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मोक्षमार्ग का पथ
कविता

मोक्षमार्ग का पथ

संजय जैन मुंबई ******************** ज्ञान धर्म की तरफ मेरा ध्यान बड़ता जा रहा है। जीवन का सच्चा अर्थ हमे समझ आ रहा है। बिना धर्म के मुक्तिपथ हमें मिल नहीं सकता। इसलिए हर कोई धर्म से जोड़ता जा रहा है।। जब से तुम आये हो इस संसार में। तब से लेकर अबतक तुमने किया क्या है। जरा सोचो समझो और करो विचार। तभी जिंदगी के सच को तुम पहचान पाओगें।। जब भी तुम करो तीनलोक के नाथ के दर्शन। तो स्वंय को देखो तुम नाथ के अंदर। तो तुम्हें जीवन का सच्चा पथ मिल पायेगा। और मोक्षगति का मार्ग तुम्हें निश्चित ही मिल जायेगा।। परिचय :- बीना (मध्यप्रदेश) के निवासी संजय जैन वर्तमान में मुम्बई में कार्यरत हैं। करीब २५ वर्ष से बम्बई में पब्लिक लिमिटेड कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत श्री जैन शौक से लेखन में सक्रिय हैं और इनकी रचनाएं राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच (hindirakshak.com) सहित बहुत सारे अखबारों-पत्रिकाओं ...
बिटिया का जन्म
कविता

बिटिया का जन्म

श्वेतल नितिन बेथारिया अमरावती (महाराष्ट्र) ******************** दिन था चौबीस मार्च जब मेरी बेटी दुनिया में आयी डाक्टर, नर्स ने कहा बधाई हो बधाई लक्ष्मी है आयी ! बिटिया का चेहरा देख मैं अपनी प्रसव वेदना बिसराई बिटिया को नर्स ने हल्की थपकी देकर धीरे से रुलाई! सुन आवाज दादा-दादी नाना-नानी की आंखे भर आयी अपने चाचा, बुआ, मामी-मामा की नन्ही परी है आयी! नटखट चुलबुली शैतानी करके सबके मन को लुभाई पापा ने देखा लाडो का चेहरा, चेहरे में मुस्कान थी छाई! मीठी बातों का खजाना और प्रश्नों का भंडार है लायी छुन-छुन करती उसकी पायलिया सबका मन हर्षाई! जब भी थोड़ी सी डांटू मैं तो सहमी और घबराई मैं कभी भी रोऊं तो मेरे आसूं पोंछने पलक मेरी है आयी! परिचय :- श्वेतल नितिन बेथारिया निवासी- अमरावती (महाराष्ट्र) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानिया...
श्रद्धांजली
कविता

श्रद्धांजली

बुद्धि सागर गौतम नौसढ़, गोरखपुर, (उत्तर प्रदेश) ******************** दुनिया आपसे सीखेगी, बिटिया को शेर बनाया है। प्रभु दयाल जी मेरा नमन, निब्बान अपने पाया है। बेटा से कम नहीं है बेटी, सिद्ध आपने कर डाला। माया बहन सा बेटी पाकर, आयरन लेडी बना जा डाला। प्रभु दयाल जी आपकी बेटी, नाम आपका चमकाया। यूपी का मुख्यमंत्री बन कर, लोहा अपना मनवाया। अपराधी थरथर कांप रहे थे, प्रभु जी आपकी बिटिया से। माया जैसा निडर बने सब, अर्ज मेरा सब बिटिया से। प्रभु दयाल जी आप हमारे हैं, देश की गौरव गाथा में, शत शत बार नमन आपको, अश्रु भरा है आंखों में। परिचय :- बुद्धि सागर गौतम जन्म : १० जनवरी १९८८ सम्प्रति : शिक्षक- स्पर्श राजकीय बालिका इंटर कालेज गोरखपुर, लेखक, कवि। निवासी : नौसढ़, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी क...
ज़िंदगी…बिखरी सी
कविता

