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कहाँ गई तुम दीदी
कविता

कहाँ गई तुम दीदी

श्रीमती क्षिप्रा चतुर्वेदी लखनऊ (उत्तर प्रदेश) ******************** घर के नींव की ईंट थी दीदी तुम सहसा पतझड़ी हवा ने बिखेर दिए हर ईट इस घर की, विरान कर गई वो आंगन जिसमें तुम्हारी मुस्कुराहटें खिलखिलाती थी!! हम एक वृक्ष से उत्पन्न पत्ते, नहीं जानते थे, कहाँ जाते है शाख से टूटकर धरा पर सूखे पत्ते सा कर गई जीवन हम सबका, नहीं समझ पाये तुम्हारा यूँ चले जाना आजतक !! जिंदगी के हर उतार-चढाव की साथी थी तुम, आज भी आंखों की नमी हो तुम, मेरी हंसी में कौन हॅसेगा साथ मेरे, दुःख में कैसे मुस्कराते हैं, सिखाती थीं तुम !! तुम्हारा चले जाना पिताजी सह ना सके , टूट कर बिखरे हम अब तक जुड़ ना सके थोड़ा तो ठहर जाती साथ हमारे माँ को कैसे ऐसे छोड़ गई तुम ?? आज भी हर एक के हृदय में बसी हो तुम, मुझे पता है मेरे आसपास ही हो तुम, बार बार दिल कहता है कहीं से लौट ...
अलविदा २०२५
कविता

अलविदा २०२५

किरण विजय पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** अलविदा कहे नफरत को, अलविदा कहे द्वेष को, अलविदा कहे आलस को, अलविदा कहे कटुता को, अलविदा कहे दुश्मनी को, अलविदा कहे राग को, अलविदा कहे कुविचारो को, अलविदा कहे मन के मेल को, अलविदा कहे अन्याय को, अलविदा कहे आतंक को, अलविदा कहे गरीबी को, अलविदा कहे विकारो को, अलविदा कहे दुष्टता को, अलविदा कहे अत्याचार को और अलविदा कहे 2025 को, अलविदा कहे शिकवा गिला को, सुबह उगते सुरज की किरणो के साथ नया सवेरा लायेगे 2026 की नयी कविता के साथ। परिचय : किरण विजय पोरवाल पति : विजय पोरवाल निवासी : सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) शिक्षा : बी.कॉम इन कॉमर्स व्यवसाय : बिजनेस वूमेन विशिष्ट उपलब्धियां : १. अंतर्राष्ट्रीय साहित्य मित्र मंडल जबलपुर से सम्मानित २. अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना उज्जैन से सम्मान...
हां रामसकाल आ गया है
कविता

हां रामसकाल आ गया है

राजेन्द्र लाहिरी पामगढ़ (छत्तीसगढ़) ******************** जयंती समारोह के एक कार्यक्रम में कड़वे आसवित जल के सुरूर लेकर वो आ गया, सीधे आयोजकों से टकरा गया, बोला बैनर जो टंगा है उसमें मेरा क्यों चित्र नहीं है, कार्यकर्ताओं में मेरा कोई मित्र नहीं है, इसीलिए इस बैनर को यहां से हटाओ, मेरे फोटो वाला बैनर लगाओ, एक युवा कार्यकर्ता तमतमा गया, भयंकर गुस्से में आ गया, समता समानता के इस कार्यक्रम में कोई किसी पर दबाव नहीं बनाएगा, कोई अपनी राजनीति नहीं चमकाएगा, दूर दूर से भी और कुछ पास से अतिथि आये, कार्यक्रम के उद्देश्य और अपने विचार बताये, मगर रामसकाल कभी नजदीक बैठता तो कभी दूर, पूरे कार्यक्रम के दौरान कम नहीं हुआ उनका सुरूर, कभी कहता कि इन सब का खर्चा मैंने उठाया है, मेरे कारण आयोजन सफल हो पाया है, उस दिन एक मछली तालाब कैसे गंदा करता है, सकार...
जीवन एक संगीत है
कविता

