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लालच सिंहासन का
कविता

लालच सिंहासन का

किरण विजय पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** कहे द्रोपती ! दुर्योधन से- पतियों ने दावँ पर लगाया है, उनकी तो मति मारी है गई, तू क्यों दुष्टता लाया है। भाई भाई के बंटवारे में क्या दोष मेरा है, हे पांडव! क्यो? दुशासन के निर्लज हाथों मेरा क्यों चीर फडवाया है, अपमानित मुझे कराया है। क्यों आँख बचाते हो अर्जुन क्यों गांडीव गिर रहा हाथो से। क्यों भीम की गदा देखो छूट रही, युधिष्टिर ने मौन को साध लिया? हे गंगा पुत्र भीष्म पिता क्यों कर्मों का तुम नाश करो। दुशासन खींचो साड़ी को इसे नग्न बिठाओ जंगा पर, आज शर्त मेरी पूरी करना कोई बीच ना आए नर नारी। द्रोपती ने वस्त्र को पकड़ा है पांवो से दबा यू जकड़ा है, दोनों होंठ से दबा-दबा उस शर्म को दांतों से पकडा है, मन ही मन कान्हा को पुकारती है, तुम आ जाओ हे बनवार यदि लाज बहन की है प्यारी, तुम आ जाओ हे...
बेसिक ड्रग डीलर एसोसिएशन की बैठक संपन्न
देश/विदेश/प्रदेश

बेसिक ड्रग डीलर एसोसिएशन की बैठक संपन्न

जयप्रकाश (जे.पी.) मूलचंदानी अध्यक्ष एवं प्रीतेश जैन महासचिव मनोनीत फार्मा सेक्टर की वर्तमान परिस्थितियों पर हुई चर्चा, एपीआई डीलर्स भी बनाएंगे अपनी एसोओपी - मूलचंदानी इंदौर। बेसिक डीलर एसोसिएशन की जनरल बॉडी की मीटिंग आरएनटी रोड स्थित कलिंगा होटल में संपन्न हुई। जिसमें सर्वसम्मति से जयप्रकाश (जे.पी.) मूलचंदानी को अध्यक्ष एवं प्रीतेश जैन को महासचिव मनोनीत किया गया।वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रकाश हिंगोरानी,राकेश अजमेरा,एवं कमल बिलाला, सहसचिव कुलबीर सिंह एवं कोषाध्यक्ष मनीष दावानी को मनोनीत किया गया है। मीटिंग में फार्मा सेक्टर की वर्तमान परिस्थितियों पर विस्तार से चर्चा हुई जिसमें नवनियुक्त अध्यक्ष श्री जयप्रकाश (जे.पी.) मूलचंदानी ने सभी सदस्यों को सेंट्रल ड्रग अथॉरिटी एवं स्टेट ड्रग अथॉरिटी के द्वारा जारी किए गए नोटिफिकेशनों की जानकारी विस्तार से दी। साथ ही यह भी कहा कि रॉ मटेरियल ट्रेंड को भी अप...
आत्म हत्या निवारण
कविता

आत्म हत्या निवारण

डॉ. गुलाबचंद पटेल अहमदाबाद (गुजरात) ******************** पारस्परिक संबंध की भूमिका होती है सम्बंध सुधार उसे रोका भी जा सकता है मानसिक तनाव विकारों को दोष देते हैं मानसिक बीमारी दबाई से रोक सकते हैं नशीली दवा दोषी ठहराया जाता है नशीली दवाओं का सेवन रोक सकते हैं हर साल दश लाख लोग इससे मरते हैं कीट नाशक जहर बंदूक से लोग मरते हैं आत्म हत्या धर्म में पाप माना जाता है बीस मिलियन गैर घातक प्रयास होते हैं आत्म हत्या दण्डनीय माना जाता है मुस्लिम देशों में आज भी प्रथा अमली है गरुड़ पुराण में वर्णन किया गया है आत्म हत्या को अपराध माना गया है आत्म हत्या से आत्मा भटकती होती है न स्वर्ग या नर्क में जाने प्रवेश मिलता है आत्म हत्या से खुद को बचाया जाता है यदि मित्र को दुख की बात बताई जाती है परिचय :-  डॉ. गुलाबचंद पटेल निवासी : अहमदाबाद (गुजरात) घोषणा पत्र : मैं यह प...
गर्व
कविता