ज़िंदगी…बिखरी सी

निर्मल कुमार पीरिया इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** मेरी बंदगी हैं तेरे ही वास्ते, चाहें हमने तुझसे कहा नही, उस सजदे में बस तू ही था, जिसे तूने कभी नवाजा नही... मेरी ज़िंदगी का हर इक सफा, तेरे रंग से हैं सजा हुआ, ये बात कुछ हैं अलग मगर, कभीं तूने उसको छुआ नही... हैं चिराग़-ए-ज़िंदगी जल रहे, अरमा हुए हैं धुँआ धुँआ, बहकी हवाओं से कह दो जरा, अभी घर हुआ रौशन नही... ये बहार-ए-गुलशन और् ये गुल, मेरे वास्ते थी नही कभी, वो खिला भी तो हैं उस दरख़्त,आंधियों में रहा जो थमा नही... तोहमत लगी हैं ये हम पे कि, कभी आसमा को नही छुआ, परवाज मन कि हैं जाने क्या, थे पंख जिसको नसीब नही... हर बात तूने ही थी कही, हर बार दिल ने तेरी ही सुनी, अब मन की तू भी ले सुन जरा, रहें ख़ुद से कोई गिला नही... परिचय :- निर्मल कुमार पीरिया शिक्षा : बी.एस. एम्.ए सम्प्रति : मैनेजर कमर्शियल व्हीकल लि. निवासी : इंदौर,...
एक सलाम फौजी के नाम
कविता

एक सलाम फौजी के नाम

कार्तिक शर्मा मुरडावा, पाली (राजस्थान) ******************** एक दिन मेरी फौजी से मुलाकात हुई, और फिर हमारे बीच ऐसी बात हुई। बीवी का वचन भी जिसे याद नहीं, परिवार से मिलने की फरियाद नहीं। माँ की ममता का अक्सर गम होता है, और बेटी से मिलना बड़ा कम होता है। चाहे फौलादी शरीर बनाले फिर भी, कैसे बयान करें खून के आँसू रोते हैं। एक तुम्हें माँ का आँचल नसीब हो, इसलिए हम मौत की गोद में सोते हैं। भारत माँ को अपनी माँ बनाकर, हम हर जवान को भाई कहते हैं। जाती और धर्म का भेदभाव नहीं, हम हिन्दुस्तान में रहते हैं। परवाह नहीं है हमें अब कुछ भी, हम इस भारत माँ के बेटे हैं। शहीद भी बन गए तो क्या हुआ, आज शान से तिरंगे में लेटे हैं l दिवाली में भी जो गोली खाकर, हर पल खून की होली खेलते हैं। गर्व हमे हैं ऐसे शहीदों की मिट्टी पर, एक सलाम हर सैनिक के नाम करते हैं। परिचय : कार्तिक शर्मा पिता : शुक्राचार्य शर्मा श...
लापरवाही
लघुकथा

लापरवाही

रजनी गुप्ता "पूनम" लखनऊ ******************** रमा आज बहुत परेशान है। भारत वर्ष ही नहीं विश्व के कई देश कोरोना के शिकार हैं। जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा इस समस्या से पीड़ित है। इसको दूर करने के अनेक प्रयास किये जा रहे हैं परन्तु अभी कोरोना समाप्त करने में सफलता नहीं प्राप्त हो पाई है, फिर भी उसके बच्चे उसकी चिंता करने पर खूब हँसी उड़ा रहे हैं। आखिर वह झल्ला कर बोल पड़ी, "बच्चों तुम समझते क्यों नहीं? अत्यंत आवश्यक कार्य के अतिरिक्त बाहर न जाने की अपील प्रधानमंत्री, डॉक्टर एवं प्रशासन सभी कर रहे हैं जिससे सड़कों पर भीड़ कम हो और इसके कीटाणु फैलने न पायें। मस्ती, घूमने-फिरने से कभी रोका तो नहीं मैंने, ये सब तो कुछ दिनों बाद फिर हो सकता है किन्तु लापरवाही में अपनी प्राण संकट में डालना कहाँ की समझदारी या बहादुरी है। दोस्तों से फोन पर बात कर लो। कुछ दिन नहीं मिलोगे तो क्या बिगड़ जाएगा?" कुछ देर सँभल क...
जंगल वाली सोच
कविता

जंगल वाली सोच

भीमराव झरबड़े 'जीवन' बैतूल मध्य प्रदेश ******************** हुआ पाशविक हृदय आचरण, मनुज रहा अब नोच। इस मिट्टी में उग आई है, जंगल वाली सोच।। आसमान में नाच रहा है, प्रजातंत्र कनकौआ। डोर थमी है जिन हाथों में, बाँटा उसने पौआ।। नव विहान का सौदा करके, सौंप गया निम्लोच। उग आई है इस मिट्टी में...... (१) रोज मुनादी करते टी वी, माॅडल से इठलाकर। हवा आजकल बाँट रही है, खुश्बू घर-घर जाकर।। लगे शिकंजे जगह- जगह पर, मांग रहे उत्कोच। इस मिट्टी में उग आई है...... (२) हार भूख से डाल दिये हैं, अस्त्र सभी होरी ने। तृप्त कर दिया है जन गण को, केवल मुँहजोरी ने।। घाट-घाट का पानी पीता, है जिसकी अप्रोच।। इस मिट्टी में उग आई है..... (३) अपने मंडल के सूरज ने, बना लिया परकोटा। झूठ-मूंठ के बाँट उजाले, मोटा माल खसोटा।। आशा लेकर नव 'जीवन' की, पुश्त हुई सब पोच। इस मिट्टी में उग आई है..... (४) निम्लोच- सूर्यास्त पोच- निक...
नवरात्रि उत्सव
आलेख

नवरात्रि उत्सव

मनीषा जोशी खोपोली (महाराष्ट्र) ******************** हमारे क्षेत्र का नवरात्रि का उत्सव श्रद्धा, आस्था और उपासना के रंग में सरोबार रहता है। मध्यप्रदेश में देवास जिले में एक छोटा सा हमारा गाँव मोखापीपल्या है। वहाँ की कुलदेवी माँ अम्बा है। हम अम्बे माता कहते है। नवरात्रि के नौ दिन वहाँ धूप होती हैं जिसे ज्योत धूप कहते है। नवमी शाम और दशहरा की सुबह धाया पाठ की बैठक होती हैं। धाया पाठ नवरात्रि के नौ दिन होने के बाद भगवान की विदाई को कहते है। इसे संस्कृत में उत्तरार्ध कहते हैं। परिवार में सात पीढ़ी का वरदान है, ईश्वर आप के द्वारे आयेंगे। ऐसी मान्यता है कि ये जोड़ी के रूप में आते हैं, जिन्हे भीलट और कवाजा नाम से जाना जाता है। इस अवसर पर दो पाटों को पूजा जाता हैं जिन्हें थानक कहते हैं। इनकी सवारी किसी व्यक्ति पर आती है। सभी भक्ति भाव भेंट द्वारा उन्हें संतुष्ट करते हैं। बहुत ही श्रद्धामय वातावरण ह...
इंसानियत
कविता

इंसानियत

प्रियंका पाराशर भीलवाडा (राजस्थान) ******************** सब रिश्तो से ऊँचा हैं एक रिश्ता जिसकी पहचान है मानवता हर रिश्ते के अस्तित्व में जरूरी है इंसानियत अन्यथा, स्वार्थ के अंधेपन में हावी है हैवानियत स्वनिर्मित कायदे कानून के लिए देते हैं नामी रिश्तो के ओहदे का वास्ता अंधविश्वासी बन नियमों की पालना के लिए औरत ही औरत की शत्रु बन भूल जाती इंसानियत का रास्ता कुछ पाने की लालसा में तो खूब हो रहा दान धर्म परंतु अपनो के प्रति भेदभाव, अहंकार की भावना बड़े पद की आड में छोटो को दे प्रताड़ना नैतिक अनैतिक नजर अंदाज कर भूला रहे मानव धर्म हर घर में नाम है और नामो के साथ है पद परंतु इंसानियत के आगे सबका लगता है तुच्छ कद चाहे कितने ही संस्कारो का ओढ लो आवरण मानव है अगर तो मानवीय हो आचरण संबंध निभाने मे नहीं होगी जटिलता जब हर दिल में बसेगी मानवता परिचय :- प्रियंका पाराशर शिक्षा : एम.एस.सी (सू...
गुरु तेगबहादुर, कश्मीर और सेना (२४ नवंबर बलिदान दिवस विशेष)
आलेख

गुरु तेगबहादुर, कश्मीर और सेना (२४ नवंबर बलिदान दिवस विशेष)

मंगलेश सोनी मनावर जिला धार (मध्यप्रदेश) **********************                                               सनातन धर्म की रक्षा में गुरुओं के बलिदानों का विशेष स्थान है, उनके पराक्रम व बलिदानों से बहुत हद तक सनातन धर्म की रक्षा सुनिश्चित हुई। औरंगजेब का शासन था, उसके दरबार में एक कश्मीरी पंडित प्रतिदिन उसे गीता के श्लोक सुनाता था, एक बार उसकी तबियत खराब थी, उसने अपने पुत्र को दरबार में श्लोक पढ़ने भेजा। किन्तु वह उसे बताना भूल गया था कि कौनसे श्लोक दरबार में नही पढ़ना। पुत्र ने औरंगजेब को गीता के सारे श्लोक अर्थ सहित पढ़कर सुनाए। गीता के श्लोकों को सुनकर औरंगजेब बोखला गया वह इस्लाम को ही सर्वश्रेष्ठ मानता था गीता के श्लोकों से उसका यह भ्रम टूट गया था और उसे यह आभास हो गया था कि सनातन धर्म मैं ऐसे कई ग्रंथ व धार्मिक साहित्य है जो हिंदुओं को अपने धर्म पर अडिग रहने के लिए प्रेरित करता है। यह ज...
राही और मंजिल
कविता

राही और मंजिल

होशियार सिंह यादव महेंद्रगढ़ हरियाणा ******************** राह पर चलते कई बटोही वो मंजिल अपनी भटके हैं, कभी राहें मंजिल बनती हैं, कभी लगते घातक झटके हैं। राही वहीं जो मंजिल पहुंचे, मन मंजिल कहीं नहीं भटके, इस पार-उस पार की सोचे, चलता जाए कभी ना अटके। मुसाफिरखाना जगत कहाये, कुछ दिन ठहरकर जाना है, मंजिल पर चलकर जाना हैं, अंतिम लक्ष्य को ही पाना है। सफल सफर उनका ही हो, सहज सरलता पाये मंजिल, रातें अंधियारी, खत्म जहां, करते नहीं, तारें झिलमिल। जीवन में खुशहाली हो तो, बटोही हँसता झूमता जाता, दुख, दर्द जब राही मिलते, कदम कदम पर रोता पाता। आसान नहीं मंजिल पाना, सदियां बीतानी पड़ती हैं, कभी खुशी फुहार पड़ेगी, कहीं मार कसूती पड़ती है। मंजिल चले, दो राही तो, राह आसान बन जाती है, राह में कांटे बिखरे पड़े, शोणित पग पग आती है। हौसला जनून दिल में हो, बढ़ते ही जाना राही को, डरना न कांटे और खाई, प...
बड़े बाबा की भक्ति
गीत, भजन

बड़े बाबा की भक्ति

संजय जैन मुंबई ******************** विधा : गीत भजन तर्ज : (हम मेहनत कस इस दुनिया से अपना .....) श्री आदिनाथ की भक्ति को श्रुत धाम हम जाएंगे। एक बार नही सौ बार नहीं हम जीवन भर जाएंगे। हम आदिनाथ की......।। माया के चक्कर में पड़कर अपना जीवन तू गवा रहा। और झूठ फरेब करके तू दौलत बहुत कमा रहा। ये दौलत साथ न जायेगे जिस दिन तू मर जायेगा। तब तुझे बड़े बाबा याद आएंगे पर तेरा सब कुछ मिट जाएगा।। श्री आदिनाथ की भक्ति को श्रुत धाम हम जाएंगे। एक बार नही सौ बार नहीं हम जीवन भर जाएंगे। हम आदिनाथ की......।। क्यों अपने मनुष्य जीवन को तू युही गंवा रहा। मिला है तुझे मनुष्य जीवन तो कुछ दया धर्म भी करता जा। यही सब तेरे साथ में जाने वाला है तो तू क्यों इसे गंवा रहा।। श्री आदिनाथ की भक्ति को श्रुत धाम हम जाएंगे। एक बार नही सौ बार नहीं हम जीवन भर जाएंगे। श्री आदिनाथ की......।। परिचय :- बीना (मध्यप्रदेश...
मां पर कविता लिख सकूं
कविता

