इक अफसाने को याद कर
बबली राठौर
पृथ्वीपुर टीकमगढ़ (म.प्र.)
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मेरी आज इक अफसाने को याद कर रात गुज़रेगी सनम
जो कल मुझसे मिले थे उनकी याद कर रात गुजरेगी सनम
दो पल ठहरे थे कि उनसे मुलाकात हुई थी हमसे बस
लब्जो के बाण जो चले आज वो याद कर रात गुजरेगी सनम
उन लम्हों में मुझे अपनापन सा मिला था जीवन का
मुहोब्बत हो चली है मुझे वो बातें याद कर रात गुजरेगी सनम
मेरे हर गम, जख्म, दर्द को तथा जज्बातों को समझा था उन्होंने
मेरी आँखों से जो खुशी छलकी थी वो याद कर रात गुजरेगी समन
जिन्दगी का वो हसीन महीना, दिन, तरीख आज ही तो है
क्योंकि उन्होंने मेरा आज ही हाथ थामा है वक्त याद कर रात गगुजरेगी सनम
कभी भी मुझ संग तुम दगा, दिल्लगी ना करना और बेवफाई
क्योंकि आज तुम्हारी वो हर कसमें याद कर रात गुजरेगी सनम
परिचय :- बबली राठौर
निवासी - पृथ्वीपुर टीकमगढ़ म.प्र.
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुर...

