गर्व

नील मणि मवाना रोड (मेरठ) ******************** धरा आज गर्व से इठलाई बेटियां विश्व कप ले आईं भारत ने फिर दिवाली मनाई हमनप्रीत ने की टीम अगुआई शिकस्त दे दक्षिण अफ्रीका को विश्व विजेता टीम कहलाई। शेफाली की धुआंधार बल्लेबाजी दीप्ति शर्मा की तूफानी गेंदबाजी देख कप्तान वाल्वर्ट टीम लड़खड़ाई देख कप्तान वाल्वर्ट टीम लड़खड़ाई दीप्ति ने पांच विकेट चटकाई २४६ रन पर हुए सब धराशाई सात बार विजयी ऑस्ट्रेलिया टीम बुलंद हौसले से हराई गूंज रही आज हर दिल शहनाई। परिचय :- नील मणि निवासी : राधा गार्डन, मवाना रोड, (मेरठ) घोषणा : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।...
भटकते युवक
कविता

भटकते युवक

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** भटक रहे हैं युवक राह से, करें शत्रु का वरण। अंधा युग रखता है जैसे, दलदल में नवचरण।। भूले रीति संस्कार को सब, भूले प्रणाम नमन। ज्ञान ध्यान की बात नहीं, उजड़ा आस का चमन।। मात-पिता का आदर नहीं, कहाँ मिलेगी शरण। अंधा युग रखता है जैसे, दलदल में नवचरण।। भूले सभ्यता संस्कृति भी, करते बैठे नकल। राग आलापें सब विदेशी, नाम न लेते असल।। आचरण में खोट भी उनके, करते नारी हरण। अंधा युग रखता है जैसे, दलदल में नवचरण।। नशे में डूबे नवयुवक अब, मूल्यों का बस पतन। मोल लेते कई बीमारी, करें होम यह बदन।। जिंदा जलते होश नहीं कुछ, दुखद सब समीकरण। अंधा युग रखता है जैसे, दलदल में नवचरण।। तेज़ाबी माहौल हुआ सब, होती रहती जलन। नित दुर्घटना करें शहजादे, देखो बिगड़े चलन।। घिसटे पहियों में भविष्य फिर, हुआ मान...
लफ़्ज़ों के पत्थर
कविता

लफ़्ज़ों के पत्थर

सुशी सक्सेना इंदौर (मध्यप्रदेश) ******************** लफ़्ज़ों के पत्थर फेंकना बड़ा आसान होता है। इंसान को दर्द देने वाला भी, इक इंसान होता है। लाख बरसती हों, रहमत धन दौलत की मगर, जहां खुशियां नहीं, वो घर भी शमशान होता है। परिचय :- सुशी सक्सेना निवासी : इंदौर (मध्यप्रदेश) इंदौर (मध्यप्रदेश) निवासी सुशी सक्सेना वर्तमान में, वेबसाइट द इंडियन आयरस और पोगोसो ऐप के लिए कंटेंट राइटर और ब्लॉग राइटर के रूप में काम करती हैं। आपकी कविताएं और लेख विभिन्न पत्रिकाओं और समाचार पत्रों में प्रकाशित हुए हैं। आपने कई संकलनों में भी योगदान दिया है एवं कई प्रशंसा पत्र और पुरस्कार प्राप्त किए हैं। विशेष रूप से, आपको अनुराग्यम द्वारा गोल्ड मेडल एवं वंदे मातरम पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। आपकी कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधि...
ट्रकों का दर्शनशास्त्र: सड़क का पहलवान और प्रेम का दार्शनिक
व्यंग्य

