जन्मदिन से पुण्यतिथि तक
प्रीति शर्मा "असीम"
सोलन हिमाचल प्रदेश
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जिंदगी जब ....
जन्मदिन से पुण्यतिथि मनाती है।
वो कितना टूटी है पल-पल।
अपने टूटे टुकड़ों को,
जोड़कर पूरा होने का,
नाटक बखूबी निभाती है।
जिंदगी जब जन्मदिन से
पुण्यतिथि मनाती है।
कुछ नहीं ....बदलता।
लेकिन बहुत कुछ बदल जाता है।
चेहरों पर से चेहरे उतर जाते हैं।
आसपास की भीड़ के,
रास्ते बदल जाते हैं।
जिंदगी जब जन्मदिन से
पुण्यतिथि मनाती है।
बहुत कुछ कहने को होता है।
बहुत कुछ कहने को होता है।
लेकिन शब्दों में एक,
अंदर ......तक।
एक घुटनभर जाती है।
कैसे बदल जाती है जिंदगी।
उस शक्स की,
अहमियत पल-पल याद आती है।
परिचय :- प्रीति शर्मा "असीम"
निवासी - सोलन हिमाचल प्रदेश
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
आप भी अपनी कविताएं, कहा...






















