Thursday, June 4राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर आपका स्वागत है... अभी सम्पर्क करें ९८२७३६०३६०

BLOG

मानव ही मानव का शत्रु
कविता

मानव ही मानव का शत्रु

रचयिता : रीतु देवी =============================================== मानव ही मानव का शत्रु मानव ही मानव के शत्रु है, कुदृष्टि डालकर तृप्त करते तन अनेक चक्षु हैं। मानवता का यहाँ कोई मोल नहीं, भाईचारा का बंधन अब दिखता नहीं कहीं, आनंदित होते धन-दौलत की अंधी गलियों में ही फंसकर मोह जाल मिल जाते मिट्टी में ही न जाने क्यों वहशी बन शैतानी करते है? लालची निगाहें अनगिनत जिन्दगानी लेते हैं। जागो, जागो इंसान मानवता का मूल्य पहचानों, वसुंधरा है सबकी न नष्ट करो अरमानों। लेखीका परिचय :-  नाम - रीतु देवी (शिक्षिका) मध्य विद्यालय करजापट्टी, केवटी दरभंगा, बिहार आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि अपने परिचय एवं फोटो के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर मेल कीजिये मेल करने के बाद हमे हमारे...
मजदूरी
लघुकथा

मजदूरी

रचयिता : मित्रा शर्मा =========================================================================================================== मजदूरी दिनभर मजदूरी करने के बाद घरमे शाम को मा का इंतजार में बैठे बच्चे को मा ने दस रुपये थमाते हुए बोली किराना के दुकान से आटा ले आ जल्दी भूख लग रहि है । पहले से भूखे बैठे बच्चे आपस मे लड़ने लग गए मैं जाता हूँ तू देर करेगा। दोनो बच्चे के लड़ाई और नोटकी खींचातानी में नोट दोनो के हाथ मे आधा आधा हो जाता है । एक दूसरे को देख रहे चुप होते बच्चे के ऊपर कहर बरसाने की बारी म की थी परिचय :- मित्रा शर्मा महू (मूल निवासी नेपाल) आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि अपने परिचय एवं फोटो के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर मेल कीजिये मेल करने के बाद हमे हमारे नं...
छोड़ चली
कविता

छोड़ चली

रचयिता : विनोद सिंह गुर्जर ========================================== छोड़ चली मित्रो, आज में जो रचना सुना रहा हूँ। वह कभी रचना का सत्य हुआ करता था। ...जीवन में जो सोचते है वो होता नहीं।...कुछ लोग दुख देने के लिये ही आते हैै।। देखें विरह घड़ी ...आँख से रिसते आंसू कागज पर उकेरने की कोशिश।।...रागिनी को समर्पित।। मेरे मन की हरियाली पर पतझड़ छोड़ चली। अधखिले फूल उम्मीदों के तू तोड़ चली ।।.... हम जिधर गए तुमको वहीं पर याद किया । जाने कितनों से मैंने प्रिय विवाद लिया । फिर क्यों तू ताजमहल चाहत का फोड चली ।।.. अध खिले फूल उम्मीदों के तू तोड़ चली ।।... हमने ना गौरव माना अपनी हस्ती का। माँझी तुम्हें बनाया अपनी कश्ती का । फिर क्यों तू बीच भंवर में मुख को मोड़ चली ।।.. अध खिले फूल उम्मीदों के तू तोड़ चली ।।... तुम जो कहते जीवन अर्पण कर देता मैं । तेरी खुशियों का स्वयं वरण कर लेता में ।...
कामना
लघुकथा