ट्रकों का दर्शनशास्त्र: सड़क का पहलवान और प्रेम का दार्शनिक

डॉ. मुकेश ‘असीमित’ गंगापुर सिटी, (राजस्थान) ******************** ट्रक का मिज़ाज हमेशा से दबंग, मजबूत और थोड़ा अहंकारी किस्म का माना गया है- सड़क नुमा अखाड़े का पहलवान, जो अपने वज़न और रफ्तार से किसी भी बाधा को कुचलने की क्षमता रखता है। लेकिन कभी-कभी यही पहलवान आपको दिला चुराने वाला ठग सा भी लग सकता है-जब सड़क किनारे खड़ा किसी नववधू की तरह सोलह श्रृंगार किए मुस्कुराता है,तो अच्छे खासे आदमिया भी दिल पिघल नहीं मेरा मतलब दहल जाए। मेहंदी जैसे पैटर्न से रंगे दरवाज़े, झालरों से सजे शीशे, गोटों और कढ़ाईदार पेंटिंग से लिपटी देह, और पीछे लटकता नज़रबट्टू- मानो हर कोना कह रहा हो, “देखो मुझे… मगर प्यार से।” यह ट्रक नहीं मित्र, सड़क पर खड़ी चलती-फिरती अमूर्त कलाकृति है, और उसके पीछे लिखा वाक्य- “बुरी नज़र वाले तेरा मुँह काला”- उसकी सौंदर्य रक्षा का संस्कार है। यह बा...
घाव बहुत गहरे हैं
कविता

घाव बहुत गहरे हैं

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** रोदन करती आज दिशाएं, मौसम पर पहरे हैं। अपनों ने जो सौंपे हैं वो, घाव बहुत गहरे हैं।। बढ़ता जाता दर्द नित्य ही, संतापों का मेला। कहने को है भीड़,हक़ीक़त, में हर एक अकेला।। रौनक तो अब शेष रही ना, बादल भी ठहरे हैं। अपनों ने जो सौंपे वो, घाव बहुत गहरे हैं।। मायूसी है,बढ़ी हताशा, शुष्क हुआ हर मुखड़ा। जिसका भी खींचा नक़ाब, वह क्रोधित होकर उखड़ा।। ग़म,पीड़ा औ' व्यथा-वेदना के ध्वज नित फहरे हैं। अपनों ने जो सौंपे हैं वो घाव बहुत गहरे हैं।। व्यवस्थाओं ने हमको लूटा, कौन सुने फरियादें। रोज़ाना हो रही खोखली, ईमां की बुनियादें।। कौन सुनेगा,किसे सुनाएं, यहां सभी बहरे हैं। अपनों ने जो सौंपे है वो घाव बहुत गहरे हैं।। बदल रहीं नित परिभाषाएँ, सबका नव चिंतन है। हर इक की है पृथक मान्यता, पोषित हुआ...
आदर्श पथ पर चलना
कविता

आदर्श पथ पर चलना

ललित शर्मा खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम) ******************** आदर्श से रहना आदर्श का पालन करना आदर्शों से सूखी जीवन पथ को चुनना ।।१।। विकट परिस्थितियों में संयम बरतना मन मस्तिष्क नियंत्रित रख आदर्श रखना ।।२।। आदर्श एक महाशक्ति जिसपर रखो दृष्टि यह मानवीय मूल्यों की, उत्तम श्रेष्ट शक्ति ।।३।। हमेशा ही लक्ष्य प्राप्तियों में आदर्श है सूचक यह पथ अपनाकर कहलाता, प्रगति का सूचक ।।४।। आदर्शों से मिलती शान्ति आदर्शों से क्रांति दुःखों की दीवारों में आदर्शों मिलती शान्ति ।।५।। बचपन से आदर्शों का पाठ पढ़कर बीता पल आजीवन खुशियां लाता है हर दिन हर पल ।।६।। आदर्श के पथ से जब जो भी कही डगमगाया उसपर संकट का बादल किन्हीं रूप में आया ।।७।। प्रण करता चलूंगा आदर्श पथ पर बढूंगा आगे आदर्श का महत्व समझ वैसे व्यक्ति आते आगे ।।८।। परिचय :- ललित शर्मा निवासी : खलिहामारी, डिब्र...
विद्यालय स्मृति चिन्ह
कविता

