जीवनधारा
बिपिन कुमार चौधरी
कटिहार, (बिहार)
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कोई नहीं चाहे गम यहां पर,
खुशियां ही सबको है प्यारा,
चलता नहीं किसी का वश,
यही है धुवसत्य जीवनधारा,
माया जाल में गोता लगाएं,
ज्ञान, धन या रुतबा जुटाएं,
कितना भी कर लें हमारा तुम्हारा,
मृत्यु द्वार तक ले जाये जीवनधारा,
बेचा ईमान, चाहे किया महादान,
करती यह है, सबका कल्याण,
सेठ, साहूकार या हो निर्धन-बेसहारा,
सबकी नाव खेबे यही जीवनधारा,
जन्म मृत्यु का जीवन चक्र,
खुशी और गम इसका किनारा,
करे चाहे हम लाख जतन,
निर्बाध, उन्मुक्त यह है बंजारा,
रहो चिंतामुक्त, करो सत्कर्म,
रहेगा अमर, कृति और जीवन,
जब तलक रहेगा चांद सितारा,
यही पावन संदेश देता जीवनधारा..
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.परिचय :- बिपिन बिपिन कुमार चौधरी (शिक्षक)
निवासी : कटिहार, बिहार
घोषणा पत्र : प्रमाणित किया जाता है कि रचना पूर्णतः मौलिक है।
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