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इक अफसाने को याद कर
कविता

इक अफसाने को याद कर

बबली राठौर पृथ्वीपुर टीकमगढ़ (म.प्र.) ******************** मेरी आज इक अफसाने को याद कर रात गुज़रेगी सनम जो कल मुझसे मिले थे उनकी याद कर रात गुजरेगी सनम दो पल ठहरे थे कि उनसे मुलाकात हुई थी हमसे बस लब्जो के बाण जो चले आज वो याद कर रात गुजरेगी सनम उन लम्हों में मुझे अपनापन सा मिला था जीवन का मुहोब्बत हो चली है मुझे वो बातें याद कर रात गुजरेगी सनम मेरे हर गम, जख्म, दर्द को तथा जज्बातों को समझा था उन्होंने मेरी आँखों से जो खुशी छलकी थी वो याद कर रात गुजरेगी समन जिन्दगी का वो हसीन महीना, दिन, तरीख आज ही तो है क्योंकि उन्होंने मेरा आज ही हाथ थामा है वक्त याद कर रात गगुजरेगी सनम कभी भी मुझ संग तुम दगा, दिल्लगी ना करना और बेवफाई क्योंकि आज तुम्हारी वो हर कसमें याद कर रात गुजरेगी सनम परिचय :- बबली राठौर निवासी - पृथ्वीपुर टीकमगढ़ म.प्र. घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुर...
पंडाल बनाम अवध महल के राम
छंद

पंडाल बनाम अवध महल के राम

विजय गुप्ता दुर्ग (छत्तीसगढ़) ********************                        (ताटंक छंद) रामायण महाभारत कथा कलयुग को सौगाते हैं दिखे हरेकयुग खोटे चरित्र, कुटिलचाल अपनाते हैं रावण गुणवान अहंकारी, जिससे धरा थर्राए थी भाई विभीषण जपते राम, गाली खरा सुनाए थी बहन शूर्पणखा चालाकी, लंका मरा बनाये थी भाईबहन की साजिशों से, कलयुग में मिट जाते हैं रामायण महाभारत कथा कलयुग को सौगातें हैं दासी मंथरा कुटिलता से, रामतिलक रुकवाती है कैकेयी प्रभावित होकर, हक दशरथ से पाती है समक्ष भरत के आते ही जो, मंगलथाल सजाती है दशरथ वचनपालन खुशी से, वनगमन रामजाते हैं रामायण महाभारत कथा, कलयुग को सौगातें हैं संतानमोह और कुटिलभाव, तात पर हैं जरा भारी दुर्योधन की धमकियां सुनते, सदा सहमाडरा जारी मामा शकुनि भी लेवे शपथ, दूषित परंपरा सारी पितापुत्रों मामाभांजों की, अनेक घर की बातें हैं रामायण महाभारत कथा, कलयुग को सौगातें हैं ...
कुलक्षणी औरत
लघुकथा

कुलक्षणी औरत

आशीष तिवारी "निर्मल" रीवा मध्यप्रदेश ******************** मैं जब भी गाँव जाता तो देखता कि रामदास की घरवाली गृहस्थी के काम में हर पल उलझी ही रहती! बेचारी को पल भर की फुर्सत नहीं थी घर के काम से, शान-शौक तो जैसे सब कब के छूट चुके थे! सिर पर जिम्मेदारी का बोझ था, देखने में लगता जैसे बीमार हो बेचारी! वहीं दूसरी ओर उसका पति रामदास निहायत निठल्ला, कामचोर, पत्तियाँ खेलते हुए समय बेकार करता रहता था! घर की स्थिति बेहद नाजुक थी!गरीबी तो मानो छप्पर पर चढ़कर चिल्ला रही थी कि उसका हमेशा से शुभ स्थान रामदास का घर ही रहा है! इस बार मैं चार महीने से गाँव नही जा पाया था, लेकिन चार महीने बाद में जब गाँव गया तो देखा कि रामदास का तीन कमरे का पक्का मकान बना हुआ था! रामदास ने एक आटो भी खरीद ली थी! सब कुछ बहुत अच्छा हो गया था! मैं ने रामदास से पूछा कि इतना परिवर्तन अचानक कैसे हुआ? और तुम्हारी घर वाली नही दिख र...
हृदयतंत्र से
कविता