विद्यालय स्मृति चिन्ह

डॉ. राजीव डोगरा "विमल" कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) ******************** दहलीज लांघी जब विद्यालय की तो याद आया जा चुके वक्त में बच्चों का हंसना-मुस्कुराना, एक दूसरे से लड़ना और फिर गले से लग जाना। अध्यापक की ज़रा सी डांट पर बच्चों का रूठ जाना पहले नम आंखें कर फिर अश्रु बहाना। अध्यापक का जरा सा देखकर मुस्कुराना, फिर अपनी ममता की छाया में लेकर मां की तरह चुप करवाना। मगर जब वक्त ने अपनी दहलीज लगी तो अध्यापक ने कहा, "सामने जो बैठे थे कल मेरे वो बच्चे कहां?" विद्यालय के बाहर खड़े बच्चों ने कहा, "डांटा कर भी जीवन का सही राह दिखाते मेरे वो अध्यापक कहा?" परिचय :-  डॉ. राजीव डोगरा "विमल" निवासी - कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) सम्प्रति - भाषा अध्यापक गवर्नमेंट हाई स्कूल, ठाकुरद्वारा घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, ...
हां वो भूल रहा है
कविता

हां वो भूल रहा है

राजेन्द्र लाहिरी पामगढ़ (छत्तीसगढ़) ******************** उनके पैदा होते ही खुश हुए लोग सारे, अब उनके लिए भी गर्वित पल आया जो थे पुत्र के मामले में बेचारे, बूढ़े दादा जी तो लगभग पगला गया, झूमते नाचते बच्चे के पास ननिहाल आ गया, उनकी खुशी देखते बनती थी, पल पल गर्व से छाती तनती थी, क्योंकि बहुत सारे पैदा हुए पुत्रों की मौत के बाद वो दुनिया में आया था, बहुतों की निराश जिंदगी में खुशहाली लाया था, उनके बाद कई भाई-बहन परिवार की खुशियां बढ़ाने आए, मगर पहले पुत्र को गिरफ्त मेंप ले चुके थे पराये पन के साये, परायों ने उन्हें संभाला, गाली दे खिलाते थे हर निवाला, परिवार के संकट को अकेले ढोया, और हर रिश्ते का रिश्ता मुफ्त में खोया, हर रिश्ता खोने के बाद अब वो भूलने लगा है अपने आप को, अब नहीं सोचता अच्छाई या संताप को, उनको अब कोई फर्क नहीं पड़ता बचे हुए हैं कितने...
चिंतन-मनन कराती कविताओं का संग्रह है ‘हिमकिरीट’
पुस्तक समीक्षा

चिंतन-मनन कराती कविताओं का संग्रह है ‘हिमकिरीट’

सुधीर श्रीवास्तव बड़गाँव, गोण्डा, (उत्तर प्रदेश) ******************** समीक्षक : सुधीर श्रीवास्तव (गोण्डा, उ.प्र.)  'हिमकिरीट' हिंदी काव्य संग्रह के प्रकाशन की योजना और संग्रह के हाथों में आने तक की प्रत्येक गतिविधि का मैं गवाह हूँ। संवेदनशील और सृजन के प्रति पूरी चैतन्यता का उदाहरण भूपेश प्रताप सिंह का प्रस्तुत संग्रह के रूप में सामने आया। कवि ने अपने संग्रह की रचनाओं में प्रकृति, संवेदना, अध्यात्म और मानव जीवन की जटिलताओं को बहुत ही सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया है। 'हिमकिरीट' हिम यानी बर्फ, और किरीट यानी मुकुट-जो शीतलता, ऊँचाई और सौंदर्य के संयोजन का बिंब के रूप में जाना जाता है, उसे शीर्षक देना किसी बड़े का आदर करने जैसा है l प्रस्तुत संग्रह को पढ़ते समय आप महसूस करेंगे कि इसमें शब्द- चित्रों के माध्यम से भावनात्मक विचारों का अद्भुत संगम है, जिसका अनुभव आत्मचिंतन और अनुभूति करने को विवश...
पानी ही पानी है
कविता