जीवन एक संगीत है

डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी ******************** जीवन एक संगीत है और यही मेरा मीत है और यह मेरी जिंदगी का गीत है। ******* जिस प्रकार संगीत के स्वर है सात। हमारी जिंदगी में सच होती है ये बात। ******** संगीत से हमें खुशी मिलती है जिंदगी की उदासी दूर रहती है। ******** हमारी सांसों में हमारी बातों में संगीत है। मधुर है ये जिंदगी का गीत है ******** संगीत हमारी जिंदगी में आनंद भर देता है। ग़म से खुशी की ओर ले चलता है। ******** जो संगीत को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाता है। वो अपनी जीवन को खुशियों का द्वार बनाता है। ********* संगीत के स्वरों को अपनी जिंदगी में घोलिए। और अपने आप को आनंद की तराजू में तौलिए ******* अगर आपको जाना है ग़म की दुनियां से दूर तो अपनाईये संगीत को जरूर। ********* परिचय : डॉ. प्रताप मोहन "भारतीय" निवासी : चिनार...
मृग नयना तेरे
कविता

मृग नयना तेरे

छत्र छाजेड़ “फक्कड़” आनंद विहार (दिल्ली) ******************** न रात हुई आज पहली बार ना तारे ही निकले पहली बार मगर... अहसास किया दिल नें ये तारे महज तारे कहाँ झाँक रहे हैं हर तारे से चंचल मृग नयना तेरे..... ना पाखी उड़े नभ पहली बार ना फूलों पे भँवरे डोले पहली बार मगर... तेरे मदहोश इशारों ने जगाये अल्लहड़ अरमान कमसिन कजरारे ये बंकिम मृग नयना तेरे...... ना आज बसंत आया पहली बार ना कोयलिया कूकी पहली बार मगर..... सरगम सी उठी झंकृत हुई पायलिया बजाये सुरीले सुर सुलोचन मृग नयना तेरे..... ना घिरी घटायें आज पहली बार ना ही चली पवनवा पहली बार मगर.... चून्नर के लहराने संग लहराये मधुर मीठे सपने भीगे भीगे से यौवन सिंधु में मृदमयी मृग नयना तेरे..... ना झरने झरे आज पहली बार ना भीगी लंबी लटें पहली बार मगर.... भीगी स्याह जुल्फों से शबनम के कणों सी ल...
दिव्य दिवाकर
छंद

दिव्य दिवाकर

शिमला शर्मा "लक्ष्मी प्रिया" ग्वालियर (मध्यप्रदेश) ******************** (मदिरा सवैया छंद) दिव्य दिवाकर मंद हुए, यह ठंड भयंकर रूप धरे। शीत हवा कुहरा बिखरा, अब पीत परे सब पात हरे। तुंग हिमालय श्वेत हुए, हिम सागर शीत बिहार झरे। शीत प्रभाव सु-प्रीति फले, मन यौवन अंग उमंग भरे। परिचय :- श्रीमती शिमला शर्मा "लक्ष्मी प्रिया" निवासी : ग्वालियर (मध्यप्रदेश) रुचि : गद्य/पद्म लेखन एवं गायन घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। प्रिय मित्र, शुभचिंतक एवं परिवारजन आप सभी को नववर्ष पर हार्दिक शुभकामनाएँ। आशा है इस अवसर पर आप को प्रेषित मेरी नई स्वरचित रचना लिंक को टच कर पढ़ने का कष्ट कर प्रोत्साहित करेंगे एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख कविता को लाइक करेंगे ...🙏🏻😊💐💐💐 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानियां, ...
एक साल की बैलेंस शीट
कविता

एक साल की बैलेंस शीट

विजय गुप्ता "मुन्ना" दुर्ग (छत्तीसगढ़) ******************** एक साल की बैलेंस शीट कभी बनाकर तो देखो। स्वयं से लेकर राष्ट्र तलक विकास गाथा भी झांको। एक छोर सम्मान प्रतिष्ठा में छाती चौड़ी होती है। पर साजिश के अपमानों से, भारत माता रोती है। द्वेष कलंकित दंश योजना धर्म पूछकर कत्ल करे। खुला खेल फर्रुखाबादी धर्म विरोधी जहर भरे। अनुभव सिंदूर बतला गया, बदला लेना झांकी है। ताकत देश की पहचान लो, असला मसला बाकी है। ड्रोन रॉकेट पिनाकी देख, शत्रु सांस अटकी देखो। राफेल व्याख्या सफल यात्रा, देखदेख कर भी भटको। एक साल की बैलेंस शीट कभी बनाकर तो देखो। स्वयं से लेकर राष्ट्र तलक विकास गाथा भी झांको। एक छोर सम्मान प्रतिष्ठा में छाती चौड़ी होती है। पर साजिश के अपमानों से, भारत माता रोती है। नेता मंत्री संत जनों से, बिगड़ी बोली स्वाद चखा। मांगी किसी ने कभी माफी, बोला कोई बोल यथा। ...
नया साल
कविता

