भयंकर बाढ़
विनोद वर्मा 'दुर्गेश'
तोशाम (हरियाणा)
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रात भर लगातार मूसलाधार बारिश हो रही थी। गाँव और शहर भयंकर बाढ़ की चपेट में आ चुके थे। चारों ओर पानी ही पानी का साम्राज्य स्थापित हो चुका था। गाँव के गाँव बाढ़ की भेंट चढ़ चुके थे। असंख्य मवेशी और पंछी भी बाढ़ के पानी में बह गए थे। रघु काका गाँव से दूर उजड़ी बस्ती में एक ऊँचे टीले पर बनी अपनी झोपड़ी में अकेले ही थे। बाढ़ का पानी वहाँ तक नहीं पहुँच पाया था। परंतु बारिश के कारण उसकी झोपड़ी से पानी टपक-टपक कर गिर रहा था। रघु काका चिंतित मुद्रा में कभी चारपाई को इस ओर करते तो कभी उस ओर। ऊपर से मच्छरों की भिनभिनाहट ने जीना मुहाल कर दिया था। एक तो पानी टपकने से झोपड़ी में तालाब का साम्राज्य स्थापित हो चुका था वहीं दूसरी ओर रात भर सो न पाने के कारण रघु काका की आंखें लाल हो गया थी। चूल्हे में पानी भर जाने के कारण रोटी बनाने के लाले भी पड़ गए...
