पानी ही पानी है

गिरेन्द्रसिंह भदौरिया "प्राण" इन्दौर (मध्य प्रदेश)  ******************** धरती से अम्बर तक, एक ही कहानी है। आँख खोल देखो तो, पानी ही पानी है।। सूखे में पानी है, गीले में पानी है । छाई पयोधर पै, कैसी जवानी है।। नदियों में नहरों में, सागर की लहरों में। नालों पनालों में, झीलों में तालों में।। डोबर में डबरों में, अखबारी खबरों में। पोखर सरोबर में, गोरस में गोबर में।। खेतों में खड्डों में, गली बीच गड्ढों में। अंँजुरी में चुल्लू में, केरल में कुल्लू में।। कहीं बाढ़ आई है, कहीं बाढ़ आनी है। मठी डूब जानी है, बड़ी परेशानी है।। घन की निशानी है, जानी पहचानी है। यही जिन्दगानी है, पानी ही पानी है।। हण्डों में भण्डों में, तीर्थ राज खण्डों में। कुओंऔर कुण्डों में, हाथी की शुण्डों में।। गगरी गिलासों में, लोटा पचासों में । छागल सुराही में, किटली कटाही में।। तसला...
मांँ
कविता

मांँ

किरण विजय पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** मांँ एक दर्पण है, मां मन का भाव है, दिल की पहचान है, माँ निश्छल प्रेम है, मां समय का ज्ञान है, मां समझ है, माँ मेहनत है, मां विचार है मां मार्गदर्शक है। मां हिम्मत है मां साहस है, मां शक्ति है मां भक्ति है , मां वर्तमान भूत और भविष्य है, माँ कोमल है मांँ कठोर है, मांँ आनंद है माँ खुशी है, मांँ सोच है माँ विचार है, मांँ आंसू है माँ खुशी है। माँ घर की रौनक है मांँ बहार है। मां गरीबी पर अमीरी है, तो मांँ मान और सम्मान है परिचय : किरण विजय पोरवाल पति : विजय पोरवाल निवासी : सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) शिक्षा : बी.कॉम इन कॉमर्स व्यवसाय : बिजनेस वूमेन विशिष्ट उपलब्धियां : १. अंतर्राष्ट्रीय साहित्य मित्र मंडल जबलपुर से सम्मानित २. अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना उज्जैन से सम्मानित ३....
अनुपम आभा
गीत

अनुपम आभा

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** अनुपम आभा बिखराएगी, दीपयुक्त शुभ थाली। अंतः का तम दूर हटेगा, तब होगी दीवाली।। पंच तत्त्व निर्मित काया पर, पहरे बहुत, गुमी आजादी। क्षणभंगुरता जीवन का सच, भूला मन लिप्सा का आदी।। मोह-लोभ की महाव्याधि में, अतिवादी मानव जकड़ा है। अहंकार के पिँजरे में मन, चेतन खो, बन सुआ खड़ा है।। काम पिपासा में है डूबे, आत्मबोध तज प्रभुतावादी। पंच तत्त्व निर्मित काया पर, पहरे बहुत, गुमी आजादी।। गठरी सिर पर रखे पाप की, जग में भटके नश्वर काया। मर्यादा की रेखा टूटी, छल जाती रावण-सी माया।। अमल दृष्टि छल भेद न पाती, याचक हैं या अवसरवादी। पंच तत्त्व निर्मित काया पर, पहरे बहुत, गुमी आजादी।। सत्यं-शिवम-सुंदरम भूला, परहित राह नहीं पहचानी। कर्म -फलन है सद्गति-दुर्गति, काल करे हरदम मनमानी।। यम का पाश सदा ह...
मां की परछाई
कविता

मां की परछाई

आयुषी दाधीच भीलवाड़ा (राजस्थान) ******************** एक मां जो कि वह भी किसी की बेटी होती है, पर जब वह अपनी बेटी के लिए कुछ लिखती है, तो सुनिएगा ज़रा- तू ही मेरे घर की रौनक, तू ही मेरे दिल की रूह, तुझमें अपना रूप देखती, तू उसी रूप का स्वरूप है। देख के तेरा बचपन, मुझे अपना बचपन याद आएं, मासूमियत और शैतानी की हवा, आज फिर हिलोरे खाती है। रंग और कदकाठी में, तुझमे मेरी परछाई देखती मैं, देख तुझको आईने में, अपने अतीत का झोला खुल जाता है। यक़ीन है मुझको, उड़ान तेरे सपनो की बाकी है, कुछ तेरे, तो कुछ मेरे अधूरे सपने बाकी है, तेरी हमराह की राही हूँ मैं, तेरे सपनों की साथी हूँ मैं। शनै-शनै धुंध हटती रही, शनै-शनै तेरे संग समय बीतता, शनै-शनै वह ओझल होती है मेंरी आंखो से, फिर वह अपने घर चली जाती है। परिचय :-  आयुषी दाधीच शिक्षा : बी.एड, एम.ए. हिन्दी निवास :...
मुझमें मेरा विश्वास जिंदा रहने दो
कविता