नया साल

डॉ. राजीव डोगरा "विमल" कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) ******************** नए साल की शुरुआत हे! माँ काली तेरे विश्वास पर करता हूँ। मानता हूँ कि मैं खास नहीं मगर तेरे ऐतबार पर नए साल पर एक नई शुरुआत करता हूँ। छोड़ चुके हैं जो लोग उनको भूलाने की एक कोशिश करता हूँ, और जो आ रहे हैं जीवन में बनकर तेरा साया उनको अपनाने की कोशिश करता हूँ। ढूंढता रहा हर साल हर इंसान में खुशियां अपनी अब शून्य में लीन होकर गुरुदेव शिव पर ऐतबार करता हूँ। परिचय :-  डॉ. राजीव डोगरा "विमल" निवासी - कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) सम्प्रति - भाषा अध्यापक गवर्नमेंट हाई स्कूल, ठाकुरद्वारा घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। प्रिय मित्र, शुभचिंतक एवं परिवारजन आप सभी को नववर्ष पर हार्दिक शुभकामनाएँ। आशा है इस अवसर पर आप को प...
वर्ष २०२६ में बारह राशियों का हास्यफल (राशिफल)
व्यंग्य

वर्ष २०२६ में बारह राशियों का हास्यफल (राशिफल)

आशीष तिवारी "निर्मल" रीवा मध्यप्रदेश ******************** मेष राशि : हर साल की तरह २०२६ भी तुम से मजे ही लेकर जाएगा...अमीर बनने का सपना तुम्हारा केवल सपना ही रह जाएगा। तुम बस आमिर खान की फिल्में देखो, आमिर खान भी इसी लिए फ्लॉप हो रहा है क्योंकि तुम्हारे जैसे पनौती दर्शक हैं उसके ....प्रेम संबंधों के मामलो में लकी रहोगे कोई रुचि ही नहीं लेगी तो ब्रेकअप का भी दूर दूर तक आसार नहीं है...खैर तुम्हारी वाली ऐसा होने भी नहीं देगी....सबको तुम्हारी बहन बना देगी....स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहना, शनि की तीसरी दृष्टि के कारण किसी कन्या पर दृष्टिपात करते हुए धरे पकड़े जाओगे और बुरी तरह जुतियाए भी जा सकते हो.!! वृषभ राशि : जैसी राशि वैसे ही बैल जैसी पर्सनालिटी है और बुद्धि भी। कर्म करने जाते हो और कांड करके आते हो। अच्छा बनने के प्रयास में हमेशा गोबर कर आते हो...आर्थिक स्थिति में सुधार के आस...
चादर
कविता

चादर

डॉ. किरन अवस्थी मिनियापोलिसम (अमेरिका) ******************** हम अपनी चादर में पैर समेटे सदियों तक बैठें रहे धूल का गुबार उनका उड़ा जो पांव पसारते चले गये हमने न की कभी शिकायत वो चादर हमारी उघाड़ते चले गये इतनी बड़ी थी चादर हमारी वो काटते चले गये हम अपना रक्त मानते रहे हम खुशी से और देते रहे हम सहिष्णुता से रहते रहे कुछ फिर भी असहिष्णु होकर हमें नकारते रहे बची खुची चादर भी खींचते रहे हम एक-एक टुकड़ा भी दान कर दें? चादर तो छोड़ें, स्वयं को दान कर दें? परिचय :- डॉ. किरन अवस्थी सम्प्रति : सेवा निवृत्त लेक्चरर वर्तमान निवासी : मिनियापोलिस, (अमेरिका) शिक्षा : एम.ए. अंग्रेजी, एम.ए. भाषाविज्ञान, पी.एच.डी. भाषाविज्ञान सर्टिफिकेट कोर्स : फ़्रेंच व गुजराती। सम्प्रति : आप राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच अमेरिका शाखा की अध्यक्षा है। पुनः मैं अपने देश को बहुत प्यार ...
नववर्ष की दस्तक
कविता

