदिवस पर अनंत शुभकामनाएं …

राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच www.hindirakshak.com के रचनाकार श्री मनमोहन पालीवाल (कांकरोली, राजस्थान) का आज २७ मई को जन्मदिवस है ... इस पटल के माध्यम से नीचे दिए गए कमेंट्स बॉक्स में संदेश भेजकर आप शुभकामनाएं दे सकते हैं…. आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं छायाचित्र के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर अणु डाक (मेल) कीजिये, अणु डाक करने के बाद हमे हमारे नंबर ९८२७३ ६०३६० पर सूचित अवश्य करें …🙏🏻 आपको यह रचना अच्छी लगे तो साझा अवश्य कीजिये और पढते रहे hindirakshak.com राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच से जुड़ने व कविताएं, कहानियां, लेख, आदि अपने चलभाष पर ...
विश्वास
कविता

विश्वास

डोमेन्द्र नेताम (डोमू) डौण्डीलोहारा बालोद (छत्तीसगढ़) ******************** मुझें विश्वास है मुझें आस है, मिलेगी मंजिल मेरी जरुर एक दिन। करुंगा मेहनत दिन-रात, चाहे रात कटे मेरे तारें गीन-गीन।। मुसाफिर हूं मैं राहगीरों का, बस यही आस में निकलता हूं। चाहें कुछ मिलें या न मिले, बस अपना काम मैं करता हूं।। आगे बढ़ना संकटों से लड़ना, मन में है पुरा विश्वास। जरुर मिलेगी लहरों को साहिल, बस यही है मेरी आस।। आशा की किरण जगे मन में, कर देंगें प्रकाश वान। मिलेगी सफलता एक दिन, बस कर्म है यहां प्रधान।। आज नही तो कल चमकेगें, बने के हम फूल चमन में। होगें कामयाब हम जरुर, खिलेंगे एक रोज हम भी उपवन में। परिचय :- डोमेन्द्र नेताम (डोमू) निवासी : मुण्डाटोला डौण्डीलोहारा जिला-बालोद (छत्तीसगढ़) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। ...
दर्द की दवा बना ली मैंने
ग़ज़ल

दर्द की दवा बना ली मैंने

सीताराम पवार धवली, बड़वानी (मध्य प्रदेश) ******************** किसी ने वाह-वाह की किसी ने अपना ही मुंह फेर लिया तुमने जो दर्द दिया उस दर्द से अपनी ये गजल बना ली मैंने दर्द भरी गजल लिखकर इस जमाने को सुना दी मैंने। किसी ने वाह-वाह की किसी ने अपना ये मुंह फेर लिया ऐसी मशहूर हुई गजल मेरी सोई किस्मत जगा ली मैंने। तुम्हारे दिए दर्द ने तो दुनिया में नाम कर दिया मेरा दर्द भरी गजल को गाकर शोहरत अपनी जमा ली मैंने। कई शायरों ने अपने इस दर्द को अपनी शायरी में पिरोया है लेकिन इसी गजल से शायरों पर धाक जमा ली मैंने। जो दर्द दिया था तुमने अब उसी दर्द की दवा बनाई है यारों इस दर्द की दवा देकर कई रोशन दुआ कमा ली मैंने। रोशन दुआओं के असर से हमारे यह दर्द फना हो जाते है इन्हीं दुआओं के कारण तकदीर के द्वार खुलवा लिए मैंने। तुम्हारे दिए दर्द से ही मैंने भी यहां दौलत और शोहरत पाई है...
तुलसी का पौधा
दोहा