हृदयतंत्र से

माधुरी व्यास "नवपमा" इंदौर (म.प्र.) ******************** तेरे इस भवसागर में, खेले तूने कितने कितने खेल। मेरी नन्ही डूबती नैया, जब टकराती थी पर्वत शैल। जल तरंग से मेरी नैया, डगमग जब हिलौरे खाती। सन्नाटे में कभी-कभी, मैं बेचैनी से घबराती। कभी भँवर में घिर जाती, कभी लहरों से वो टकराती। तेरे होते बेफ़िक्री से, कैसी थी मैं इतराती। जब अचानक उमड़ घुमड़ कर, घनघोर घटाएँ छा जाती। नज़र घुमाकर देखूँ तो, तब कहीं नहीं तुझको पाती। तेरी उस अदृश्य छवि में, महफ़ूज कहीं मैं हो जाती। फिर चैन की सांसे लेकर , तुझको अपने मन में पाती। अब तू ही बता हे! प्रभु, कब तक ये जंजाल चलेगा। तेरे इस भवसागर में, मेरा कब प्रारब्ध कटेगा। तेरे अंतर में "मैं" पूरी हूँ, मेरे अंतर में "तेरा" कण। दया बस अब इतनी करना, रहे स्मरण तेरा हर क्षण। परिचय :- माधुरी व्यास "नवपमा" निवासी - इंदौर म.प्र. सम्प्रति - शिक्षिका (हा.से. स्कूल में क...
आजादी का जश्न
कविता

आजादी का जश्न

मिर्जा आबिद बेग मन्दसौर मध्यप्रदेश ******************** चाहे चीन हो या पाकिस्तान हमसे भीडा तो बना देंगे कब्रस्तान.. आजादी का जश्न आज हम मना रहे, आपसी प्रेम, प्यार, सद्भाव बना रहे, बर्दाश्त न करेगे अब हम अपमान.. हम चाहते हैं बना रहे यह सम्मान .. चाहे चीन हो या पाकिस्तान.. तुम्हारे आंतक और भय से डरते नहीं है हम, आंख अगर दोनों ने दिखाई तो ले लेगे दम, चाहे चीन हो या पाकिस्तान.. किसी से कम नहीं है हमारा हिन्दूस्तान.. हरा, सफेद, केसरिया तिरंगा है हमारा, जो हम सबको जान है प्यारा, तिरंगा हम सब की है जान... चाहे चीन हो या पाकिस्तान.. तुम न दो एक दूसरे को सहारा, और समझलो हमारा ईशारा, तुम दोनों से लडने का हमें है अभिमान.. चाहे चीन हो या पाकिस्तान,, आजादी के लिए हम लडे थे और लडेगे आबिद चाहे चली जाए हमारी जान.. चाहे चीन हो या पाकिस्तान. परिचय :- ११ मई १९६५ को मंदसौर में जन्मे मि...
राष्ट्र का स्वाभिमान तिरंगा
कविता

राष्ट्र का स्वाभिमान तिरंगा

डॉ. पंकजवासिनी पटना (बिहार) ******************** जो तिरंगा लहराया स्वतंत्रता दिवस को.... बड़े ही मान से और कितनी शान से! देश के हर्षित नीलाभ आसमान में!! बच्चों की नन्ही-नन्ही हथेलियों में... मारे गर्व और खुशी के इठला रहा था!!! बड़ी ही शान और गर्वित अभिमान से! सबके सीने पर जो नूर सा टँका था! हाथों में सुंदर सा रिबन बन बँधा था!! दमकती सी टोपी बन सिर पर चढ़ा था! अभिनव वंदनवार बन चहुँओर सजा था!! और तो और, देखो कैसे करता था... तरुणियों के कपोलों का दीर्घ चुंबन!! और माथे पर भी बिंदिया सा लगा था!! बीता दिवस उछाह का, निबहे सब रीत!! सुखद सपनों में खोई बीत गई रात! सच का रंग ले सामने आया प्रभात : सड़कों पर देखो इधर-उधर चहुँओर... हा! धूल धूसरित वतन की आबरु है!! चारों तरफ बिखरे हुए नन्हे तिरंगे!! पैरों से रौंदे और कुचलाए हुए! गिरे-पडे़- फँसे-अटके औ कहीं टँगे!! बंदनवारों में फटे-चिटे-रोते तिरंगे! झ...
काली घटाएं
कविता