नववर्ष की दस्तक

नील मणि मवाना रोड (मेरठ) ******************** पुराना साल विदा ले गया अनकही सीखें दे गया कुछ आँसू कुछ मुस्कान जीवन का नया विधान। नववर्ष आया द्वार खड़ा आँखों में सपनों की धूप कहता है- चलो फिर से लिखें अपने कल का सुंदर रूप। बीते कल की भूलों से अब लेना है बस ज्ञान कड़वाहट को छोड़ चलें मन में भर लें विश्वास। हर दिन हो थोड़ा बेहतर हर रिश्ता कुछ और गहरा मेहनत सच्चाई करुणा से सजाएँ भविष्य का सवेरा। नववर्ष नहीं केवल तारीख यह तो उत्सव संकल्पों का रोज थोड़ा अच्छा करना- बस यही संदेश नववर्ष का। परिचय :- नील मणि निवासी : राधा गार्डन, मवाना रोड, (मेरठ) घोषणा : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। प्रिय मित्र, शुभचिंतक एवं परिवारजन आप सभी को नववर्ष पर हार्दिक शुभकामनाएँ। आशा है इस अवसर पर आप को प्रेषित मेरी नई स्वरचित रचना लिंक ...
दिव्योत्थान अंतर्राष्ट्रीय एक्सीलेंट अवार्ड 2025 कार्यक्रम सम्पन्न
सामाजिक, साहित्यिक

दिव्योत्थान अंतर्राष्ट्रीय एक्सीलेंट अवार्ड 2025 कार्यक्रम सम्पन्न

इंदौर म.प्र.। दिव्योत्थान एजुकेशन एंड वेलफ़ेयर सोसायटी एवं राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच के सँयुक्त तत्वावधान में दिव्यांग भाई बहनों के सहायतार्थ "दिव्योत्थान अंतर्राष्ट्रीय एक्सीलेंट अवार्ड 2025" कार्यक्रम का आयोजन अभिनव कला समाज गाँधी हॉल इंदौर में आयोजित किया गया। संस्था दिव्योत्थान के सम्मान समारोह में मुख्य रूप से नारायण यादव (वरिष्ठ समाजसेवी) उज्जैन, मुख्य अतिथि कुशाभाऊ ठाकरे विश्वविद्यालय रायपुर, छत्तीसगढ़ के पूर्व कुलपति महोदय प्रो.डॉ. मानसिंहजी परमार, मुख्य अतिथि पुष्पेंद्र वास्कले (उपसंचालक संभागीय जनसम्पर्क कार्यालय इंदौर), विशिष्ठ अतिथि प्रवीण खारीवाल (अध्यक्ष स्टेट प्रेस क्लब), विशिष्ठ अतिथि योगेंद्र नाथ शुक्ल (वरिष्ठ लघुकथाकार इंदौर), विशेष अतिथि इस्माइल लाहिरी (प्रसिद्ध कार्टूनिस्ट), सुरेश सीतलानी (वरिष्ठ समाजसेवी एवं उद्योगपति) आदि उपस्थित थे। कर्यक्रम माँ सरस्वती के पूजन, माल...
बिदाई की वेला आई
कविता

बिदाई की वेला आई

संजय कुमार नेमा भोपाल (मध्य प्रदेश) ******************** हम सब विचार करें केलेंडर वर्ष २०२५ बिदाई की वेला आई। उम्र की डोर से रोज एक मोती झड़ रहा है.... तारीख़ों के जीने से यह हमारी नियति है। २०२५ में कई सुखद यादें जुड़ी। नये साल के साथ अब सुखद यादें जुड़ी रहें। उम्र का पंछी नित दूर, और दूर निकल रहा है.. नया साल में अब वक्त का इंतजार है - गुनगुनी धूप और ठिठुरती रातें जाड़ों की... गुज़रे लम्हों पर.. झीना-झीना सा इक पर्दा गिर रहा है.. अब ज़िन्दगी का नया दौर गुज़र रहा है... इंतजार है नये वर्ष में नये स्वप्ननों का नये अनुभवों का। आप सभी को आने वाले केलेंडर नये "वर्ष 2026 का" हर दिन शुभ मंगलमय हो। आप सभी का अभिनंदन है, वंदन है नये वर्ष में। ईश्वर से प्रार्थना आपके सभी मनोरथ पूर्ण हो, आप सभी सपरिवार स्वस्थ एवं खुश रहें... इन्हीं शुभकामनाएं सहित ... परिचय :- स...
नव वर्ष का अभिनंदन
कविता