मां पर कविता लिख सकूं

रमेश चौधरी पाली (राजस्थान) ******************** में कवि हूं मेरी कलम में इतनी ताकत है कि, में दुनियां का बखान कर सकूं। परंतु मेरी कलम में इतनी ताकत नहीं है की में मां का बखान कर सकूं। में कर्जदार हूं मां के उस अमृत का, में कर्जदार हूं मां के उस आंचल का में अपनी कलम से भी नहीं उतार सकता हूं उस कर्ज को। में नमन करता हूं उस मां सुभद्रांगी को, में नमन करता हूं उस मां जेवंताबाई को , में नमन करता हूं उस मां हीराबेन को, जिसने ऐसे शूरवीरों को, जन्म दिया हो। मेरी कलम में इतनी ताकत नहीं है कि में मां पर कविता लिख सकूं। ...... मां पर कविता लिख सकूं।। परिचय :- रमेश चौधरी निवासी : पाली (राजस्थान) शिक्षा : बी.एड, एम.ए (इतिहास) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं फ...
जय जवान जय किसान
कविता

जय जवान जय किसान

विरेन्द्र कुमार यादव गौरा बस्ती (उत्तर-प्रदेश) ******************** जय जवान जय किसान हरा भरा जो करे खेत और खलिहान, यही है देश के सच्चे किसान की पहि चान। देश में नहीं है पानी की कमी, फिर भी क्यों सूखी रहती देश की जमी। जिसे जानना है वो जाने, जिसे पहचानना हो वो पहिचाने। किसान ही उपलब्ध कराये देश को खाने के दाने, जो खेती-बारी हैं देखे, वही किसान को पहिचाने। किसान देश का है अन्न-दाता, लेकिन खुद भूखा है रह जाता। कर्ज के बोझ के तले वह है दब जाता, फिर भी किसान का देश व परिवार से है अटूट नाता। किसान धरती माँ का बेटा कहलाता, किसान का ही बेटा देश की सीमा पर सैनिक बनके है जाता। वह सहर्ष देश की रक्षा में अपने को कर देता कुर्बान, गर्मी हो या सर्दी आधी हो या तुफान। करते देश की सेवा देकर अपनी जान, क्या देश उनको दे पाता पूरा इज्जत व सम्मान। जो दे देते हंसते-हंसते अपने देश के लिए जान।। कहाँ है वे देश के लाल...
चाहतों का नशा
कविता

चाहतों का नशा

रुचिता नीमा इंदौर म.प्र. ******************** बहुत से नशे है इस दुनिया में, किसी को दौलत का, तो किसी को शोहरत का नशा है। किसी को मंदिर का, तो किसी को मदिरा का नशा है। किसी को प्रेम का, तो किसी को सफलता का नशा है। हर किसी को किसी न किसी बात का नशा है, लेकिन सच मे तो यह चाहतों का नशा है। कि हर किसी को कुछ न कुछ पाना है, लेकिन मिलने की बाद भी शांति नही मिलती है, हर ख्वाईश जब पूरी हो जाती है, तो अधूरी सी लगती है। और फिर नई ख्वाईश जाग उठती है, फिर भागने लगते है हम उस मृगमरीचिका के पीछे उस अनजान को पाने के नशे में, जो भागकर कभी भी न मिल पायेगा। हर बार मिला भी सबकुछ, लेकिन ये वो न निकला की जिसके बाद कुछ पाने की ख्वाईश न बची हो। ये नशा ही ऐसा है, जो चढ़ गया तो उतरता ही नहीं, और हम भागते ही चले गए, कभी इधर तो कभी उधर। अब जब थक कर, रुककर देखती हूं तो लगता है कि, ऐसा क्या पाना था मुझको जो मैंने...
अखण्ड ज्योति
कविता

