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कैसे तुझे शब्दों में बांधू
कविता

कैसे तुझे शब्दों में बांधू

रचयिता : संगीता केस्वानी ===================================================== कैसे तुझे शब्दों में बांधू मां मैं कैसे तुझे शब्दों में बांधू, कैसे तेरा गुणगान करूं, कि शब्द बहुत छोटे है, पर भाव बहुत बड़ा है। तप्ती, तीखी धूप में शीतल सी छांव है तू, ठीठूरती सी सर्दी में गुनगुनी सी धूप है तू, प्रेम का अनूठा रूप है तू मैं कैसे तुझे शब्दों में बांधू कैसे तेरा गुणगान करूं....... स्नेह तेरा अमूल्य है त्याग तेरा अतुल्य है, देवता भी अवतरित हुए पाने को तेरा वात्सल्य मैं कैसे तुझे शब्दों में बांधू कैसे तेरा गुणगान करूं...... कहां से लाऊं इतना त्याग तुझसा अनूठा अनुराग, सांसे भी कर दूं अर्पण पर छूं ना पाऊं तेरा समर्पण, मैं कैसे तुझे शब्दों में बांधू कैसे तेरा गुणगान करूं....... मुझ निराकार को तूने किया साकार इतने ऊंचे तेरे संस्कार इतने अनकहे उपकार मैं कैसे व्यक्त आभार करूं मैं कै...
 मोहब्बत का सफ़र
कविता

 मोहब्बत का सफ़र

रचयिता : ईन्द्रजीत कुमार यादव =======================================================  मोहब्बत का सफ़र तलाश रह गई जिन्दगी सफ़र खत्म कहा हुआ, जिन्दगी युही कटती रही लेकिन कुछ हासिल कहा हुआ, सोचा कि वो मिल जाएँगे राहो मे मगर इंतेजार खत्म कहा हुआ।   कुछ नही है मेरे पास और मै कुछ चाहता भी नही, तुम्हारी आँखो मे है मेरा बसेरा और मै किसी को पहचानता भी नही, तुम्हे भी बसाते हम अपनी आँखो मे लेकीन आँखो का रोना खत्म कहा हुआ।   भुलाना चाहा अपने अश्कों को लेकीन आँखो का साथ छुट गया,  इस मन्दिर मे है तेरी हि मुरत लेकीन इस पुजारी का अब आस छुट गया, इबादत करते हम क़यामत तक लेकीन तेरे होने का एहसास कहा हुआ।   फ़लक तक चलना हमारी आदत सी हो गई, बादलो के साथ हमारी दौर एक पागलपन सी हो गई, खु़ब जुनुन रहा तुझे पाने का, लाते जिन्दगी मे तुझे भी मगर ऐसा नसीब कहा हुआ। लेखक परिचय :-  नाम : ईन...
पलट गया हूँ मैं
ग़ज़ल

पलट गया हूँ मैं

रचयिता : शरद जोशी "शलभ" ======================================== पलट गया हूँ मैं तमाम रिश्तों से नातो से कट गया हूँ मैं। निकल के दुनिया से ख़ुद में सिमट गया हूँ मैं।। किसी की चाह न बाक़ी न राबता बाक़ी। तलब की राह से अब दूर हट गया हूँ मैं।। ये रोशनी तो दिया बुझने के क़रीब की है दिये के तेल से घट- घट के घट गया हूँ मैं।। किसी भी शक्ल में घर लौटना नहींं मुमकिन। हज़ारों लाखों करोड़ों में बट गया हूँ मैं।। पलट के जाना था इक दिन ख़ुदा की सम्त"शलभ" कि आज ही से उधर को पलट गया हूँ मैं।।   परिचय :- धार जिला धार (म.प्र.) निवासी शरद जोशी "शलभ" कवि एवंं गीतकार हैं। विधा- कविता, गीत, ग़ज़ल। आप विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं द्वारा वाणी भूषण, साहित्य सौरभ, साहित्य शिरोमणि, साहित्य गौरव सम्मान से सम्मानित हैं। म.प्र. लेखक संघ धार, इन्दौर साहित्य सागर इन्दौर, भोज शोध संस्थान धार आजीवन सदस्य हैं। आ...
आज का राशिफल २५ अप्रैल सन २०१९ ईस्वी
राशिफल