नव वर्ष का अभिनंदन

कमल किशोर नीमा उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** हुआ सबेरा निकला सूरज मानव अब क्यों सोते हो। नया वर्ष हो नूतन सबका यही कामना सब की हो। हुआ सबेरा…. भेदभाव के बन्धन तोड़ो ऊँचे नीचे की राहें मोड़ो। सिर्फ़ अपने की बातें छोड़ो समानता से पंथ को जोड़ो। यही कामना… नव युवकों तुम युग चेतन हो अराजकता के तुम भेदक हो। अहिंसा अस्त्र उठाकर देखो तुम भारत माँ के सपूत हो। नया वर्ष ….. दानी दानों के तुम पुष्प चढ़ाओ उद्योगों व किसानों की वेदी पर। बेकारी भागेगी कोसो दूर तक सँवरेगा जब श्रमजीवियों का तप। यही कामना…. ओ भारत माता के रक्षक प्रहरी कमल की तुम तक पहुँचे पुकार। नूतन वर्ष की शुभकामनाओं का परिवार सहित तुम्हें पहुँचे उपहार। यही कामना…. पत्र,पत्रिका,टीवी की उपयोगिता शिक्षित करना कर्तव्य और ज्ञान। बीती बातों पर बहस कराना व्यर्थ देश की महिमाओं का बखान हो। य...
धारण तो कीजिए
कविता

धारण तो कीजिए

विजय गुप्ता "मुन्ना" दुर्ग (छत्तीसगढ़) ******************** नेक नीति नियति का हरेक युग में उपहास हुआ है, मगर धर्म अनुगामी आदर्श कर्म का क्या कीजिए। तोड़ा फोड़ा कलंक आचरण खूब विपर्यास हुआ है, हिरणकश्यप रावण कंस को पनपने क्यों दीजिए। आदर्श न्याय कर्म पालक से द्वेष एहसास हुआ है, आंख मिलान कन्नी काटने चंद्रहास मजा लीजिए। बरसों बाद श्रीराम लला का भव्य पुनर्वास हुआ है, बकवास निहित अट्टहास को वनवास करा दीजिए। पड़ोस पथ से राष्ट्र तलक नेकी का परिहास हुआ है, अब राष्ट्र विरोधी वक्तव्य का अनुप्रास भुला दीजिए। नेकी बदनियत दोनों का जगत में इतिहास हुआ है, बर्बाद मंजर देखने फिर वही केनवास टांग लीजिए। चाल चरित्र चक्र संवारने मौकों पर विश्वास हुआ है, कुटुंब संस्था समाज हित में ’मुन्ना’ अरदास कीजिए। न्यूज पेपर टीवी बदहवास आलम आसपास हुआ है, विकसित दिशा दशा सम्मान भी धारण तो कीजि...
सत का मान बढ़ाया
कविता

सत का मान बढ़ाया

प्रमेशदीप मानिकपुरी भोथीडीह, धमतरी (छतीसगढ़) ******************** सतनाम के ध्वज से सत का मान बढ़ाया जीवन को कैसे जीना है हमको सिखाया स्वयं शूल पर चल सत्य का राह अपनाया सत्य के राही बन सबको सत्मार्ग दिखाया जीव- जीव सब एक, एक ही सबके प्राण जीव में नहीं कोई भेद है, समझ ले इंसान जगत में एकता का जिसने भाव जगाया सत्य के राही बन सबको सत्मार्ग दिखाया चलो बने हम सब भी सत्य के अनुयायी जिसकी महिमा रहती है सदा आनंददायी सारे जग पर सत्यनाम को सहज फैलाया सत्य के राही बन सबको सत्मार्ग दिखाया जगत के मानव-मानव सबकी एक जात उड़े प्राण पखेरू तब, मिलेंगे एकहि घाट जात-पात का झूठे प्रपंच को भी मिटाया सत्य के राही बन सबको सत्मार्ग दिखाया संयमित हो जीवन, सत के साथ चलना छल कपट से दूर रहकर,आगे निकलना जीव की सदगति का नित उपाय बताया सत्य के राही बन सबको सत्मार्ग दिखाया परिचय :- प्रमेशदीप मा...
यादें
कविता