अखण्ड ज्योति

रश्मि श्रीवास्तव “सुकून” पदमनाभपुर दुर्ग (छत्तीसगढ़) ******************** अमावस्या की रात में जब हजारों दिये जलते हैं तो अन्धेरा मालूम नहीं कहाँ खो जाता है व्यक्ति चाह कर भी अन्धेरे से दो चार नहीं हो पाता है उस अंधेरी रात में भी पूर्णमासी की झलक मिलती है दीया और बाती के जलने मे भी बर्फ की ठंडक मिलती हैं व्यक्ति चाहे तो.... जिन्दगी की अमावास की रात में दीवाली की जगमग ला सकता है निराशा की अँधेरी रात में आशा के दीप जला सकता है बस हमें.... जिन्दगी के इस दीये में इंसानियत की तेल और शराफत की बाती चाहिए फिर जिंदगी की लौ शायद ही कभी झिलमिलाये और जिन्दगी एक अखंड ज्योति बन जाए परिचय : रश्मि श्रीवास्तव “सुकून” निवासी : मुक्तनगर, पदमनाभपुर दुर्ग (छत्तीसगढ़) घोषणा : मैं यह शपथ पूर्वक घोषणा करती हूँ कि उपरोक्त रचना पूर्णतः मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच पर अप...
चुनावी हवा
कविता

चुनावी हवा

राम प्यारा गौड़ वडा, नण्ड सोलन (हिमाचल प्रदेश) ******************** शरद हवा के संग-संग चुनावी हवा ने भी पकड़ा रंग सूरज की धूप सदृश नेताओं के चेहरे पे लाली आने लगी है। घोषणा चुनावों की होते ही, हर गांव, हर गली हर मुहल्ले में रवानगी आने लगी है। भाग्य अपना आजमाने टोली नेताओं की घर-घर जाने लगी है। चिकनी-चूपड़ी बातों से, मतदाताओं को रिझाने लगी है। आश्वासनों की कर बौछार नवीन वायदों से भरमाने लगी है। ठण्डी हवा के संग-संग, चुनावी हवा भी रंग पकड़ने लगी है। लोकतंत्र है देश का आधार ये बात जनता की समझ में आने लगी है। निस्वार्थ, निष्पक्ष, निर्भय शतप्रतिशत मतदान करने की अब जनता में होड़ सी लगी है। मतदाताओं का देख उत्साह नेताओं की हृदय कली खिलने लगी है। परिचय :-  राम प्यारा गौड़ निवासी : गांव वडा, नण्ड तह. रामशहर जिला सोलन (सोलन हिमाचल प्रदेश) आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय ह...
मेरे मन को भाती मां
कविता

मेरे मन को भाती मां

बुद्धि सागर गौतम नौसढ़, गोरखपुर, (उत्तर प्रदेश) ******************** मेरी मां दुलारी मां, सचमुच नाम दुलारी मां। सारे जग से प्यारी मां, मेरे मन को भाती मां। जन्म मुझे दिया है मां, आकार मुझे दिया है मां। प्यार मुझे करती है मां, मेरे मन को भाती मां। मुझको खिला पिलाकर मां, बड़ा किया है मुझको मां। जीवन कौशल सिखलायी मां, मेरे मन को भाती मां। हर दुख से मुझे बचाती मां, खुशियां मुझे लुटाती मां। मेरा भला चाहती मां, मेरे मन को भाती मां। याद तुम्हें करता हूं मां, प्यार तुम्हें करता हूं मां। मुझ में हिम्मत भरती मां, मेरे मन को भाती मां। चलना मुझे सिखायी मां, शिक्षक मुझे बनाई मां। खुश मुझको रखती है मां, मेरे मन को भाती मां। कहीं नहीं गई हो मां, मेरे पास सदा हो मां। मेरे दिल में बसती मां, मेरे मन को भाती मां। धन्य धन्य हो, धन्य धन्य हो, धन्य धन्य हो मेरी मां। नमन है तुमको, नमन है तुमको, नमन है तुम...
मुझे बनारस कर दो
कविता