काली घटाएं

शरद सिंह "शरद" लखनऊ ******************** घिरी है घटाऐ उमड़ घुमड़ बरसे गगन, भिगो गया आँचल मेरा भिगो गया तन मन, पहन चुकी बाना हरित हर तरु की डाली डाली हरित तृन की बिछी धरणी पर चादर मखमली, इन्द्र धनुषी आभा अम्बर मे छाई है। पी कहाँ पी कहाँ की रट पपिहा ने लगाई है चहक चहक उठती है गौरैया घोसलो में, चूँ चूँ चीं चीं की रट उसने लगाई है। देखो वह राम श्याम ,भोला हरि की टोली किलोले करते है कैसी कैसी अमराई मे, वन वन करे नृत्य मयूरा मयूरी संग झीगुर दादुर की धुन चहुँ ओर छाई है। नख से शिख तक भीग गयी हर गोरी, आज इस बदरा ने लालसा जगाई है, आओ श्याम हम तुम रास करे वृन्दावन मे, वृज की हर गोपी ने टेर लगाई है। परिचय :- बरेली के साधारण परिवार मे जन्मी शरद सिंह के पिता पेशे से डाॅक्टर थे आपने व्यक्तिगत रूप से एम.ए.की डिग्री हासिल की आपकी बचपन से साहित्य मे रुचि रही व बाल्यावस्था में ही कलम चलने लगी थ...
श्याम सांवरे
गीत

श्याम सांवरे

डॉ. चंद्रा सायता इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** श्याम सांवरे कभी आना गांव रे। माखन दधि रखेंगी तेरे नाम रे। माखन तुम खाना गौवें चराना। बंसी बजाना पीपल छांव रे। मोर मुकुट सिर कानों में कुंडल छब प्यारी-प्यारी दर्शा जाव रे। जिस श्रतु भी आना रास रचाना। अपने ही रंग में रंग जाव रे। काहे की गोपी काहे का ग्वाला। जित देखे़ उत रहे श्याम श्याम रे उद्धव ने चाहा ज्ञान सिखाना। मूरख को ज्ञान से क्या काम रे। अत्याचार से त्रस्त है जन जन असुरों पर आके करना घात रे। परिचय :- डॉ. चंद्रा सायता शिक्षा : एम.ए.(समाजशात्र, हिंदी सा. तथा अंग्रेजी सा.), एल-एल. बी. तथा पीएच. डी. (अनुवाद)। निवासी : इंदौर मध्य प्रदेश लेखन : १९७८ से लघुकथा सतत लेखन प्रकाशित पुस्तकें : १- गिरहें २- गिरहें का सिंधी अनुवाद ३- माटी कहे कुम्हार से सम्मान : गिरहें पर म.प्र. लेखिका संघ भोपाल से गिरहें के अनुवाद पर तथा गि...
श्री कृष्ण वंदना
कविता

श्री कृष्ण वंदना

विमल राव भोपाल म.प्र ******************** जय नटवर नंद किशोर सांवरा जय यदुवंशी त्रिपुरारी श्री चरण कमल वंदन करूँ जय गोविंद कृष्ण मुरारी जय राधावल्लभ सखा सुदामा जय गौपियन रास मदारी जय कंस पूतना मुक्ति दादा जय मीरा के गिरधारी जय कुंज गलिन के रास रसईया जय ग्वाल सखा मझधारी जय मुरली मनोहर भक्त प्रिये जय चक्र सुदर्शन धारी जय सत्य सनातन के रक्षक जय त्रिभुवन नाथ बिहारी जय विमल नाथ रक्षक श्यामा जय बंदीजन हितकारी परिचय :- विमल राव "भोपाल" पिता - श्री प्रेमनारायण राव लेखक, एवं संगीतकार हैं इन्ही से प्रेरणा लेकर लिखना प्रारम्भ किया। निवास - भोजपाल की नगरी (भोपाल म.प्र) विशेष : कवि, लेखक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं प्रदेश सचिव - अ.भा.वंशावली संरक्षण एवं संवर्द्धन संस्थान म.प्र, रचनाएँ : हम हिन्दुस्तानी, नई दुनिया, पत्रिका, नवभारत देवभूमि, दिन प्रतिदिन, विजय दर्पण टाईम, मयूर सम्वाद, दैनिक सत्ता सुधार में...
माँ की वीरता
कविता

माँ की वीरता

रश्मि श्रीवास्तव “सुकून” पदमनाभपुर दुर्ग (छत्तीसगढ़) ******************** बच्चे की एक चोट देख कर माँ का कलेजा मुंह को आये माँ की वीरता से ही कोई बेटा सीमा पर जाए जहाँ बच्चे को धूप से बचाने ओदनी बन जाती है माँ वहाँ तपते रेतीले टीलों पर करते रहते गश्तिया जवाँ बर्फीली घाटी में जब जब शीत लहर चलती है माँ की रजाई और दुशाले की वो गर्माहट कहाँ मिलती हैं स्कूल से आने में देरी वो पांच मिनट का होता है जाबांजो के माओ के जीवन में अनवरत प्रतीक्षा होता है उन बहनों की हम बात करे जिनका कोई भाई नही पर भाई होकर भी बहनों की राखी को नसीब कलाई नही छाती चौड़ी हो जाती है जब बेटा सेना में जाता है गर शहीद हो जाए तो फिर नाम अमर हो जाता है सेना के लाखो जवानों में भी किस्मत की ही चलती है वो शहीद हो जाता है जिसे भारत माता चुनती है तुम धन्य हो तुम महान हो तुम पर हमको भी नाज है तुम जैसों के बलबुते से ही भारत में ‘सुकून’ आज...
दर्द
कविता

दर्द

श्रीमती ज्योति श्रीवास्तव उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** कतरा कतरा टूटती क्यू ज़िन्दगी हर पल दर्द में डूबी हुई क्यू ज़िन्दगी उन पलों में जिनमें हंसना चाहिए था खिलखिलाकर, अश्क की धारा बनी क्यू ज़िन्दगी हर पल दर्द में डूबी हुई क्यू ज़िन्दगी भोर की पहली किरण मेरी कभी होगी कही, पूर्णिमा की चांदनी भी मुझको अपनी सी लगेगी, स्वप्न में ही बस मुझे क्यू ये बताती ज़िन्दगी, हर पल दर्द में डूबी हुई क्यू ज़िन्दगी तेरी स्नेह ज्योति से जीवन को पाकर ज़िन्दगी सबको बांटा करूगी, ये सपना मेरा अगर सच होता तो कतरा कतरा टूटती ना ज़िन्दगी हर पल दर्द में डूबी हुई क्यू ज़िन्दगी। परिचय :- श्रीमती ज्योति श्रीवास्तव जन्म दिनांक : ५/११/१९६२ निवासी : महाकाल वाणिज्य केंद्र उज्जैन घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं...
पहली बारिश
कविता

पहली बारिश

रमेश चौधरी पाली (राजस्थान) ******************** यह पहली बारिश नया जोश नई उम्मीद लाई है। बारिश की बूंदों से टपकता हुआ वह मोती मानो एक नई उम्मीद लाई है। यह पहली बारिश नया जोश नई उम्मीद लाई है। गावों की मिट्टी महक उठी है, शहरों की गलियां चहक उठी है, बच्चो के चेहरे खिल उठे है। यह पहली बारिश नया जोश नई उम्मीद लाई है। बूंदों के ऊपर बूंदे इस कदर समा रही है, मानो दरिया बना रही हो। यह पहली बारिश नया जोश नई उम्मीद लाई है। अन्नदाता पेनी नजरो से इस कदर मुझे ताक रहा है, मानो मैने उससे बेवफ़ाई की हो। यह पहली बारिश नया जोश नई उम्मीद लाई है। कोयल मधुर गीत से कर रही है मेरा आलीगन, मोर नाच कर कर रहा है मेरा स्वागत। यह पहली बारिश नया जोश नई उम्मीद लाई है। परिचय :- रमेश चौधरी निवासी - पाली राजस्थान घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपन...
महान कौन?
लघुकथा

महान कौन?