कामना

रचयिता : अर्चना मंडलोई =========================================================================================================== कामना वह लकडियों के ढेर के बीच बैठा, उनिंदा सा जली हुई लाशों की राख के ढेरों को देख रहा था। अपनी जर्जर होती काया को सहलाते हुए सोचने लगा - लाशों को जलाने के लिए लकडियाँ बेचते-बेचते एक दिन स्वयं भी राख के ढेर में बदल जाऊँगा। निर्धनता और जीविकोपार्जन की कोशिशों ने इस श्मशान में रहते-रहते मेरे जीवन को भी मृतप्राय बना दिया हैं। उसने आसमान की ओर देखा -! सूर्यास्त का समय होने को था - कातर आँखों से अपने पाँच वर्षीय पुत्र की ओर देखते हुए वह सोचने लगा - क्या आज एक भी लाश नहीं आयेगी? क्या आज रात का भोजन नहीं बन पाएगा? तभी रघु पति राघव की धुन उसके कानों पर पडी ! उसने अपनी सोच को विराम दिया, और फुर्ती से उठकर लकडियाँ तोलने की तैयारी करने लगा। तराजू के हिलते पलडों के...
अधखिला फूल
लघुकथा

अधखिला फूल

रचयिता : कुमुद के.सी.दुबे =========================================================================================================== अधखिला फूल        संजू , ओ संजू, कब तक खेलेगा दिन चढ़ रहा है..?        काम पर चले जा बच्चा... समय पर ना पहुंचा तो सेठ दहाड़ी का पैसा काट लेगा। रमा ने अपने आठ वर्षीय बेटे को आवाज दी।  संजू मां की आवाज सुन दौड़कर आया और लड़ियाने के अंदाज में मां के कंधे पर झूलते हुए बोला मां मैं आज से काम पर नहीं जाऊंगा होटल के सेठ ने मोहन चाचा को काम से निकाल दिया है, और बडे़-बडे़ बर्तन सब मुझ से मंजवाता है। ठीक से साफ नही हुए कहकर, रुपिया भी काट लेता है।       रमा ने प्यार से संजू को समझाने की कोशिश की ...। बेटा, वहां न जा कोई और काम ढुंढ ले। इस पर संजू  पैर पटकते हुये बोला नहीं मां मैं काम पर नहीं, सामने वाले बंगले के दीपू की तरह नीली पेंट सफ़ेद क़मीज़ पहन स्कूल ...
साहित्य और सरकार
कविता

साहित्य और सरकार

रचयिता : ईन्द्रजीत कुमार यादव ======================================================= साहित्य और सरकार किस प्रकार की है तेरी सियासत है कैसा इसका आकार, प्यार मोहब्बत आग को गए फिर कैसे है तेरा शाषन साकार। यहाँ न शिक्षा है , न रोजगार है बस जुमलों की बौछाड, बस पैसों के हि कान सही है नही तो बहरी है सरकार। मुँह चिढ़ाए देखो कैसे हंसता है ये अदना सा भृष्टाचार, शिल्प सुत सब महंगे हो गए बस सस्ता है ईमान। देखो कलम भी खो रही है अपनी ताकत हो रहा स्याही बेकार, ईमानदारी का चोला पहने होता है पत्रकारों का व्यपार। है जिसकी जैसी जमीर की किमत है मिलता वैसा साहूकार, फिरता नही बिका जमीर है साहुकार आज संसद का पहरेदार। देकर अपने मातृभूमि को गाली दिखाता है वो अपना राष्ट्रवाद, बहाकर कतरा-कतरा लहु का सिपाही है बचाता हमारा स्वराज। यहाँ मजबुरी और गरीबी की लगता है हर पल एक बाजार, मुर्दों ...
शब्दाँजली
कविता

शब्दाँजली

रचयिता : मुनव्वर अली ताज =================================== शब्दाँजली   शब्द को शर्मसार मत करना शब्द को गुनहगार मत करना शब्द हो जाए न विमुख तुम से शब्द का तिरस्कार मत करना शब्द को संगसार मत करना शब्द पे अत्याचार मत  करना शब्द संवाद की सदाक़त है शब्द से व्याभिचार मत करना शब्द से झूटा प्यार मत करना शब्द से धोका यार मत करना शब्द सद्भावन का हामी   है शब्द को दाग़दार मत करना शब्द को मनमुटाव मत देना शब्द को भेद-भाव मत देना राम अपना है रब पराया है शब्द को ये सुझाव मत देना शब्द को तन से प्यार कर  लेना शब्द को मन से प्यार कर  लेना शब्द देगा तुम्हें अमर जीवन शब्द को धन से प्यार कर लेना शब्द का धर्म भी नहीं होता शब्द का कर्म भी नहीं होता सच है लेकिन ये सच नहीं प्यारे शब्द का मर्म भी नहीं होता शब्द पे दिल निसार कर देना शब्द पे जाँ निसार कर   देना शब्द को...
धरा तू महान है
कविता

धरा तू महान है

रचयिता : मनोरमा जोशी =============================================== धरा तू महान है है घरती माँ ,तुझे प्रणाम , तू कितनी हैं महान । तेरे आँचल में पले जग सारा , हर प्राणी की तू हैं जान , तू बड़ी महान । सम भाव से सबको हांके चहुँ और रखती हैं ध्यान, हर समस्या का समाधान , तू बड़ी हैं महान । कभी बहाती तीव्र धारा, कभी रूखा रेगिस्तान, हर कृषक की पालनहार, तू हैं अमिट निशान , तू बड़ी हैं महान । तुझ पर अडिंग थमे हूए है महल कचहरी और मकान , कितने बोझ सहन कर तुमनें किया जन जन पर उपकार , तेरी महिमा अपरंपार , तुझमें उर्वरक शक्ति महान तुझ से रोशन सारा जहाँन तू माँ बड़ी महान । शत शत करु प्रणाम । लेखिका का परिचय :-  श्रीमती मनोरमा जोशी का निवास मध्यप्रदेश के इंदौर में है। आपका साहित्यिक उपनाम ‘मनु’ है। आपकी जन्मतिथि १९ दिसम्बर १९५३ और जन्मस्थान नरसिंहगढ़ है। शिक्षा-स्नातकोत्तर और स...
धरा बचाओं-जीवन बचाओं (पृथ्वी दिवस विशेष)
आलेख

धरा बचाओं-जीवन बचाओं (पृथ्वी दिवस विशेष)

रचयिता : शिवांकित तिवारी "शिवा" =========================================================================================================== धरा बचाओं-जीवन बचाओं (पृथ्वी दिवस विशेष)          आज हमारी धरती माँ का दिन है यानि "विश्व पृथ्वी दिवस" - जिस धरा पर हमारा जन्म होता है और जन्म से लेकर मृत्यु तक का सम्पूर्ण समय हम इसी पावन पुनीत धरा पर व्यतीत करते है। यह हमारे जीवन की सबसे अनमोल धरोहर है और सबसे पवित्र स्थान है। जिस प्रकार माँ नौ महीने कोख में रख कर हमें जीवन देती है और हमारे जीवन का संरक्षण करती है उसी तरह धरती माँ हमारे सारे जीवन को सदैव संरक्षण प्रदान करती है। हमारे जीने के लिये आश्रय स्थान,खाने के अनाज और जीवन-यापन के लिये जो भी आवश्यक वस्तुयें चाहिये वह समस्त वस्तुयें इस धरा से ही प्राप्त होती हैं। यदि इस धरती में रहकर हम इसको बचाने के लिये जागरुक नहीं...
धैर्य परीक्षा न लें
कविता

धैर्य परीक्षा न लें

रचयिता : श्रीमती मीना गोदरे 'अवनि' ========================================================== धैर्य परीक्षा न लें 'अवनि' की धैर्य परीक्षा न लें न अस्मिता धरा की लुटने दें ला सकती है भूचाल 'अति' जो उसका है, उसको लौटा दें आओ मां की लाज बचा कर मातृभूमि का कर्ज़ लौटा दें दोहन कर न उसे निचोड़ें नहीं पर्यावरण प्रदूषण छेडें मूक पीड़ा से हम उसे उबारें वृक्ष लगा धानी चूनर ओढा दें आओ मां की लाज बचा कर मातृभूमि का कर्ज चुका दें मानव से दानव बन चुके इंसानों का भार हटा दें जो रक्त से उसको रंग दें उनका नामोनिशान मिटा दें आओ मां की लाज बचा कर मातृभूमि का कर्ज चुका दे पर्वत नदियां बाग बगीचे सिंचित फूलें फलें गोद में पाला जिसने सब कुछ खोकर उसको शोषण मुक्त करा दें आओ मां की लाज बचा कर मातृभूमि का कर्ज चुका दे नहीं कृतघ्नी बनकर लुटे न बंजर हो सूखी धरती न ज्वालामुखी भूमि ...
 आशियाना तिनका का 
कविता

 आशियाना तिनका का 

रचयिता : ईन्द्रजीत कुमार यादव =================================================================== मालुम है ये शाख हि जमीन है मेरी और एक दिन काट दि जाएगी, मरने से पहले मरना और हारने से पहले हारना फितरत नही हमारी, जा रहा हुँ उस तूफ़ान से आंख में आंख मिलाने को, मैं तिनका - तिनका जोड़ूँ एक आशियाना बनाने को। भरोसा अपने पंखों पर बनता और बिगड़ता रहता है, मगर ये तमाशा जिंदगी भर यूँही चलता रहता है, जितनी अंबर बक्शी है तुने काफी है उड़ान भरने को, मैं तिनका - तिनका जोड़ूँ एक आशियाना बनाने को। ये जो पतझड़ है मौसम हि तो है ऐसे हि बदलते रहेंगे, इन्तेजार क्यों बसन्त और बहार का बदलना तो तेरे मिजाज से सिख लिया, तु कुछ कहे या मैं कुछ कहुँ अब दौड़ नही कुछ भी आजमाने को, मैं तिनका - तिनका जोडूं एक आशियाना बनाने को। चाँद थोड़ा धुंधला गया है अब केह- कहे युहीं लगते रहेंगें, अहम कि बातें थी ये सब वख्त...
मां भारती की पीड़ा
कविता

मां भारती की पीड़ा

रचयिता :  दिलीप कुमार पोरवाल "दीप"  ===================================================================== मां भारती की पीड़ा मैं हैरान थी, परेशान थी मुझे लूटा था, जकड़ा था उन धूर्त फिरंगीयों ने, मुझे आजाद कराया मेरे वीर सपूतों ने, तब मैं खुलकर हंसी चहकी थी, मेरी उन्मुक्त खिलखिलाहट चारों ओर फैली थी, मुझे गर्व होता था मेरे गांधी, जवाहर, सुभाष, चंद्रशेखर, भगत सिंह जैसे वीर सपूतों पर, मेरी लक्ष्मी जैसी वीरांगना बेटियों पर तब मैंने देखे थे ख्वाब, अब सब कुछ मेरा अपना होगा, अब ना होगा कोई बेसहारा, ना कोई भूखा सोएगा, अब मेरे बच्चे कामयाब होंगे अपना भविष्य बनाने में, अब मेरी बेटियां फिर से मान-सम्मान पाएगी l पर अब मैं हैरान हूं परेशान हूं, अपने टूटते सपनों को देखकर क्यों, क्योंकि अब मेरे अपने ही मुझे लूट रहे हैं मेरी बेटियों की आबरू से खेल रहे हैं मेरे बेटे एक दूसरे के खून के...
तूने देखा नजर लगी
कविता