आज का राशिफल २५ अप्रैल सन २०१९ ईस्वी

📜««आज का पञ्चांग»»📜 कलियुगाब्द.........................५१२१ विक्रम संवत्........................२०७६ शक संवत्...........................१९४१ मास..................................बैशाख पक्ष.....................................कृष्ण तिथी....................................षष्ठी दोप १२ .५० पर्यंत पश्चात सप्तमी रवि...............................उत्तरायण सूर्योदय...........प्रातः ०५ .५९ .४४ पर सूर्यास्त...........संध्या ०६ .५१ .३४ पर चंद्रोदय............रात्रि १२ .२९ .०० पर चंद्रास्त............प्रातः १० .४३ .०५ पर सूर्य राशि...............................मेष चन्द्र राशि..............................धनु नक्षत्र.............................पूर्वाषाढ़ा रात्रि ०८ .३३ पर्यंत पश्चात उत्तराषाढ़ा योग...................................सिद्ध रात्रि १२ .४८ पर्यंत पश्चात साध्य करण...........
जीवन उड़ान
कविता

जीवन उड़ान

रचयिता : रीतु देवी ============================== जीवन उड़ान ये मेरी धरती, ये मेरा आसमान पर्यावरण बचाकर रखें सुरक्षित सारा जहान । स्वचछता का मूल मंत्र हो सबकी जुबान, प्रदूषण फैला न, दे सबको जीवन दान। धरा बनाए सुंदर सा उद्यान, उड़े सुंगधित खुशबू नीला आसमान। कदम-कदम तरू की हरियाली हो जिस पथ ओर चलूँ विकासवाली हो मिले प्राण रक्षक तत्व, हो जाए जीवन आसान ये मेरी धरती, ये मेरा आसमान। लेखीका परिचय :-  नाम - रीतु देवी (शिक्षिका) मध्य विद्यालय करजापट्टी, केवटी दरभंगा, बिहार आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि अपने परिचय एवं फोटो के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर मेल कीजिये मेल करने के बाद हमे हमारे नंबर ९८२७३ ६०३६० पर कॉल करके सूचित अवश्य करें … और अपनी खबरें, लेख, कविताएं पढ़ें ...
मिले जो प्यार तुम्हारा
कविता

मिले जो प्यार तुम्हारा

रचयिता : मुनव्वर अली ताज =========================================== मिले जो प्यार तुम्हारा मिले जो प्यार तुम्हारा तो मैं भी काश करूँ सुखों को अपना बनाऊँ दुखों का नाश करूँ हमेशा  साथ  निभाने  की तुम क़सम खाओ तो मैं  तुम्हारी  क़सम  मौत   को हताश करूँ जो तुम अदाओं की बिजली गिराने आ जाओ तो  मेरे  वश  में  नहीं  है  तुम्हें    निराश   करूँ अगर  समाज  को समझा  बुझा  के आओ तुम लगाऊँ   तुम   को  कलेजे  से   बाहुपाश   करूँ रुका   हुआ    हूँ   इसी  आस  में   दो  राहे   पर जो   आओ  तुम  तो  नई  ज़िन्दगी  तलाश करूँ घटाऊँ   जितनी  ये  उतनी   ही  बढ़ती   जाए  है तुम्हारी   याद  का  मैं  किस  तरह   विनाश  करूँ तुम्हारी   चाह   में   काँटे  अगर     मिलें   मुझ को तो  मैं   जुदाई   के   छालों   का   सर्वनाश    करूँ लेखक का परिचय :- मुनव्वर अली ताज उज्जैन आप भी अपनी कविताएं, कहानिय...
आओ मिल कर देश बचाऐं … गीत
गीत