मुझमें मेरा विश्वास जिंदा रहने दो

श्रीमती क्षिप्रा चतुर्वेदी लखनऊ (उत्तर प्रदेश) ******************** जिसको जो भी कहना है, उसे कहने दो थोड़ा बाकी है जीवन सूकून से अब रहने दो! बेमतलबी रिश्तों के कच्चे धागे टूट जाने दो जिस राह पर ले जाए वक़्त उस राह पर चलने दो! बहुत मुश्किल होता है सबके सांचों में खुद को ढालना, थोड़ा सा ही सही मुझमे "मैं" जिंदा रहने दो! सीख लिया है सबक जीवों की मुस्कराहट में मुस्कराने का, लोगों को मेरी मुस्कान से जलन होने दो! हँस के जीना है हर हाल में, परिभाषा है जीने की, हर ओर यही किस्सा अब मशहूर होने दो! यूँ ही नहीं मिट जाएगा अस्तित्व मेरा , मुझमें ये विश्वास मेरा जिंदा रहने दो!! परिचय :- श्रीमती क्षिप्रा चतुर्वेदी पति : श्री राकेश कुमार चतुर्वेदी जन्म : २७ जुलाई १९६५ वाराणसी शिक्षा : एम. ए., एम.फिल – समाजशास्त्र, पी.जी.डिप्लोमा (मानवाधिकार) निवासी...
आत्मीयता का उपहार
कविता

आत्मीयता का उपहार

ललित शर्मा खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम) ******************** छोड़कर धन दौलत हार तनमन से बांटो आत्मीयता का अनमोल उपहार ना सोना, ना चांदी, ना आभूषण का कहलाता है सच्चा उपहार, तनमन से बांटो आत्मीयता के प्रेमबन्धन का फूलों की महकती खुशबू सा अपनापन का बांटो अपनों में अपनत्व का अनमोल उपहार जन्मदिन, वर्षगांठ पर दिखावटी आडम्बर से भरे क्या सचमुच कहलाते अनमोल उपहार ? स्वेच्छा से बांटो अनमोल आत्मीयता का सच्चा समन्वय का आत्मीयता से भरा प्रेमबन्धन का अपनो में अनमोल उपहार परिचय :- ललित शर्मा निवासी : खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम) संप्रति : वरिष्ठ पत्रकार व लेखक घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।...
अयोध्या चले
कविता

अयोध्या चले

रतन खंगारोत कलवार रोड झोटवाड़ा (राजस्थान) ******************** आज तो है अलौकिक दिवस, हर तरफ खुशी के दीप जले। मेरे राम, सिया को संग लेकर, आज अयोध्या धाम चले।। सरयू की लहरों की रागिनी, संगीत मधुर सुना रही है। अयोध्या की पावन धरा से, महक मेरे श्री राम की आ रही है।। प्रफुल्लित हुआ हर जीव मन, मगन होकर नाच रहे हैं मोर। कोयल की मधुर वाणी सुन, खिल उठा अयोध्या चहुँओर।। कैसा अदभुत मिलन है यह, एक परिवार बनी पूरी नगरी। प्रेम के फूलों से खिला राजा दशरथ का घर, और महक गई पूरी अयोध्या नगरी।। धन्य-धन्य हो राजा दशरथ, जो प्रभु ने अंगना मे जन्म लिया। बड़ा पुण्य कमाया होगा माँ कौशल्या ने, जो पालनहार ने ही रिश्तों को मान दिया।। परिचय : रतन खंगारोत निवासी : कलवार रोड झोटवाड़ा (राजस्थान) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना स्वरचित...
मैं और मेरी कविता
कविता