तुलसी का पौधा

रामसाय श्रीवास "राम" किरारी बाराद्वार (छत्तीसगढ़) ******************** तुलसी का पूजन करो, श्रृद्धा से धर ध्यान। जग के सारे देव में, यह है परम महान।। जल देते प्रति दिन इन्हें, जो भी नर या नारि। संकट उनका नित हरें, महादेव त्रिपुरारि।। घर के ऑंगन में रखें, तुलसी पौधा रोप। कष्ट सभी संहारती, रोके सकल प्रकोप।। धर्म-कर्म होता नहीं, बिन तुलसी के पत्र। मिल जाती हर ठौर में, यहाॅं-वहाॅं सर्वत्र।। श्री विष्णु को प्रिय यही, रहे सदा ही संग। भोग नहीं इसके बिना, कहते सभी प्रसंग।। रोग निवारक है दवा, इसके गुंण अनंत। तुलसी को सब मानते, हो गृहस्थ या संत।। तुलसी पौधा देव का, है जग पर उपकार। *राम* बिमारी में करें, इससे शुभ उपचार।। परिचय :- रामसाय श्रीवास "राम" निवासी : किरारी बाराद्वार, त.- सक्ती, जिला- जांजगीर चाम्पा (छत्तीसगढ़) रूचि : गीत, कविता इत्यादि लेखन घोषणा...
करें वृक्षों का गुणगान
कविता

करें वृक्षों का गुणगान

डाॅ. कृष्णा जोशी इन्दौर (मध्यप्रदेश) ******************** पीपल, बरगद, नीम तुलसी, वृक्ष बड़े हैं महान्। इनके अद्भुत गुणों को, अब मानव ले पहचान।। पूज्यनीय हैं वृक्ष धरा पर, है सौंदर्य बढ़ाते। रोगनाशक, अविरत गुण, वृक्षों में पाए जाते।। इन वृक्षों का पूजन करें, श्रद्धा से धरे ध्यान। ब्रह्माण्ड के सारे देव इनमें, वृक्ष बड़े महान्।। वृक्ष को जल देना नित, सारे जग के वासी। संकट सारे दूर करेंगे बात बहुत है साची।। सकल संसार में, वृक्ष सौन्दर्य का है भण्डार। "कृष्णा" कहें जीवनदाता, वृक्ष धरा पर उपहार।। गुणों से भरपूर वृक्ष, इनकी महानता को पहचान। वृक्ष लगाएं हर एक मानव, इनका करें क्या बखान ।। निस्वार्थ भाव से आश्रय देता, कई जीवो का है आवास। सजती संवरती धरा इनसे, वृक्ष में है ईश्वर का निवास।। परिचय :- डाॅ. कृष्णा जोशी निवासी : इन्दौर (मध्यप्रदेश) रुचि : साहित्यि...
मंचो पे कसीदे पढ़ के
कविता

मंचो पे कसीदे पढ़ के

शाहरुख मोईन अररिया बिहार ******************** मंचो पे कसीदे पढ़ के इतना बेकार नही बनना, झूठी खबरों की रद्दी झूठा अख़बार नही बनना। जब तक सांसे होगी, इंकलाबी बातें होगी, अमीरों की तारीफ करु, ऐसा मक्कार नही बनना। हमारी आवाज़ से पिघलते है फौलाद जूल्म के, लगड़ी, गूंगी, सियासत के प्यादो, के गले का हार नही बनना। छीनने से हक मिलेगा, ये तुम जान लो, मुल्क में नफरत फैलाऊ ऐसा सरदार नही बनना। भूखे, नंगे, गरीबो, बेघर लोगो का, साथी बनना है, चंद पैसों के खातीर, हमको ज़ालिम का हथियार नही बनना। अपनी फकीरी में खुश हूं ईमान के साथ, कड़वी बातें होगी, हमको बेईमानो का राजदार नही बनना। नफरत बोने वाले के घर में बीज बहुत है, अमन फैलाना है शाहरुख हमको सरकार नही बनना। परिचय :- शाहरुख मोईन निवासी : अररिया बिहार घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार स...
जीवन है क्या!
कविता

जीवन है क्या!