अर्चना अनुपम जबलपुर मध्यप्रदेश ******************** दोनों हाथों में कत्थाई रंग की तलवारनुमा आकृति वाली दो सूखी बड़ी फल्लियाँ लिये ग्यारह वर्षीय साकेत मित्र सहित शाम ढले घर आया अतिउत्साह में! "मम्मा! देखो मैं क्या लाया?" मां- "अरे सक्कू! बेटा क्या लाये ये? गुलमोहर की सूखी फल्ली?" (आश्चर्य पूर्वक) साकेत- "नहीं मम्मा ये तो तलवारें हैं, तलवारें, दो मेरी दो मेरे दोस्त शिवु की।" मां- "पर तुम ये क्यों लाये?" साकेत- "महान बनने।" मां- "महान बनने!" (अत्यंत विस्मय से) विभु- "हां आंटी जी, महान बनने, अब हम दोनों मुकाबला करेंगे फिर, जो जीता वो बाकियों से लडे़गा ऐंसे ही तो महान बनते हैं ना?" मां- "तुमदोनों से किसने कहा ऐंसे कामों से कोई महान बनता है?" (क्रोधपूर्वक) साकेत- "वैभव एक साथ-आपने! और हमारी इतिहास विषय की शिक्षिका जी ने।" (सहज भाव से) मां- "क्या; मैने कब कहा? और शिक्षिका से ...
लोक देवता : टंट्या भील
संस्मरण

लोक देवता : टंट्या भील

धीरेन्द्र कुमार जोशी कोदरिया, महू जिला इंदौर म.प्र. ******************** किसी दबे, कुचले, शोषित, वंचित समाज से जब कोई निहित स्वार्थ को त्याग सर्व हितों के लिए उठ खड़ा होता है तो वह जननायक और कभी-कभी लोक देवता का रूप ले लेता है। टंट्या भील भी मालवा निमाड़ के ऐसे ही नायक थे जो गरीबों के मसीहा बन कर आज भी लोक देवता बन पूजे जाते हैं। टंट्या भील का जन्म सन १८४२ में खंडवा के आदिवासी अंचल में भाऊ सिंह भील के घर हुआ था बचपन से ही उनका शरीर दुबला पतला एवं कद लंबा होने से उन्हें टंट्या कहा जाने लगा। टंट्या भील का बचपन बहुत ही संघर्षपूर्ण गुजरा। उनकी मां उनके बचपन में ही गुजर गई थी। उनके पिता ने शादी नहीं की। उन्हें शस्त्र कला में निपुण बनाया। वे लाठी गोफन और तीर कमान का संचालन कुशलता से करते थे। वे अपने क्षेत्र में सब के दुलारे एवं युवाओं के नायक बनकर उभरे। पिता की खेती संभाली चार साल तक सू...
कहो पर सुनो मत
कविता

कहो पर सुनो मत

संजय जैन मुंबई ******************** लिखे वो लेखक पढ़े वो पाठक। जो पढ़े मंच से वो होता है कवि। जो सुनता वो श्रोता होता है। यही व्यवस्था है हमारे भारत की। लिखने वाला कुछ भी लिख देता है। पढ़ने वाला कुछ भी पढ़ लेता है। और कुछ का कुछ अर्थ लगा लेता है। पर सवाल जवाब का मौका किसे मिलता है? यही हालात आजकल हमारे महान देश का है। न कोई सुनता है न कोई कुछ कहता है। अपनी अपनी ढपली हर कोई बजता रहता है। और अपनी धुन में वो मस्त रहता है। इसलिए अब हिंदुस्तान में संवाद खत्म हो गया है। और भारत को विश्वस्तर पर पीछे कर दिया है। जिसका सबसे ज्यादा असर, हिंदी साहित्य पर पड़ा है। और भारत की संस्कृति व इतिहास लुप्त हो रहा है। मंदिर मस्जिद गुरूद्वरा तक भी अब धर्म नही बचा है। और इंसानियत का मानो जनाजा निकल चुका है।। परिचय :- बीना (मध्यप्रदेश) के निवासी संजय जैन वर्तमान में मुम्बई में कार्यरत हैं। करीब २५ वर्ष से बम्बई...
शांत… सुशांत
कविता