मैं और मेरी कविता

शिवदत्त डोंगरे पुनासा जिला खंडवा (मध्य प्रदेश) ******************* जब मैं लिखने बैठता कविता, लेखनी मुझसे रूठ जाती है, वह कहती मेरा पीछा छोड़ दो, मुझसे अपना नाता तोड़ दो, क्या तुम मुझे सौंदर्य में ढाल सकोगे, इस घुटन भरे माहौल से निकाल सकोगे, क्या तुम कुछ अलग लिख सकोगे, या तुम भी दुनिया की बुराइयों को, अपनी रचना में दोहराओगें ? दहेज, भूख, बेकारी के शब्द में अब ना मुझको जकड़ना, हिंसा दंगों या अलगाव के चक्कर में ना पड़ना, नेताओं को बेनकाब करने में मेरा सहारा अब ना लेना, बुराइयां ना गिनाना अब बीड़ी सिगरेट या शराब की, उकता गई हूं अब मैं, बलात्कार हत्या या हो अपहरण, इन्हीं शब्दों ने किया है जैसे मेरे अस्तित्व का हरण। लेखनी बोलती रही, मुझे मालूम है तुम इंसानियत की दुहाई दोगे, इसलिए मैं पास होकर भी हूं पराई। अगर लिखना हो तो लिखो, प्रकृति की गोद में बैठ कर , ...
मर्यादा की महत्ता
दोहा

मर्यादा की महत्ता

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** मर्यादा से मान है, मिलता है उत्थान। मिले सफलता हर कदम, हों पूरे अरमान।। मर्यादा से शान है, रहे सुरक्षित आन। मर्यादा को जो रखें, वे बनते बलवान।। मर्यादा से गति मिले, फैले नित उजियार। मर्यादा रहती सदा, बनकर जीवनसार।। मर्यादा है चेतना, जाग्रत करे विवेक। मर्यादा से पल्लवित, सदा इरादे नेक।। मर्यादा को साधता, वह हो जाता ख़ास। कभी न उसकी टूटती, पलने वाली आस।। मर्यादा में रीति है, जिससे निभती लाज। कर सकते इससे सदा, सबके दिल पर राज।। मर्यादा में देव हैं, बसे हुए भगवान। मर्यादा का विश्व में, होता है यशगान।। मर्यादा संस्कार है, अनुशासन का रूप। जिससे मिलती ताज़गी, और सुहानी धूप।। परिचय :- प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे जन्म : २५-०९-१९६१ निवासी : मंडला, (मध्य प्रदेश) शिक्षा : एम.ए (इतिहास) (मेरिट होल्डर), ए...
सबको रोना आ गया
कविता

सबको रोना आ गया

आनंद कुमार पांडेय बलिया (उत्तर प्रदेश) ******************** ऐसा आया कोरोना, सबको रोना आ गया। घूमने वालों को बिस्तर पर सोना आ गया।। चीन से शुरू हुआ, चीन के हीं कारणों, विश्व को रुला दिया, दवा भी मिलेगी नो, डर लगे निकलें बाहर कैसे टोना आ गया। ऐसा आया कोरोना, सबको रोना आ गया। बंद हो गए यातायात के भी साधन सब, मर रही है जनता सो रहे कहाँ हैं रब, वैज्ञानिकों के भी माथे पर पसीना आ गया। ऐसा आया कोरोना, सबको रोना आ गया। लॉक डाउन की घड़ी है लॉक हो गए सभी, मास्क है जुबान पर अब घूमना कभी, बिना मिले-जुले सबको अब जीना आ गया। ऐसा आया कोरोना सबको रोना आ गया। तुलसी का पत्ता अजवाइन और आदी का, काढ़ा ईलाज है कोरोना जैसे बादी का। ग्रीन टी पिने का अब जमाना आ गया। ऐसा आया कोरोना, सबको रोना आ गया। घरेलू उपचार हीं अब इसका ईलाज होगा, लहसुन चबाना हल्दी दूध पीना आज होगा, स्वस्थ रहने का म...
सब कुछ नेता होता है
हास्य