तूने देखा नजर लगी

रचयिता : विनोद सिंह गुर्जर =========================================================================================================== तूने देखा नजर लगी तूने देखा नजर लगी, पिया खिला बदन मुरझाया।।... मैं नाजुक सी कली चमन की, तू भंवरा दीवाना।-२ मुझे भरमाने भ्रमर करे, क्यों छेड़े राग तराना ।। तूने देखा नजर लगी, पिया कोमल तन कुम्हलाया।।... तूने देखा नजर लगी, पिया खिला बदन मुरझाया।।... नीम-हकीम सभी आए, वैरन ना नजर हटे है ।-२ सांसों की गति तेज हुई, मन ही मन क्या-क्या रटे है।। तूने देखा नजर लगी, पिया अंग-अंग झुलसाया।।... तूने देखा नजर लगी, पिया खिला बदन मुरझाया।।... दिन में तारे दिखते हैं, और रातें किरणों वाली। घरके जन सब कहें बावरी, सखियां देतीं गाली।। तूने देखा नजर लगी पिया, कहें प्रेत का साया ।।... तूने देखा नजर लगी, पिया खिला बदन मुरझाया।। परिचय :-   विनोद सिंह ग...
तेरा प्यार
गीत

तेरा प्यार

रचयिता : मोहम्मद सलीम रज़ा ===================================================================================================================== तेरा प्यार दिल में बसा है तेरा प्यार गोरिए कर लेने दे मुझे दीदार गोरिए सपनो में आके क्यूँ मुझे तड़पती हो अपना बनाले दिलदार गोरिए                     oo जाना तेरे दिल को बेक़रार करूँगा जी भर के तुझे आज प्यार करूँगा तेरे लिए चांदनी का सेज लगा दूँ चाँद सितारों से तेरी मांग सजा दूँ तुझपे ये ज़िंदगी निसार गोरिए                      oo पतली कमर मत ऐसे बल खा सोंडा सोंडा मुखड़ा न बांहों में छुपा सजनी दीवानी यूँ न अँखियाँ चुरा तेरे सुने जियरा में हमको बसा प्यार करूँगा बे - सुमार गोरिए                      oo सोड़े-सोड़े मुखड़े पे जादू तेरे जाना तेरे पीछे पड़ गया सारा ज़माना मुझ सा दीवाना न तू पाएगी दीवानी तुझपे निसार किया सारी ज़िंदगानी किया...
आज का राशिफल २३ अप्रैल सन २०१९ ईस्वी
राशिफल

आज का राशिफल २३ अप्रैल सन २०१९ ईस्वी

📜««आज का पञ्चांग»»📜 कलियुगाब्द.........................५१२१ विक्रम संवत्........................२०७६ शक संवत्...........................१९४१ रवि................................उत्तरायण मास.................................बैशाख पक्ष....................................कृष्ण तिथी.................................चतुर्थी प्रातः ११ .०८ पर्यंत पश्चात पंचमी सूर्योदय...........प्रातः ०६ .०० .२५ पर सूर्यास्त...........संध्या ०६ .५० .४७ पर सूर्य राशि................................मेष चन्द्र राशि...........................वृश्चिक नक्षत्र..................................ज्येष्ठा संध्या ०५ .१५ पर्यंत पश्चात मूल योग....................................परिघ रात्रि १२ .५५ पर्यंत पश्चात शिव करण.................................बालव प्रातः ११ .०८ पर्यंत पश्चात कौलव ऋतु........................
बजरंगी हो कमाल..
कविता

बजरंगी हो कमाल..

रचयिता : शिवांकित तिवारी "शिवा" =========================================================================================================== बजरंगी हो कमाल..                                                       माता अंजनी के लाल,बजरंगी हो कमाल, महावीर महाभक्त रामजी के आज्ञाकारी हो, तीनों लोकों में तुम पूज्य,तुम सम न कोऊ दूज, थामें हाथ वज्र,ध्वजा श्रीराम के पुजारी हो, माता सीता के दुलार सारा जग करे प्यार, जय हो पवनकुमार तुम विशाल ह्रदयकारी हो, शत्रुओं के तुम काल,दुख हरते हर हाल, हर के धरा का तम करते जग में उजियारी हो, तुम्हारी महिमा का बखान खुद करते श्रीराम, सारे रोगों को हो हरते तुम महान उपचारी हो, बल,विद्या,बुद्धि,धैर्य का सभी को दो स्थैर्य, कलियुग के मुख्य देवता तुम जग के अधिकारी हो, लेखक परिचय :- शिवांकित तिवारी "शिवा" युवा कवि,लेखक एवं प्रेरक सतना (म....
तकता रहा मैं  अपलक अम्बर
कविता

