दर्दे जख्म
प्रवीण कुमार बहल
गुरुग्राम (हरियाणा)
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कभी पूछा तो होता
दर्द क्यों होता है
मैं क्या बताऊं
दर्द रिश्तो को तोड़ भी सकता है
दर्द रिश्तो को जोड़ भी सकता
और जोड़ता भी है समय-समय पर
इससे पहले कि दर्द उठे
वक्त-इज्जत-का ध्यान तो हर बार रखो
चेहरा तो हंसता रहे-जब दिल में दर्द हो
यह चेहरा ही है
जो दर्द ओ गम दिखाता है
रिश्ते टूट जाए
तो दिल का परिंदा उड़ जाता है
कांच का टुकड़ा गिरता है
तो इंसानी जख्म बना देता है
यह जख्म कभी कभी-नासूर बन जाते हैं
जिंदगी के दर्दों से-बच के चलो
हिम्मत से चलो-संभल के चलो देखो
किसी को चोट ना लगे
सामान को भी संभाल कर रखो
तन मन को भी संभाल कर रखो
देखो किसी के जख्मों पर चोट ना लगे
आप अपना फर्ज निभाते चले जाओ
इसका परिणाम मत लो
जिंदगी की खुशबू है
इस खुशबू को चारों ओर फैलने दो
बस मुझसे मत पूछो दर्द क्या
परिचय :- प्रवीण कुमार बहल
जन्म : ११-१०-१९४९
पिता : ड...
