मुझे बनारस कर दो

श्वेता सक्सेना मालवीय नगर (जयपुर) ******************** हे भगीरथी, उतर आओ मन की मरूधरा पर कल्याण कर दो जन्मों की तृष्णा का उद्धार कर दो हे देवांशी, बहा दो संग स्मृतियों की भस्म सब पावन कर दो हे मोक्षदायिनी, मेरी मुक्ति का साधन कर दो हे गंगे, मैं अधीर हूँ तुम्हें छूने को,, मुझे बनारस कर दो परिचय :- श्वेता सक्सेना निवासी : मालवीय नगर जयपुर घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं फोटो के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर अणु डाक (मेल) कीजिये, अणु डाक करने के बाद हमे हमारे नंबर ९८२७३ ६०३६० पर सूचित...
फुलवारियां
कविता

फुलवारियां

विजय गुप्ता दुर्ग (छत्तीसगढ़) ******************** निज बगिया में छटा बिखेरती फुलवारियां बहुत सहेजी घर उपवन की वो क्यारियां। कोर कोर में रची-बसी थी किलकारियां होश जोश दौड़ में देखी सबकी यारियां। अफवाह बाजार में पनपा करती भ्रांतियां निर्भय पथ-संचालन की नई-नई अनुभूतियां एकाकी विवश जन की साहसपूर्ण चुनौतियां दुर्गम दुर्लभ पथ की बड़ी अजीब बेचैनियां। बड़े बड़े आयोजन में आसमयिक दुश्वारियां काम रुका, ना धाम हटा, रहती हैं तैयारियां। देखी समझी राहत ताकत की कई मजबूरियां विस्मृत हो सहयोगी बनने, हो जाती हैं दूरियां कर्मवान को आभास दिलाती हैं नाकामियां ईश्वर क्षमा करें उन्हें, जिनकी नाफरमानियां। साथ चार जनों से भी रह जाती हैं खामियां पर अकेले दायित्व वहन की गहन हैरानियाँ। सामान्य रिवाजों में दिखती रहें नजदीकियां कोई समझ ना पाए रिश्तों की बारीकियां। बालपन से चौथेपन वाली सब जिम्मेदारियां खेल यही जीवन क...
अ-कारण
कविता

अ-कारण

विकाश बैनीवाल मुन्सरी, हनुमानगढ़ (राजस्थान) ******************** अ-कारण कोई आत्महत्या नहीं करता, जनाब ख़ुश होकर कोई नहीं मरता। आपनो के ही आघात ले बैठते है, बैगानो की बातों से कोई नहीं डरता। अ-कारण कोई आत्महत्या नहीं करता, ज़िन्दगी के बोझ से कोई नहीं दबता। तनाव बना देते है दिल मे रहने वाले, वैसे बाहर वालों से कोई फर्क नहीं पड़ता। अ-कारण कोई आत्महत्या नहीं करता, चेहरों से असलियत का पता नहीं चलता। लाज से ही कदम उठाना पड़ता है, यूँ ही जहर का घूंट अच्छा नहीं लगता। अ-कारण कोई आत्महत्या नहीं करता, जो टूट जाता वो अंदर से नहीं हँसता। मानसिक पीर भयंकर होती है, शारीरिक पीड़ा से कोई फंदा नहीं लटकता। परिचय :- विकाश बैनीवाल पिता : श्री मांगेराम बैनीवाल निवासी : गांव-मुन्सरी, तहसील-भादरा जिला हनुमानगढ़ (राजस्थान) शिक्षा : स्नातक पास, बी.एड जारी है घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्...
साथ हर कोई नहीं देता
कविता

साथ हर कोई नहीं देता

श्वेतल नितिन बेथारिया अमरावती (महाराष्ट्र) ******************** हकीकत को छिपा जाते हो हजार किस्से सुना जाते हो! कभी गुस्सा तो कभी प्यार यूँ नाज,नखरे उठा जाते हो! साथ हर कोई नहीं देता यहाँ उम्मीद सबसे लगा जाते हो! जो दिल ने चाहा हुआ कब फ़ज़ूल सपने सजा जाते हो! साथ जिसके हंसे जी भर के अब उसी को रुला जाते हो! परिचय :- श्वेतल नितिन बेथारिया निवासी- अमरावती (महाराष्ट्र) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं फोटो के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर अणु डाक (मेल) कीजिये, अणु डाक करने के बाद हमे हमारे नंबर ९८२७३...
जीवन उत्सव
कविता