तकता रहा मैं अपलक अम्बर

रचयिता : भारत भूषण पाठक =========================================================================================================== तकता रहा मैं अपलक अम्बर तकता रहा मैं  अपलक अम्बर। सहस्त्र रश्मियों की कान्ति  दिवालोक में पड़ चुकी धूमिल।। विछोह की वेदना से हृदय  था व्यथित । क्या वो आएगी? शायद आ जाए! ऐसी थी आशा। न जाने क्यों  मुझको प्रतीत  हो रही थी निराशा ।। फिर भी  मन में लिया आस तकता रहा आकाश । शायद वो आए! मेरे  मन के बुझे दीप जलाए।। भयमिश्रित हृदय कर रहा था अबतक यह प्रश्न। क्या वो आएगी?शायद आ जाए। सुबह की बेला थी होने को शाम में परिणत। प्रतीत हो रहा था मानो वो भी हो मेरे संताप में रत।। कोलाहल से दूर मन अब भी  तकता था राह। थी जिसमें  पुष्पित- पल्लवित प्रेम अथाह ।। शायद वो आए!फिर भी .....वो न आई। मन में लिए जिज्ञासा आशा के दीप  जलाए। सहस्त्रों बार बूझे मन की...
शहादत
कविता

शहादत

रचयिता : संगीता केस्वानी =========================================================================================================== शहादत हूं तिरंगे में लिपटा हुआ, मां की गोद में मीठी नींद सोया हुआ, गम जदा मां को बादल ने सहलाया है, पश्मिनी याख - बस्ता मर्म आंचल मुझपे ओडाया है, लहू बहा अंगारा जो देहकाया है, मस्त पवन ने खूब उसे बड़काया है, ना शोक मना, ना अश्क बहा, गाज बन गिरेगा वो, अभी विशाल तेरा सर्माया है। सुनहरी - धानी फसल बन इन खेतों में लेहराऊंगा, हरियाली की चादर ओढ़े तुझसे लिपट ही जाऊंगा, हूं तुझसे जन्मा ,तुझमें ही समाऊंगा, में रख बन तुझमें ही वीलीन होजाऊंगा, ना तुझसे जुदा हो पाऊंगा, आज जिसने खून से नहलाया है, उसे अंगारों से देहकाऊंगा, तेरे हर कतरा - ए - अश्क को बदल सुनामी में प्रलय - ताड़व मचाऊंगा।। की अपनी शौर्य शहादत से, हौसला - ऐ - इरादों से, दुश्मन...
आज का राशिफल २० अप्रैल सन २०१९ ईस्वी
राशिफल

आज का राशिफल २० अप्रैल सन २०१९ ईस्वी

📜««आज का पञ्चांग»»📜 कलियुगाब्द.........................५१२१ विक्रम संवत्.......................२०७६ शक संवत्...........................१९४१ मास..................................बैशाख पक्ष....................................कृष्ण तिथी...............................प्रतिपदा दोप ०२ .२५ पर्यंत पश्चात द्वितीया रवि..............................उत्तरायण सूर्योदय..........प्रातः ०६ .०३ .१० पर सूर्यास्त.........संध्या ०६ .४९ .०२ पर चंद्रोदय.........संध्या ०७ .५० .१८ पर चंद्रास्त..........प्रातः ०६ .४५ .२७ पर सूर्य राशि..............................मेष चन्द्र रशि.............................तुला नक्षत्र.................................स्वाति संध्या ०५ .५८ पर्यंत पश्चात विशाखा योग......................................वज्र प्रातः ०८ .२१ पर्यंत पश्चात व्यतिपात करण.......................
आज का राशिफल १९ अप्रैल सन २०१९ ईस्वी
राशिफल