यादें

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** साल जा रहा देकर हमको न, याद में ठहरे लोग। भोले-भाले, साथ निभाते, भले-बुरे सब लोग।। स्मृतियाँ कुछ मीठी होतीं, तो कुछ कड़वी होतीं, समय बीतता, पर यादें में, अज़ब-निराले लोग। अरमानों में रंग भरे हैं, तो कुछ अति फीके, हाथ मिलाते, नेह निभाते, प्रीति जताते लोग। कर्म-भाग्य ने मिलकर के ही, परिणामों को सौंपा, मित्र बन गये अनजाने में, आगे बढ़कर लोग। भूल सकूँगा नहीं किसी को, जिन्हें विगत ने पाया, सदा ही ठहरे रहेंगे यूँ ही, सदा सुहाते लोग। जीवन की गाड़ी चलती है, मिलते लोग-बिछुड़ते, यादों में सब रहें सुरक्षित, प्रेम बहाते लोग। लौट नहीं आता है बीता, बीती बातें शेष, दूर हो गये,या बिछुड़े वे, याद समाते लोग। जीवन की रफ़्तार तेज है, भाग रहा है रोज़, अच्छी स्मृतियाँ का है वंदन, जिनमें ठहरे लोग।। परिचय :- प्रो. ...
अर्द्धनारीश्वर
कविता

अर्द्धनारीश्वर

श्रीमती क्षिप्रा चतुर्वेदी लखनऊ (उत्तर प्रदेश) ******************** रूप लिया अर्द्धनारीश्वर का, शिव-शक्ति कहलाते, शिव प्रारम्भ शक्ति है ब्रह्मांड तभी तो अर्द्धनारीश्वर कहलाते!! आधा भाग नर का, आधा बना नारी का, शिव बिन शक्ति अधूरी- शक्ति बिन शिव अधूरे हो जाते!! प्रश्न एक कौंधा मन मे बार बार, पुरुष का रूप लेकर जो करते नारी सा शृंगार, कौन हैं ये लोग, क्यों दर दर पाते तिरस्कार!! घर घर आशीर्वाद पहुंचाते, बधाई के गीत गाते, फिर भी समाज से बहिष्कृत हो स्नेह को तरसते! आसान नहीं इनका जीवन, हर मोड़ पर चुनौतियां आती, तिल तिल दम तोड़ते, शिव शक्ति का सृजन ये, किन्नर कहलाते! अर्द्धनारीश्वर जब घर-घर पूजे जाते ईश्वर की ही रचना हैं ये, फिर क्यों अधूरे कहलाते?? प्रश्न बड़ा है समाज के ठेकेदारों से मेरा, क्यों नहीं इनको हम अपनों जैसा अपनाते??? प...
विजय दिवस
आलेख

विजय दिवस

मन्नत रंधावा कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) ******************** हर साल १६ दिसंबर को मनाया जाने वाला विजय दिवस, भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण दिन है। यह १९७१ के भारत-पाक युद्ध में भारतीय सशस्त्र बलों की पाकिस्तान पर विजय का प्रतीक है। यह एक ऐतिहासिक संघर्ष था जिसने न केवल भारत की सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया, बल्कि मानवीय मूल्यों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता की भी पुष्टि की। यह दिन हमारे उन सैनिकों के बलिदान और वीरता का स्मरण करता है जिन्होंने आधुनिक इतिहास की सबसे निर्णायक विजयों में से एक में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस युद्ध में ३० लाख से अधिक लोगों की जान गई और १०० लाख बांग्लादेशी निर्वासित हो गए।26 मार्च को बांग्लादेश अपना स्वतंत्रता दिवस मनाता है, और इसी दिन से इस युद्ध की भयावहता शुरू हुई थी। लगभग नौ महीने बाद, १६ दिसंबर को, अंततः सब कुछ समाप्त हो गया। पूर्वी और पश्चिमी पाकि...
कंजूस मक्खीचूस
व्यंग्य

