चाय
मजदूरी
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रचयिता : मित्रा शर्मा
गावँ में एक आदमी का नोकरी लग गया। गावँ बहुत पिछड़ा था। जब वह आदमी छुट्टी में घर गया तो खाने पीने का सामान याने की बिस्कुट चाय पत्ती बगैरह लेकर गया। पहली बार परदेश से गावँ में आने के खुशी में परिवार और गावँ के लोग का मजमा लग गया। छोटे बच्चे बगैरह मिठाई चाकलेट बगैरह बाटने के बाद बड़े लोग के लिए नास्ता पानी की ब्यबस्था होने लगा। चाय बनाने के लिए अपनी माँ को आवाज लगाकर उसने वह पुड़िया पकड़ाई। नास्ते के साथ माँ ने चाय पत्ती भी छोंक लगाकर परोसा। बेटा ने पूछा "यह क्या चीज है माँ ? "माँ ने जवाब दिया तूने बनाने को दिया था न मैंने चटनी बनाई । क्यों स्वाद नही आया क्या नमक मिर्च का ? बेटे को हँसने के अलावा कोई चारा नही था ...
विशेष :- लेखिका हिंदी भाषा सिख रह...




