डॉ. तेजसिंह किराड़ 'तेज' नागपुर (महाराष्ट्र) ******************** स्मरण के पन्नो से भरा है जीवन, सुख और दुःख कि पहेली है जीवन कभी अकेले बैठ कर, चिंतन करके तो देखो, संबंधों के बगैर अपूर्ण है यह जीवन ! मन की बातों को बाहर आने दो, दबे हुए दर्द को निकल जाने दो, मन को आशा के पंख लगा दीजिए, तन को चाहत कि खुशबू से भर दीजिए, इन लम्हों को जी भरकर आप जी लीजिए, कब जिंदगी का अवसान हो जाए पता नहीं, इस खुबसूरत जिंदगी को दोस्त बनाकर जी लीजिए। हर तरफ तन्हाई - बेवफाई का आलम है, कौन किसका साथी है किसे क्या मालूम है। चाहत के इस बाजार में वफ़ा कि उम्मीद क्या, पलभर के साथी है हम बंधन का रिश्ता क्या। हर किसी को पूछता हूं जिंदगी मायने क्या, जो जी चुका जिंदगी को किसी चाहत से उम्मीद क्या। परिचय :- डॉ. तेजसिंह किराड़ 'तेज' मूल निवासी : अमझेरा, जिला धार (म.प्र.) ...
नारी की लाज
कविता

नारी की लाज

कृष्ण कुमार सैनी "राज" दौसा, राजस्थान ******************** आज भी लुट रहा है, चीर नारी का। नारी, हर किसी पर है भारी, लेकिन न जाने क्यों हो रही है उसके साथ घटना दिन प्रतिदिन। कहते भी है कि "यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता", फिर भी कर रहे हैं, छल, कपट, अत्याचार नारी के साथ, हम और आप मिलकर। पहले भी होते थे और आज भी हो रहे हैं, अत्याचार नारी पर। न जाने कब तक होते रहेंगे इस धरती पर नारी के साथ अत्याचार।। हे कृष्ण पहले भी तुम्हीं आए थे बचाने लाज। अब भी उम्मीद है तुमसे ही आकर बचालो आज।। कलयुग की द्रोपदी की लाज। आ जाओ एक बार कृष्ण आज... आज... आज...॥ परिचय :- कृष्ण कुमार सैनी "राज" निवासी - दौसा, राजस्थान घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविता...
दुनिया से अलविदा हो हम
कविता

दुनिया से अलविदा हो हम

मनमोहन पालीवाल कांकरोली, (राजस्थान) ******************** दुनिया से अलविदा हो हम, शोर तुम न करना मेरै यार नफरत करनी थी इतनी, ऑख में ऑसूॅ न लाना मेरे यार ये ख़ामोशिया ये दूरियाँ अब सही न जाए मेरे यार जख़्म इतने कम न हो किसी को न गीनाना मेरे यार पागल बादल की तरह यहाँ ढुढ रहा हूॅ मे तो तुम्हे जुबां पर आए नाम कभी, हमे तुम न गुनगुनाना मेरे यार कोई पता पूछ भी ले मासूमियत मे कभी तुमसे हमारा जरूरी नही, कोई राज की बात, उन्हे न बताना मेरे यार सोए नही, हम भी रात रात भर, लेकर नाम तुम्हारा ऑखो मे हे ऑसू मेरे, खुद को न रूलाना मेरे यार खाक-ए-सूपूर्द हो, हम तेरी गली से ही निकलेंगे पिछे से तुम मुझको, कभी सदा न लगाना मेरै यार रफ्ता-रफ्ता आग के हवाले जब होने लगे मोहन सोच कर, उस मंज़र को, ख़ुद को न जलाना मेरै यार परिचय :- मनमोहन पालीवाल पिता : नारायण लालजी जन्...
मोर भुइयाँ के करवँ गुनगान
कविता