कंजूस मक्खीचूस

डॉ. मुकेश ‘असीमित’ गंगापुर सिटी, (राजस्थान) ******************** अख़बार में ख़बर आई कि एक अमीर महिला को “दुनिया की सबसे कंजूस करोड़पति” घोषित किया गया है। करोड़ों की मालकिन, मगर खाने-पीने पर खर्च जैसे उसकी जान निकल जाए। कंजूस शब्द का अर्थ तो सब जानते हैं, पर कंजूसी का दर्शन वही समझे जिसने ऐसे जीवों को पास से देखा हो। मानो इनके डीएनए में ही ‘सेविंग’ का जीन बैठा हो। कंजूस लोग धन को संग्रह करते हैं, उपभोग नहीं। मगर यह भी कहना होगा कि ये लुटेरों और सूदखोरों से फिर भी भले हैं- क्योंकि कम से कम किसी का लूट नहीं करते, बस खुद को ही नहीं खिलाते। इनका आदर्श वाक्य है- “चमड़ी जाए पर दमड़ी न जाए।” गाँव में हमारे एक मास्टर साहब थे, जिनकी कोई संतान नहीं थी। अमीरी ऐसी कि सूद पर सोना गिरवी रखते, पर मिठाई सिर्फ़ दिवाली पर। एक किलो इमरती सालभर के लिए पर्याप्त। जैसे ही ...
जीवन एक प्रश्न
कविता

जीवन एक प्रश्न

शिवदत्त डोंगरे पुनासा जिला खंडवा (मध्य प्रदेश) ******************* एक प्रश्न जो हर मोड़ पर नया हो जाता है कभी धूप में तप कर मजबूत कभी ओस बनकर पल में खो जाता है। हम चलते हैं मंज़िल की तलाश में पर रास्ते ही हमें पहचान देते हैं कभी हार में छिपा सबक कभी जीत में नम्रता सिखा देते हैं। सत्य यह है कि जीवन किसी ठहरे पानी जैसा नहीं यह बहती नदी है जो पत्थरों से टकराकर और भी निर्मल और भी प्रखर हो जाती है। हम जिस क्षण को पकड़ना चाहते हैं वह हवा बनकर फिसल जाता है और जो क्षण हमें तोड़ देता है वही हमें नया आकार दे जाता है। अंत में समझ आता है जीवन को समझना नहीं जीवन को जीना पड़ता है हर अनुभूति को स्वीकार कर खुद को धीरे-धीरे प्रकाश की ओर ले जाना पड़ता है। परिचय :- शिवदत्त डोंगरे (भूतपूर्व सैनिक) पिता : देवदत डोंगरे जन्म : २० फरवरी निवासी...
मानवाधिकार दिवस: स्वतंत्रता समानता और न्याय का संदेश
आलेख

मानवाधिकार दिवस: स्वतंत्रता समानता और न्याय का संदेश

 दिव्याना कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) ********************  मानवाधिकार दिवस प्रत्येक वर्ष १० दिसंबर को विश्व भर में मनाया जाता है यह दिन संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा १९४८ में अपनाई गई सार्वभौमिक मानवाधिकार घोषणा पत्र की याद दिलाता है, जो सभी मनुष्यों को जन्मजात अधिकार प्रदान करता है ,जिसमें ३० अनुच्छेदों के माध्यम से जीवन, गरिमा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सुनिश्चित की गई है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद न्याय की शुरुआत: द्वितीय विश्व युद्ध की भयावहताओं, जैसे होलोकॉस्ट और नरसंहार, ने वैश्विक स्तर पर न्याय की नई व्यवस्था की मांग को जन्म दिया। मित्र राष्ट्रों-अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और सोवियत संघ ने १९४५ में नूर्नबर्ग में अंतरराष्ट्रीय सैन्य न्यायाधिकरण (IMT) की स्थापना की, जो युद्ध अपराधियों को व्यक्तिगत रूप से दंडित करने का पहला मॉडल बना। इन मुकदमों ने १९४८ में संयुक्त राष्ट्र...
सरिता
कविता