शांत… सुशांत

बिपिन कुमार चौधरी कटिहार, (बिहार) ******************** छोटे शहर से आया था एक बड़ा सितारा, कुकर्मों की काली छाया ने जिसे मार डाला, मर कर भी तूं लाखों दिलों पर राज करता रहेगा, पूछे सारा देश तेरे कातिलों को सजा कब मिलेगा, जांच के नाम पर साक्ष्यों पर आंच आती रही, आख़िर क्यों, मुंबई पुलिस सच छिपाती रही, कुछ सफ़ेदपोशों के इशारों पर सब काम हुआ है, मायानगरी की रंगीन दुनिया फ़िर बदनाम हुआ है, खूबसूरत किरदारों से दुनियां को छलने वालों, अंदर कुछ, बाहर से कुछ और दिखने वालों, एक कमिनी ने अपनी सारी हदों को पार कर दिया, झुठे प्यार का तिलिस्म, धोखे से वार कर दिया, मोहब्ब्त की खूबसूरती ही तेरा वजूद, इसी से चमकता है यह पर्दे की दुनियां, बना कर चार यार, प्यार को हथियार, पावन प्रेम को तूने कलंकित कर दिया, सीबीआई जांच का पूरा देश करता इस्तकबाल, न्याय पर हमें भरोसा, गुनहगारों जुर्म करो इकबाल, संघर्ष हमा...
चूहा
बाल कविताएं

चूहा

मईनुदीन कोहरी बीकानेर (राजस्थान) ******************** लुकते-छिपते धीरे धीरे । बार-बार आता चूहा ।। कपड़ों के अंदर घुस जाता। कुतर-कुतर करता चूहा।। जब तक नहीं पकड़ा जाता। धमा चौकड़ी करता चूहा।। चुन्नू - मुन्नू भागे-दौड़े । आंखें मटका डराता चूहा।। दादी कहती पिंजरा लाओ। तब जाकर मानेगा चूहा।। परिचय :- मईनुदीन कोहरी उपनाम : नाचीज बीकानेरी निवासी - बीकानेर राजस्थान घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं फोटो के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर अणु डाक (मेल) कीजिये, अणु डाक करने के बाद हमे हमार...
अनमोल  हीरा  बेटियाँ
कविता

अनमोल हीरा बेटियाँ

सपना आनंद शर्मा इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** मेहँदी रोली कंगन का सिंगार नही होता रक्षाबंधन भाईदूज का त्योहार नही होता रह जाते है वो घर सुने आँगन बन कर जिस घर मे बेटियों का अवतार नही होता जन्म देने के लिए माँ चाहिये राख़ी बांधने के लिए बहन चाहिये कहानी सुनाने के लिए दादी चाहिये जिद पूरी करने के लिए मौसी चाहिये खीर खिलाने के लिए मामी चाहिये साथ निभाने के लिए पत्नी चाहिये पर यह सभी रिश्ते निभाने के लिए बेटियाँ तोह ज़िन्दा रहनीं चाहिये घर आने पर दौड़ कर जो पास आए उससे कहते है बेटियाँ.... थक जाने पर प्यार से जो माथा सहलाए उससे कहते है बेटियाँ.... "कल दिला देंगे" कहने पर जो मान जाए उससे कहते है बेटियाँ..... हर रोज़ समय पर दवा की जो याद दिलाएं उससे कहते है बेटियाँ..... घर को मन से फूल सा जो सजाए उससे कहते है बेटियाँ.... सहते हुए भी अपने दुख को चुपा जाए उससे कहते है बेटियाँ.... दूर जान...
परछाई
कविता

परछाई

रवि कुमार बोकारो, (झारखण्ड) ******************** सुकून की तलाश मे अकेले चल पड़े थे हम, ना कोई आगे नजर आए ना कोई पिछे। नजर आती तो बस एक लम्बी सी सड़क जो मिलो तक फैली है,, लगने लगा मानो सबने साथ छोड़ दिया हो मेरा जैसे सुकून की तलाश में गुमनाम हो बैठे खुद से। समय ढलने को आया तलाशी जारी थी मेरी, सुकून तो मिला नही पर मिला कोई हमसफर, चल रहा था साथ मेरे मेने पुछा कोन हो आप? विनम्रता से बोलीं...परछाई।। परछाई है हम।। परिचय :- रवि कुमार निवासी - नावाड़ीह, बोकारो, (झारखण्ड) घोषणा पत्र : यह प्रमाणित किया जाता है कि रचना पूर्णतः मौलिक है।\ आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं फोटो के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, हिंदी में टाईप करके हमें hi...
ओ मेरी प्यारी बहना
कविता