आज का राशिफल १९ अप्रैल सन २०१९ ईस्वी

📜««आज का पञ्चांग»»📜 कलियुगाब्द.......................५१२१ विक्रम संवत्.....................२०७६ शक संवत्........................१९४१ मास...................................चैत्र पक्ष.................................शुक्ल तिथी.............................पूर्णिमा दोप ०४ .४६ पर्यंत पश्चात प्रतिपदा रवि............................उत्तरायण सूर्योदय........प्रातः ०६ .०३ .१० पर सूर्यास्त.......संध्या ०६ .४८ .५९ पर चंद्रोदय........संध्या ०६ .४९ .१८ पर चंद्रास्त.........प्रातः ०६ .०३ .३१ पर सूर्य राशि.............................मेष चन्द्र रशि.........................कन्या नक्षत्र.................................चित्रा संध्या ०७ .२८ पर्यंत पश्चात स्वाति योग..................................हर्षण प्रातः ११ .२९ पर्यंत पश्चात वज्र करण...................................बव दोप ०४ .४६ ...
कितनी प्रतिलिपियाँ
कविता

कितनी प्रतिलिपियाँ

रचयिता : शिवम यादव ''आशा'' =========================================================================================================== कितनी प्रतिलिपियाँ इस जिंदगी में बहुत     घटनाएँ घटी हैं मेरे यार  कितनी और सत्य   प्रतिलिपियाँ    भेजूँ तुम्हें मेरे यार   जिंदगी की जंग में अकेला लङता रहा हूँ         खुद से क्योंकि समस्या मेरी थी तुम्हें साथ कैसे ले      सकता था मेरे यार  कुछ यादों से भरी हैं कुछ घटनाओं से बनीं हैं ये जिंदगी की प्रतिलिपियाँ        हैं इन्हें कैसे जला दूँ     मेरे यार लेखक परिचय : नाम शिवम यादव रामप्रसाद सिहं ''आशा'' है इनका जन्म ७ जुलाई सन् १९९८ को उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात ग्राम अन्तापुर में हुआ था पढ़ाई के शुरूआत से ही लेखन प्रिय है, आप कवि, लेखक, ग़ज़लकार व गीतकार हैं रुचि :- अपनी लेखनी में दमखम रखता हूँ !! अपनी व माँ सरस्...
हमारी वसुंधरा
कविता

हमारी वसुंधरा

रचयिता : वन्दना पुणतांबेकर =========================================================================================== हमारी वसुंधरा सम्मान करो,तुम वसुंधरा का। जिसने हमको जीवन दान दिया है। मत भूलो तुम उसके ऋण को। जिसने वायु प्राण दिया है। सम्मान करो.....। जल रही अंगारो से यह। अब इसे बचाना हैं। अपनी सुन्दर वसुंधरा को। फिर से हरा बनाना है। सम्मान करो.....। इसी पावन वसुंधरा पर। नानक,गौतम, राम हुए हैं। लाखो वीर कुर्बान हुए है। युगों,युगों के इतिहासों के। बलिदानो को इसने देखा है। ना जाने कितनों सपूतो को।  अपने आँचल में समेटा हैं। सम्मान करो......। वसुन्धरा के कण-कण में।  उपजे हीरे-मोती हैं। धन-धान्य के भंडारो से लहलहाती खेती है। अपनी इसी वंसुधरा को। मिलकर हमे बचाना है। सम्मान करो.......। दिन-प्रतिदिन सूख रही। वसुंधरा मानव अत्याचारों से। जाग उठो अब दुनियॉ वालो। अ...
करके आजाद हमको वतन दे गये
कविता