आओ मिल कर देश बचाऐं … गीत

रचयिता : लज्जा राम राघव "तरुण" =========================================== आओ मिल कर देश बचाऐं ... आओ मिल कर देश बचाऐं। देश बंटा वादों के अन्दर, ठाठें मारे द्वेष समंदर, अन्तर्मन की प्रीत निचोडें, देश-प्रेम की ज्योति जलाऐं। आओ मिलकर देश बचाऐं। मत पड़ाव को समझो मंजिल, लक्ष्य न हो आंखों से ओझल, राह दिखाने घोर तिमिर में, बुझी मसालों को सुलगाऐं। आओ मिलकर देश बचाऐं। फिर पीछे से वार किया है, मां का दामन तार किया है, अटल विजय का वज्र बनाने, बन दधिचि हड्डियां गलाऐं। आओ मिलकर देश बचाऐं। बैठो मत कर लो तैयारी, दिल पर चोट लगी है भारी, सब्र नहीं मत रखो उधारी, रिपु को सूद सहित लौटाऐं। आओ मिलकर देश बचाऐं। उठो देश के वीर जवानो, अपनी ताकत को पहचानो, बिन आहुति के यज्ञ अधूरा, बलिवेदी पर शीचढ़ाऐं। आओ मिलकर देश बचाऐं। लेखक परिचय :-  नाम :- लज्जा राम राघव "तरुण" जन्म:- २ मार्च १९५४ ...
छैनी
लघुकथा

छैनी

रचयिता : विजयसिंह चौहान =========================================================================================================== छैनी गर्मी की तपिश ने सभी को हालाकान कर दिया मगर लूहार की झोपड़ी में गर्मी का असर कहीं नजर नहीं आता। लोहे को गर्म कर, पीट-पीट कर छैनी जो बनाना है इसलिए पूरा परिवार लगा रहता है। परिवार का मुखिया लोहे को गर्म कर लालसुर्ख करता और फिर शुरू होता है काम शुरू होता गुल्लो का। वजनी हथोडे को पूरी ताकत से लोहे पर प्रहार करती और आकार देती है छेनी को। छैनी वही, जो पत्थर तराशने, मूर्ति बनाने की लिए काम आती है। आकार और साकार का यह क्रम गुल्लो और छेनी बखूबी करते हैं, तभी गुल्लो की बिटिया, झूला बंद होने पर रोने लगती है। गुल्लो, छैनी पर चोट करते-करते बच्ची को दुलारती, पुचकारती, बचपन सँवारती, और पसीना पोछ कर फिर जुट जाती है, आकार देने के लिये, तराशने का यह क्रम ज...
वो लम्हें
कविता

वो लम्हें

रचयिता : कुमुद के.सी.दुबे ====================================== वो लम्हें कल की ही तो बात है! माँ की ऊंगली थामें एक बसती हुई नई बस्ती में आयी थी खुशी होती थी ईंट,टीन चद्दर से नई इमारतों बंगलों के बीच की खालीजगह पर बनी हमारी टापरी और रंगीन फट्टे से बनाई छत देख रेत के ढेर पर सखियों संग लोट लगाती घर बना सुन्दर सीप शंख पत्थर चुन सजाती खोदे ट्यूबवेल का पानी काॅच की चमक सी निकली पहली फुहार में खूब मजे से नहाती चुल्हा जलाने झाडियों से सूखी लकडियां लाने माँ के पीछे पीछे कुदते फुदकते हो लेती खाली जमीन मे उग आयी कटीली झाडियों मे लगे जंगली फूलों को तोड गुल्दस्ता बना इतराती फिरती सामने के बंगले से स्कूल जाते बच्चे को चुपक चुपकेे तकती और न जाने की जिद्द पर उसे रोते देख खुश होती माता पिता द्वारा मुझे स्कूल न भेजने पर अपने आप में सुकून पाती आज, कई बरस बाद भी ...
आज का राशिफल २४ अप्रैल सन २०१९ ईस्वी
राशिफल

