हे योगेश्वर
ओमप्रकाश सिंह
चंपारण (बिहार)
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हे योगेश्वर यह नागेश्वर-
हे अभ्यंकर हे शिवशंकर!
जागो जागो है प्रलयंकर-
ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय!
जागो -जागो हे भोले शंकर-
संघार करो तू दानव दल का!
कर फिर से तू नव नर्तन-
मानवता की धर्म ध्वज को!
अडिग करो ही नागेश्वर-
खोलो त्रि नेत्र हे प्रलयंकर-
"मणिकर्णिका" महासमसान है!
मां-गंगा की पुनीत तट पर-
महासमसान में धधक रही!
अनवरत चिता की ज्वाला-
अर्ध रात्रि में निशा रात्रि में-
विचरण करते कई "अवधूत" मतवाला!
मैं अकिंचन इनके जीवन रहस्य-
को समझ न पाया हे भोले शंकर!
तंत्र मंत्र योग क्षेम सब तेरी ही माया-
भटक रहा मैं भी "महाश्मशान" में!
हे काशीनाथ हे विश्वनाथ सब तेरी ही माया-
श्री तैलंग स्वामी महा अवधूत ने-
यहां किए थे कठिन साधना!
कमरू के स्वर मेरे हृदय में भर-
करो कृपा हे विश्वेश्वर
ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय
यह "महामंत्र"है पंचाक्षर!
परिचय :- ओ...

