ओ मेरी प्यारी बहना

दीवान सिंह भुगवाड़े बड़वानी (मध्यप्रदेश) ******************** ओ मेरी प्यारी बहना तू हमेशा खुश ही रहना। आये विपदा कोई तेरे जीवन में बेझिझक तुम मुझसे कहना दुखों को तेरे मुझे है सहना प्रण लिया है यह मैने बहना। माँ की लाड़ली, पापा की परी मेरे लिए बहना तू है सर्वोपरी। मंदिर में ममता के, तू है प्यारी मूरत माँ भी नजर आती है, पिता भी जब मै देखता हूं तेरी सूरत। अगर हो अंधेरा तेरे सफर में तो खुद को जला दूँगा मै राहों में तेरी यदि हो कांटे तो खुद को बिछा दूँगा मै। दुख ना आये कभी तेरे जीवन में बहना मुझ पर रखना प्रेम हमेशा और जीवन भर संग ही रहना। ओ मेरी प्यारी बहना तू हमेशा मुस्कुराते रहना। परिचय :- दीवान सिंह भुगवाड़े निवासी : बड़वानी (म.प्र.) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच पर अपन...
वीर शहीद
कविता

वीर शहीद

श्रीमती शोभारानी तिवारी इंदौर म.प्र. ******************** जन्म से मृत्यु तक मैं फर्ज निभा ऊंगा, अपना जीवन मां को अर्पण कर जाऊंगा, मां तुम ना रोना, उदास ना होना विश्वास तुम रखना, मैं फिर से आऊंगा। जो वीर वतन पर, शहीद हो गए, आंचल छोड़ मां की गोद में सो गए, खून के कतरे कतरे से इतिहास जो रचा, वही दुनिया की पहचान हो गए, उनके पद चिन्हों पर चल इतिहास दोहराऊंगा, विश्वास तुम रखना मैं फिर से आऊंगा। वीरों की बदौलत यह देश खड़ा होता है, सीमा पर देते पहरे, तब देश चैन से सोता है, यादों में मां, पत्नी न ही लाल होता है, मातृभूमि की रक्षा का सवाल होता है, श्रद्धा के सुमन उनके चरणों में चढ़ाऊंगा, विश्वास तुम रखना मैं फिर से आऊंगा। कुर्बानियों से उनके, आजादी पाई है, मुफ्त में नहीं मिली इसकी कीमत चुकाई है, फांसी पर झूले ,सीने में गोली खाई है, तब तीन रंग की विजय पताका गगन में फहराई है, तो मां के माथे पर खून का...
कैसे गाएँ गीत मल्हार
कविता

कैसे गाएँ गीत मल्हार

मुकेश गाडरी घाटी राजसमंद (राजस्थान) ******************** ना देखीं इस वर्ष ये बारिश की बूंदे, क्या होगा पता नहीं जगाई जो उम्मीदें। देख रहा किसान जो आसमान में, बादल छाए बारिश हो जाए। सावन में झूला झूलने का है इंतजार, की कैसे गाए गीत मल्हार -२ देश में बढ़ रहा आतंकवाद, रोकना हमको पापियों का पाप। ईमान का नष्ट होना भ्रष्टाचार का है पनपना, समाज में बढ़ती जा रही बुराइयां। बहन, बेटी, बहू ना जा सकती बाहर, की कैसे गाए गीत मल्हार -२ मानव जो करता खिलवाड़ प्रकृति से, भू-श्रृंगार जो मिटने आया। जीव-जंतु की ना तु दया करता, इसलिए यह कोरोना का प्रकोप आया। अब ठहर जा मानव नहीं तो काल्पनिक होगी पृथ्वी, ईश्वर को ही लेना होगा अब अवतार वरना कैसे गाएं गीत मल्हार-२ परिचय :- मुकेश गाडरी शिक्षा : १२वीं वाणिज्य निवासी : घाटी (राजसमंद) राजस्थान घोषणा पत्र : प्रमाणित किया जाता है कि रचना...
शतरंज के मोहरे की तरह हो गयी ये जिंदगी…
कविता