करके आजाद हमको वतन दे गये

किशनू झा "तूफान" ग्राम बानौली, (दतिया) ******************** तोड़कर सारे बंधन गुलामी के वो, करके आजाद हमको वतन दे गये। उनके भी शौंक थे दिल जवानी भी थी, उनके भाई भी बहनें भी मां बाप थे। सोचा न एक पल दे दी कुर्बानियां, देशभक्ति के उनमें भी क्या जाप थे। देश के बाग में सींचकर  के लहू, फूलते फलते हमको  सुमन दे गये। तोड़कर सारे बंधन गुलामी के वो, करके आजाद हमको वतन दे गये। क्या हुआ नींद आयी जो वो सो गये, नींद दुश्मन के घर की उड़ाकर गये। गर जरुरत पड़ी सिर कटाने की भी, शान से शीश अपने कटाकर गये। जान को अपनी देकर वतन के लिए, वो बचाकर वतन को वतन दे गये। तोड़कर सारे बंधन गुलामी के वो, करके आजाद हमको वतन दे गये। मैं सदा उन शहीदों को करता नमन, जिनके कारण वतन मेरा आजाद है। हिन्दू मुस्लिम मिटे इस वतन के लिए, उनकी कुर्बानी हमको सदा याद है। तीन रंगों को अपना बनाकर कफन,  ज...
मतलब
लघुकथा

मतलब

रचयिता : मित्रा शर्मा =========================================================================================== मतलब वह बिना पैसे का चौकीदार था। दिन रात घर की रखवाली करता और बदले में दो टाइम सूखी रोटियां खा कर घर के सामने पड़ा रहता था। पिछले कुछ दिनों से वह गली का कुत्ता बीमार होने लगा। घर की गृहणी ने अपना फर्ज समझ उसे डॉक्टर को दिखाया। वो कोई बड़ा नस्ल या खरीदा हुआ नही था इसलिए उसकी दवाई पर पैसे खर्च करना परिवार को खूब खटकता। उसकी बीमारी की वजह से पड़ोसियों को भी परेशानी होने लगी। वे बोलने लगे इसके कारण सबको तकलीफ हो रही है आप पाप की भागीदार बन रही हो इसको कहीं दूर ले जाकर छोड़ दो। उसकी रुलाई फूट गई, घर में उसके पति भी बार बार कहरहे थे पैसे खर्च करवाता है कभी कोई आए भोंकता तो है नही। अब की बार तो इसे कहीं छोड़कर ही आऊंगा। वो सोचने लगी कैसी स्वार्थी दुनिया है बेचारा चौकीदारी करता था तब त...
हनुमान जी
कविता, धार्मिक

हनुमान जी

रचयिता : राम शर्मा "परिंदा" ************************************************************************************************************************************************************ हनुमान जी सर्वप्रथम  प्रणाम  करुं राम  दूत  हनुमान  को । कलम से लिपिबद्ध करुं पवनपुत्र यशगान को ।। खेल में समन्दर लांघा समर के आव्हान को । सीता का पता लगाया बढ़ाया प्रभु मुस्कान को ।। ज्ञानियों में अग्रगण्य तुम बढ़ाओ मेरे ज्ञान को । अध्यात्मपथ का गामी हूं आतुर अमृत पान को ।। अतुल बल के धाम तुम मारो षडरिपु शैतान को । पाऊं  मैं राम  दरबार में भक्त  सम  सम्मान  को ।। लेखक परिचय : -  लेखक परिचय : -  नाम - राम शर्मा "परिंदा" (रामेश्वर शर्मा) पिता स्व जगदीश शर्मा आपका मूल निवास ग्राम अछोदा पुनर्वास तहसील मनावर है। आपने एम काम बी एड किया है वर्तमान में आप शिक्षक हैं आपके तीन क...