कान्हा
संगीता सूर्यप्रकाश मुरसेनिया
भोपाल (मध्यप्रदेश)
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क्यों कान्ह तू।
कब आवेगो।
मोरे नैन तोरे दरस।
तरस रहे।
तू मोहे इक बार।
सपन में ही बता जा।
कान्हा तू कब आवैगो।
मैं तोरे दरस को अति।
व्याकुल मोए भोजन खावै।
ना बनै, मोए प्यास।
भी नाए लगै।
कान्हा अब तो तू।
आए जा मोहै दरस।
दे जा, मोरै नैना तोरे ।
दरस अति तरसे।
अब तू तनिक देर मत लगा।
शीघ्र दरस दे जा।
मोहै बता दे तू कब आवैगो।
मैं तोरे अभिनन्दन की।
तैयारी कर लूँ ।
मैं तोहै माखन मिश्री।
भोग लगाऊँ।
परिचय :- श्रीमती संगीता सूर्यप्रकाश मुरसेनिया
निवासी : भोपाल (मध्यप्रदेश)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।
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