सरिता

मीना भट्ट "सिद्धार्थ" जबलपुर (मध्य प्रदेश) ******************** सरिता शीतल बह रही, देती जीवन दान। नीर सुधा का सार है, दिव्य लोक पहचान।। शैल-खंड कितने ढहे, सम्मुख सरिता धार। कल-कल नदिया नाद का, करे नमन संसार।। नदी तीर्थ है जान लो, पूजन करो सुजान। प्यास बुझाती लोक की, सद्भावों की खान।। सींचे सब तृणमूल को, अनुपम सुंदर घाट। संचित रखते जल सदा, अद्भुत देखो पाट।। सुंदर है मनमोहिनी, अंतर सागर वास। धार-धार संचार में, सदा मिलन की आस।। युग-युग से है बह रही, संस्कृति की पहचान। गंगा जमुना का मिलन ,मोक्षदायिनी जान।। सारी बाधा तोड़ती, बहती निर्मल गात। जननी सी वत्सल रहे, करे प्रेम बरसात।। जीवन आलोकित करे, सरिता सूर्य समान। इसकी पावन धार में, बसे अलौकिक ज्ञान।। बाधा बंधन सह रही, नहीं मानती हार। इसका पूजन कीजिए, जग में बारंबार।। इसे प्रदूषित मत करो, करती यह...
‘विमलांजलि’- संवेदनशील मन की जीवन-यात्रा का संग्रह
पुस्तक समीक्षा

‘विमलांजलि’- संवेदनशील मन की जीवन-यात्रा का संग्रह

समीक्षक- संजीव कुमार भटनागर यमराज मित्र सुधीर श्रीवास्तव की पाँचवीं पुस्तक ‘विमलांजलि’ एक विहंगम और व्यापक काव्य-संकलन है, जिसमें ३०९ पृष्ठों में २१७ रचनाओं का अनुपम संगम पाठकों के समक्ष उनकी बहुमुखी साहित्यिक प्रतिभा को गहनता से प्रस्तुत करता है। सरलता लिए आकर्षक मुखपृष्ठ के पश्चात सम्पादन और प्रकाशन विवरण, तथा अपनी सासू माँ और अपनी मातृकुल को समर्पण - यह दर्शाता है कि कवि के हृदय में मातृ शक्ति के प्रति अगाध श्रद्धा और भावनात्मक निष्ठा है। कवि अपनी “मन की बात” में मानवीय संवेदनाओं, मानव मूल्यों, रिश्तों में बढ़ती दूरियों और दम तोड़ती मर्यादाओं के कारण उत्पन्न असमंजस और चिंतन की पीड़ा को ईमानदारी से व्यक्त करते हैं। ममता प्रीति श्रीवास्तव की शुभकामनाओं और संक्षिप्त परिचय के साथ कृति का आरम्भ पाठक को जोड़ लेता है। माँ शारदे की वंदना, गणेश स्तुति और गुरु वंदन से प्रारम्भ होकर यात्रा आगे ...
भालू और हम
बाल कविताएं

भालू और हम

राजेन्द्र लाहिरी पामगढ़ (छत्तीसगढ़) ******************** हां हूं मैं भालू, पर तुम इंसानों जैसा नहीं हूं चालू, ऐ मानव मेरी रहवास क्यों खा जाते हो, अपनी लालच में आकर मेरी जंगल मिटाते हो, हां भालू जी मैँ हूं शर्मिंदा, तुम्हारे जीवन के कारण इस दुनिया में मैं हूं जिंदा, तुम्हारे आक्रामकता का कारण मैं हूं, सारे तुम्हारे समस्याओं का निवारण मैं हूं, प्रकृति के नियमों को मैंने छेड़ा है, अपनी सीमाओं को लालच में मैंने तोड़ा है, जरा सोचो जंगल से निकल रहवास में हम क्यों आते हैं, तुम पर हम क्रोधित हो जाते हैं, मत उजाड़ो मेरा आवास, तुम गलत हो कैसे दिलाऊं विश्वास, अब आपको दिलाता हूं मैं भरोसा, सदा मिलजुलकर रहेंगे नहीं दूंगा मैं धोखा, यदि मैंने मर्यादा तोड़ा तो तुम मुझे सबक सिखाना, बना लेना मुझे दुश्मन मुझ पर तान देना अपना निशाना। परिचय :-  ...