वक़्त के वक्तव्य
विजय गुप्ता
दुर्ग (छत्तीसगढ़)
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वक़्त पर वक्तव्य होता, कृतत्व से ही पार होगा
कल के इंतज़ार में बंधु, जीवन दुश्वार ही होगा।
"काल करे सो आज कर, आज करे सो अब
पल में परलय होएगी, बहुरि करैगो कब"
कबीर की साखी से, कर्मों में सुधार ही होगा
कल के इंतज़ार में बंधु, जीवन दुश्वार ही होगा।
आज का भी काज है, कुछ कल का भी होगा
टालने की आदत से, आखिर किसका भला होगा
भला खुद का ना करो तो, कई गुना भार होगा।
कल के इंतज़ार में बंधु, जीवन दुश्वार ही होगा।
हर कार्य समय पर होना, माना संभव ना होगा
अनायास विवशता चक्रों से, सबका परिचय होगा
नैतिक शिक्षा अभाव से, मानव जार-जार होगा
कल के इंतज़ार में बंधु, जीवन दुश्वार ही होगा।
शान बनती पूर्णता से, टालने का भी नशा होता
स्वबिम्ब ही गुम जाए, ऐसा धुंधला शीशा होता
क्षमा दया का पात्र बने, जीवन तार -तार होगा
कल के इंतज़ार में बंधु, जीवन दुश्वार ही होगा।
कर्...
























