Notice: Function wp_get_inline_script_tag was called incorrectly. Unable to set inline script data. Please see Debugging in WordPress for more information. (This message was added in version 7.0.0.) in /home4/hindim8d/public_html/wp-includes/functions.php on line 6170
Monday, August 3राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर आपका स्वागत है... अभी सम्पर्क करें ९८२७३६०३६०

दृष्टि-दंश

छत्र छाजेड़ “फक्कड़”
आनंद विहार (दिल्ली)
********************

प्रश्न कौन करे..?
प्रश्नवाचक तो होती हैं
इंसानी दृष्टियां
किसमें साहस है
सत्य सुनने का
और… कौन धुरंधर है जो
मिथ्या भाषण कर न सके
मित्रों…, कुछ तो होते हैं
जन्म से दृष्टिहीन
संभव है न देख पाते हों
वे बाहरी दुनिया
मगर… सजग होता है अंतर्मन
पूरी समझ होती है
अपने निजी स्वार्थ की
जैसे थी ऐतिहासिक किरदार
धृतराष्ट्र को …

कुछ होते हैं
दृष्टिहीन आँखों के होते हुये भी
जैस
होते हैं वर्तमान में नेता …

पर… प्रलयंकारी होती है
वेदनापूर्ण और मर्मांतक
आम आदमी के लिए
जिसके पास होती है
कहने को दृष्टि
मगर मूकदृष्टि केवल
क्योंकि
मुखर होता है
अन्याय को सहना
हनन होता है नीतियों का
चयन होता है अयोग्य का
चाहे बहाना कुछ भी हो
आरक्षण या फिर सिफारिश …

संस्कार, परंपरा, अनुशासन
पथ-प्रदर्शक होते हैं जिनके
वे बन जाते हैं
पौरुष लिए नपुंसक
देखते रहते हैं अन्याय
मगर… बाँधे रखते हैं स्वयं को
अपनी मर्यादाओं से
जैसे इतिहास बताता है
भीष्म, द्रोणाचार्य, पाँडव
कहाँ टिक पाती है
किसी की कल्पना, अभिलाषा
जब होता है विधना का ताँडव …

निरीह प्राणी
आम आदमी
सोच ही तो सकता है
मन ही मन
और…. कदाचित उठाये दृष्टि तो
बन जाता है
गुनाह उसका
बस सहारा बचता है
केवल और केवल
धर्म का
क्या समझे कोई
इंसानी साहस, आध्यात्मिक संबल
या फिर इंसानी मजबूरी
कैसा होता है
ये दृष्टि-दंश…?

परिचय :- छत्र छाजेड़ “फक्कड़”
निवासी : आनंद विहार, दिल्ली
विशेष रूचि : व्यंग्य लेखन, हिन्दी व राजस्थानी में पद्य व गद्य दोनों विधा में लेखन, अब तक पंद्रह पुस्तकों का प्रकाशन, पांच अनुवाद हिंदी से राजस्थानी में प्रकाशित, राजस्थान साहित्य अकादमी (राजस्थान सरकार) द्वारा, पत्र पत्रिकाओं व समाचार पत्रों में नियमित प्रकाशन, राजस्थानी लोक गीतों के लिए प्रसिद्ध कंपनी “वीणा कैसेटस” के दो एलबमों में सात गीत संगीतबद्ध हुये हैं।
सम्मान : “राजस्थानी आगीवान” सम्मान से सम्मानित
श्री गंगानगर के सृजन साहित्य संस्थान का सृजन साहित्य सम्मान व
सरदारशहर गौरव (साहित्य) सम्मान व अनेक अन्य सम्मानरा
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।


प्रिय मित्र, शुभचिंतक एवं परिवारजन आपको प्रेषित मेरी नई स्वरचित रचना, कृपया लिंक को टच कर रचना पढ़ें एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख कविता को लाइक करें …🙏🏻😊💐💐💐 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी रचनाएँ
प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख हिंदी में टाईप करके हमें
hindirakshak17@gmail.com पर अणु डाक (मेल) कीजिये, अणु डाक करने के बाद हमे हमारे नंबर 98273 60360 पर सूचित अवश्य करें …🙏🏻 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच का सदस्य बनने हेतु हमारे चलभाष क्रमांक 98273 60360 पर अपना नाम और कृपया मुझे जोड़ें लिखकर हमें भेजें…🙏🏻

2 Comments

  • दिलीप कुमार पोरवाल (दीप ) जावरा

    छत्र छाजेड़ द्वारा लिखित कविता दृष्टि दंश बहुत ही अच्छी लगी जो कि ऐतिहासिक तथ्यों को वर्तमान परिप्रेक्ष्य से जोड़ते हुए अपनी बात को बेहतरीन तरीके से रखी ।

  • दिलीप कुमार पोरवाल (दीप ) जावरा

    छत्र छाजेड़ जी द्वारा लिखित कविता दृष्टि दंश बहुत ही अच्छी लगी जो कि ऐतिहासिक तथ्यों को वर्तमान परिप्रेक्ष्य से जोड़ते हुए अपनी बात को बेहतरीन तरीके से रखी ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *