मुर्दे
धैर्यशील येवले
इंदौर (म.प्र.)
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कौन कहता है वे जी रहे थे
सालो से आंख बंद कर सो रहे थे
वे तो मुर्दा थे जो चल रहे थे
जिंदगी का बोझ ढो रहे थे।
किसने कत्ल किया उन्हें
मत पूछ, ये सब झूठ है
जिनको तुम जिंदा समझ रहे हो
वे मुर्दे सिर्फ जिंदगी ढो रहे थे
जिंदगी का बोझ ढो रहे थे।
उनके जिस्म में खून था ही नही
जो बह निकला वो पानी है
पानी तो बहता रहता है
पानी बहने पर कौन रोता है
हम लखपति हो गए है, वे
आसमान से खुश हो कह रहे थे
जिंदगी का बोझ ढो रहे थे।
अच्छा है चिर निद्रा में सो गये
वे तो जागते भी सोए हुए थे
एक जरूरत पड़ जाती थी उनसे
वे पांच साल में एकबार तर्जनी पे
सोते में अमिट शाही लगवाते थे
वे तो मुर्दा थे जो चल रहे थे
जिंदगी का बोझ ढो रहे थे।
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परिचय :- धैर्यशील येवले
जन्म : ३१ अगस्त १९६३
शिक्षा : एम कॉम सेवासदन महाविद्याल बुरहानपुर म. प्र. से
सम्प्रति : १९८७ बैच के सीधी भर्ती...

