सब कुछ नेता होता है

राजेन्द्र लाहिरी पामगढ़ (छत्तीसगढ़) ******************** यहां उपस्थित सभी लोगों के साथ सिंहासन पर विराजमान सरपंच और पंच को नमन करता हूं, उसके बाद उपस्थित अन्य लोगों के साथ बारंबार इस मंच को नमन करता हूं, यहां मेरे विभाग के मेरे अधिकारी भी हैं, हमारे बीच तालमेल और तैयारी भी है, उन्हें नमन करना भूल गया तो भी किसी न किसी तरीके से मना लूंगा, हमारे बीच की बात है मुद्दा सुलझा लूंगा, मगर मुझे नेता से सबसे ज्यादा डर लगता है, इन प्रतिनिधियों का चेहरा कहर लगता है, ये बार-बार हिस्सा नहीं देने की बात करता है, कड़ी सजा दिलवाने, देख लेने की बात करता है, जिन्हें बोलना, लिखना नहीं आता है, वो बस्तर फिंकवा देने की धमकी सुनाता है, लोग कहते हैं कि डर के आगे जीत है, लेकिन वो तो इनसे भी भयानक चीफ़ है, सामने हाथ जोड़कर खड़े हुए बिना सीधे मुंह बात नहीं करता है, अपने जुबां पर द...
यादों से एक याद चुन लिया है
कविता

यादों से एक याद चुन लिया है

प्रमेशदीप मानिकपुरी भोथीडीह, धमतरी (छतीसगढ़) ******************** वक्त के धुप मे चलते-चलते हुये उष्ण से नित जलते-जलते हुये सफर मे तेरा साथ चुन लिया है यादों से ही एक याद चुन लिया है तू ही इबादत और मोहब्बत मेरी तू ही दरकार और सरकार मेरी मैंने वही एक प्रसून चुन लिया है यादों से ही एक याद चुन लिया है मधुरस से सराबोर हो ये जीवन जैसे संगीत से बना हो नया धुन एकान्त के लिए धुन चुन लिया है यादों से ही एक याद चुन लिया है सजदे के लिए रब चुन लिया है रब को अपना सब चुन लिया है जीवन में नई कहानी बुन लिया है यादों से ही एक याद चुन लिया है सुकून के लिए एकांत चुन लिया अपने लिए खुद कांटा चुन लिया नवीन ताना-बाना बुन लिया है यादों से ही एक याद चुन लिया है परिचय :- प्रमेशदीप मानिकपुरी पिता : श्री लीलूदास मानिकपुरी जन्म : २५/११/१९७८ निवासी : आमाचानी पोस्ट- भोथीडीह जिला- धमतरी (छ...
भीष्म–कृष्ण संवाद
कविता

भीष्म–कृष्ण संवाद

सौरभ डोरवाल जयपुर (राजस्थान) ******************** मृत्यु शैया पर लेटे-लेटे, भीष्म के मन में ये विचार आया। भीष्म ने श्री कृष्ण के सामने, अपनी बात को दोहराया।। क्या सही है और क्या गलत, इसका उत्तर ना कोई दे पाया। अपनी बात को अपने-अपने ढंग से, सभी ने सही ठहराया।। क्या सही है और क्या गलत, हे माधव ! मुझको बतलाओ। मृत्यु आने से पहले हे माधव, मेरी दुविधा को दूर भगावो।। इस पर श्री कृष्ण बोले- हे पितामह भीष्म, तुम्हारी दुविधा का समाधान बतलाऊंगा । क्या सही है और क्या गलत, इसका भेद बतलाऊंगा।। पूछो राजन, जो संशय हो मन में। यूँ चिन्तित रहना अच्छा नही, कुरुक्षेत्र के रण में।। पितामह भीष्म बोले- हे माधव! माना द्रोपदी का चीर हरण पाप था। पर इतना बताओ हे नाथ! द्रोणाचार्य के साथ हुआ क्या वो इंसाफ था।। माना माधव पांड्वो के साथ हुआ वो छल था। पर माधव जो धृतराष्ट्र और गा...