शतरंज के मोहरे की तरह हो गयी ये जिंदगी…

दिनेश शर्मा 'डीन सा' भीलवाड़ा (राजस्थान) ******************** बिछी हुई बिसात की तरह करते हुए नुमाइंदगी शतरंज के मोहरे की तरह हो गयी ये जिंदगी। मन का यह सुंदर सफेद घोड़ा चलता रहता है सदा ढाई चाल मचल-मचल कर खुद होता बेहाल। सिपाही बना संकल्प मन के घोड़े पर हुआ सवार करता है कोशिश चले सदा सीधा पर अपने ही टेढ़े पन से होता सब बेकार। इच्छा रूपी ऊंट को जिंदगी के इस अंतहीन रेगिस्तान में मिलता नही कोई जब सहारा केवल भागना ही विकल्प है यह सोचकर मन मसोस कर रह जाता बेचारा। गज बना देह का आलस्य हिलता डुलता कभी मचलता किये हो जैसे सूरा पान कभी है चलता अधिक है रुकता चल रहा मतवाली चाल। और जिसको थी इन्हें डालनी जंजीर ऐसा इक वो बुद्धि रूपी वजीर रख नही सका इन पर कोई अंकुश लगा विचरने खुद धरा के चारो कोनो में निरंकुश। शत्रु की तरह लगे ये सभी दिन-रात देने अपने जीवन दाता देह रूपी बादशाह को शह-मात। ऊंचे-नीचे, ख...
आओ साथी अयोध्या चलकर राम- पर्व मनाएँ
कविता

आओ साथी अयोध्या चलकर राम- पर्व मनाएँ

आशा जाकड़ इंदौर म.प्र. ******************** राम हमारी अयोध्या जन्मे कण-कण राम बसे हैं, सरयू नदी के तट पे अयोध्या पावन नगरी बसे हैं। पावन नगरी अयोध्या को हम राम- नगरी बनाएँ, आओ साथी अयोध्या चलकर राम- पर्व मनाएँ। राजा दशरथ परम प्रतापी अयोध्या नरेश हुए थे, कैकेई सुमित्रा और कौशल्या के चार पुत्र हुए थे। राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न के दर्शन कर आएँ, आओ साथी अयोध्या चलकर राम- पर्व मनाएँ। राम हैं मर्यादा पुरुषोत्तम परम पूज्य कहलाए, सीता मैया आदर्श जननी जग में पूजी जाएँ। राम सीता के मंदिर को हम जाकर शीश नवाएँ, आओ साथी अयोध्या चलकर राम- पर्व मनाएँ। राम की महिमा गाने से ही कष्ट निवारण होता, राम नाम लेने से ही बस मोक्ष प्राप्त हो जाता। हम भी आज राम दर्शन से थोड़ा पुण्य कमाएँ, आओ साथी अयोध्या चलकर राम पर्व मनाएँ। परिचय :- आशा जाकड़ (शिक्षिका, साहित्यकार एवं समाजसेविका) शिक्षा -...
विरह वेदना
कविता

विरह वेदना

अन्नू अस्थाना भोपाल (मध्य प्रदेश) ******************** पथराई आंखो में छलकते आंसुओं के समंदर का दर्द है विरह किसे पता है, ये किसकी आँखें है, किसे पता है किसके आंसु हैं, आंसुओं के समंदर पर ये अश्रु है किसके पिया मिलन कि आस लिए, विरह में पथराई सजनी कि आंखे अपने बच्चों से विरह हुए, माँ कि आँखें भी हो सकती है, या पिता के अश्रुओं का समंदर भी हो सकता है विरह केवल बौझिल बेदम नहीं है जीत का मार्ग भी होता है विरह। सीता से विरह के बाद ही लंका पर विजयश्री का मार्ग प्रशस्त किया, श्री राम ने पत्नी रत्नावली के प्रेम से विरक्त होकर, विरह जीवन बिताकर रामबोला से गोस्वामी तुलसीदास बन, रचित किया श्रीरामचरित्रमानस ग्रंथ विरह में केवल डूबना हि नहीं होता भव सागर भी पार हो जाता। परिचय :-  अन्नू अस्थाना निवासी :- भोपाल, मध्य प्रदेश कविता लिखने कि प्रेरणा :- कवि संगोष्ठीयों में भाग लेते थे एवं...