जीवन उत्सव

सपना दिल्ली ******************** जीवन उत्सव है सुख-दुःख का संगम.... दुश्मनी, जलन ऊंच-नीच की बात अकड़, जाति-पाति बन्धन से ऊपर उठकर प्रेम करके देखो जीवन उत्सव है। छोड़ कल की चिंता आज में जी बड़ी खुशियों के पीछे न भाग छोटी-छोटी खुशियां बटोर कर तो देखो जीवन उत्सव है। बड़ों का आदर छोटों से प्रेम सहारा बेसहारा का ज़रूरतमंद की मदद करके तो देखो जीवन उत्सव है। छोड़ मोबाइल, लेपटॉप चंद लम्हे अपनों के साथ कुछ अपनी सुनाएं कुछ उनकी सुनो जीवन उत्सव है। उगते सूरज की पहली किरण चांदनी रात चिड़ियों की चहचहाहट... सप्तरंगी दुनिया क़ुदरत की खोकर तो देखो... जीवन उत्सव है। परिचय :- सपना पिता- बान गंगा नेगी माता- लता कुमारी शैक्षणिक योग्यता- एम.ए.(हिंदी), सेट, नेट, जेआर. एफ. अनुवाद में डिप्लोमा ( अंग्रेज़ी से हिंदी), पी.एचडी. (ज़ारी) साहित्यिक उपलब्धियां- १५ से अधिक राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय संगोष्ठियों में सहभ...
मंगल प्रभात
कविता

मंगल प्रभात

मनोरमा जोशी इंदौर म.प्र. ******************** प्राची का पथ लीप सहेली घर घर मे मंगल प्रभात हो। दीन दुखी नंगे भूखों के, खुशहाली मय दिवस रात हो। अरुण थाल रोली भर लावे, आंगन मे सब के बिखरावें रहे न कोई इस वसुधा पर हर घूघट में मुस्कुराहट हो। जन मे मंगल घर घर मंगल, मंगल मय जंगल मे मंगल प्रांची तुम से एक अर्चना? अरुणोदय खुशियां लुटात हो। घर घर मंगल प्रभात हो। जन मन मे उल्लास भरा हो, खिल खिल करती धाम घरा हो। अश्व जुते रथ भरा आ रहा, हर्ष हर्ष गम को मिटात हो घर घर मे मंगल प्रभात हो। परिचय :-  श्रीमती मनोरमा जोशी का निवास मध्यप्रदेश के इंदौर में है। आपका साहित्यिक उपनाम ‘मनु’ है। आपकी जन्मतिथि १९ दिसम्बर १९५३ और जन्मस्थान नरसिंहगढ़ है। शिक्षा - स्नातकोत्तर और संगीत है। कार्यक्षेत्र - सामाजिक क्षेत्र-इन्दौर शहर ही है। लेखन विधा में कविता और लेख लिखती हैं। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में आपकी लेखनी का ...
दीपावली
ग़ज़ल

दीपावली

शरद जोशी "शलभ" धार (म.प्र.) ******************** आदतन इस हादसे पर भी बजा लें तालियाँ। अब उजालों को अँधेरे दे रहेे हैं गालियाँ।। सूर्यवंशी दीप करते जुगनुओं की चाकरी। गीत ग़ुम नेपथ्य में, मंचस्थ मुखरित गालियाँ।। पाप के कुछ पेड़ पुरखों ने उगाए थे कभी। छीन लेतीं पंछियों के प्राण जिनकी डालियाँ।। भर दिए आँसू दीयों में, मन गई दीपावली। मन बहुत भारी रहा हल्की हथेली थालियाँ।। दीप रखती थी हमारे द्वार भी जब ज़िंदगी। कौंधती है याद में अक्सर गई दिवालियाँ।। "शलभ" की ग़ज़लें कि जैसे चाँद के रूमाल पर। बुन रही है एक लड़की उँगलियों से जालियाँ।। परिचय :- धार (म.प्र.) निवासी शरद जोशी "शलभ" कवि एवंं गीतकार हैं। विधा- कविता, गीत, ग़ज़ल। प्राप्त सम्मान-पुरस्कार- राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर (hindirakshak.com) द्वारा हिन्दी रक्षक २०२० राष्ट्रीय सम्मान एवं विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं द्वारा वाणी भूषण, साहित्य सौ...