मोर भुइयाँ के करवँ गुनगान

अशोक पटेल "आशु" धमतरी (छत्तीसगढ़) ******************** मोर भुइयाँ के करवँ गुनगान तोर महिमा है जग म महान। तोर कतका करवँ मैं ह बखान तोर गढ़ हे इहाँ सरग समान। ए माटी ह हावय पावन भुइयाँ जनजन ह तोर ध्यान धरइया। नित-नित हे तोर मान करइया तोर माटी ल हे माथ लगइया। तँय हर देवी तँय हर ओ माता जनम-जनम के तोर से नाता। तहीं ह माता तहीं ओ बरदाता तय हर ममता के खान माता। छत्तीस ठन तोर कुरिया-डेहरी छत्तीस-ठन हे तोर घर-दुवारी। तहीं हर,माता सब्बो के दुलारी तयँ हर बने सब्बो के महतारी। तोर कोरा हावय सरग ले बड़के तोर महिमा हावय अड़बड़ भारी तोर अँचरा हावय शीतल छईहा चारो धाम बरोबर सुग्घर न्यारी। परिचय :- अशोक पटेल "आशु" निवासी : मेघा-धमतरी (छत्तीसगढ़) सम्प्रति : हिंदी- व्याख्याता घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। ...
हिन्दी संस्कृत के हैं रक्षक हम
कविता

हिन्दी संस्कृत के हैं रक्षक हम

महेश बड़सरे राजपूत इंद्र इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** हिन्दी संस्कृत के हैं रक्षक हम माँ भारती तव पुत्र-सेवक हम हिन्दी विश्व भाल पर चन्दन प्रथम करते हम मातृ वन्दन राष्ट्र-धरा के हैं उपासक हम हिन्दी संस्कृत के हैं रक्षक हम अनाहद नाद ने संस्कृत रची माँ शारदा आकर उसमें बसी संस्कृत से हिन्दी को पाते हम हिन्दी संस्कृत के हैं रक्षक हम भाषा जिसमें विज्ञान आधार स्वर-व्यंजन-संयोजन विस्तार मानव भाषा के आराधक हम हिन्दी संस्कृत के हैं रक्षक हम संस्कृत से जीवन में संस्कार सर्व जगत ने किया स्वीकार जीवन विकास के साधक हम हिन्दी संस्कृत के हैं रक्षक हम परिचय :- महेश बड़सरे राजपूत इंद्र आयु : ४१ बसंत निवासी :  इन्दौर (मध्य प्रदेश) विधा : वीररस, देशप्रेम, आध्यात्म, प्रेरक, २५ वर्षों से लेखन घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक...
चाय का महत्व
कविता

चाय का महत्व

डाॅ. दशरथ मसानिया आगर  मालवा म.प्र. ******************* चाय चतुर्भुज रूप है, कप नारायण जान। भगवन माया केटली, पीजे जल्दी छान।। रोज थकान मिटाती चाय। सबके मन को भाती चाय।।१ सुबह शाम दिन में चाय। रुकते काम बनाती चाय।।२ बाबू जी भी होटल जाय। फ़ाइल का सब हाल बताय।।३ वेटर कहता पीलो चाय। सबके होंश जगाती चाय।।४ जगते उठते चाय चाय। बच्चे बूढ़े सब चिल्लाय।।५ अब तो हमको देदो चाय। दादी-नानी मांगे चाय।।६ दादाजी पहले पी जाय। शौचालय से पहले चाय।।७ चाय-चाय जग चिल्लाय। मै भी रोज बनाता चाय।।८ अदरक कूटा डाली चाय। शकर दूध सही मिलाय।।९ कड़क उकाले वाली चाय। पत्नी पीके खुश हो जाय।।१० रेलों में भी मिलती चाय। घोल पाउडर तुरत पिलाय।।११ गुजराती की अच्छी चाय। मोदी जी की ऊंची चाय।।१२ जो दिल्ली तक ले जाय। जापानी भी पीते चाय।।१३ चीन अमरीका मांगे चाय। कोरोना को गि...