आज का राशिफल २४ अप्रैल सन २०१९ ईस्वी

📜««आज का पञ्चांग»»📜 कलियुगाब्द..........................५१२१ विक्रम संवत्.........................२०७६ शक संवत्............................१९४१ मास...................................बैशाख पक्ष......................................कृष्ण तिथी...................................पंचमी प्रातः ११ .३६ पर्यंत पश्चात षष्ठी रवि................................उत्तरायण सूर्योदय............प्रातः ०५ .५९ .१० पर सूर्यास्त...........संध्या ०६ .५० .१२ पर सूर्य राशि.................................मेष चन्द्र राशि...............................धनु नक्षत्र......................................मूल संध्या ०६ .३२ पर्यंत पश्चात पूर्वाषाढ़ा योग.......................................शिव रात्रि १२ .३५ पर्यंत पश्चात सिद्ध करण....................................तैतिल प्रातः ११ .३६ पर्यंत पश्चात गरज ऋत...
मानव ही मानव का शत्रु
कविता

मानव ही मानव का शत्रु

रचयिता : रीतु देवी =============================================== मानव ही मानव का शत्रु मानव ही मानव के शत्रु है, कुदृष्टि डालकर तृप्त करते तन अनेक चक्षु हैं। मानवता का यहाँ कोई मोल नहीं, भाईचारा का बंधन अब दिखता नहीं कहीं, आनंदित होते धन-दौलत की अंधी गलियों में ही फंसकर मोह जाल मिल जाते मिट्टी में ही न जाने क्यों वहशी बन शैतानी करते है? लालची निगाहें अनगिनत जिन्दगानी लेते हैं। जागो, जागो इंसान मानवता का मूल्य पहचानों, वसुंधरा है सबकी न नष्ट करो अरमानों। लेखीका परिचय :-  नाम - रीतु देवी (शिक्षिका) मध्य विद्यालय करजापट्टी, केवटी दरभंगा, बिहार आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि अपने परिचय एवं फोटो के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर मेल कीजिये मेल करने के बाद हमे हमारे...
मजदूरी
लघुकथा

मजदूरी

रचयिता : मित्रा शर्मा =========================================================================================================== मजदूरी दिनभर मजदूरी करने के बाद घरमे शाम को मा का इंतजार में बैठे बच्चे को मा ने दस रुपये थमाते हुए बोली किराना के दुकान से आटा ले आ जल्दी भूख लग रहि है । पहले से भूखे बैठे बच्चे आपस मे लड़ने लग गए मैं जाता हूँ तू देर करेगा। दोनो बच्चे के लड़ाई और नोटकी खींचातानी में नोट दोनो के हाथ मे आधा आधा हो जाता है । एक दूसरे को देख रहे चुप होते बच्चे के ऊपर कहर बरसाने की बारी म की थी परिचय :- मित्रा शर्मा महू (मूल निवासी नेपाल) आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि अपने परिचय एवं फोटो के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर मेल कीजिये मेल करने के बाद हमे हमारे नं...
छोड़ चली
कविता

छोड़ चली

रचयिता : विनोद सिंह गुर्जर ========================================== छोड़ चली मित्रो, आज में जो रचना सुना रहा हूँ। वह कभी रचना का सत्य हुआ करता था। ...जीवन में जो सोचते है वो होता नहीं।...कुछ लोग दुख देने के लिये ही आते हैै।। देखें विरह घड़ी ...आँख से रिसते आंसू कागज पर उकेरने की कोशिश।।...रागिनी को समर्पित।। मेरे मन की हरियाली पर पतझड़ छोड़ चली। अधखिले फूल उम्मीदों के तू तोड़ चली ।।.... हम जिधर गए तुमको वहीं पर याद किया । जाने कितनों से मैंने प्रिय विवाद लिया । फिर क्यों तू ताजमहल चाहत का फोड चली ।।.. अध खिले फूल उम्मीदों के तू तोड़ चली ।।... हमने ना गौरव माना अपनी हस्ती का। माँझी तुम्हें बनाया अपनी कश्ती का । फिर क्यों तू बीच भंवर में मुख को मोड़ चली ।।.. अध खिले फूल उम्मीदों के तू तोड़ चली ।।... तुम जो कहते जीवन अर्पण कर देता मैं । तेरी खुशियों का स्वयं वरण कर लेता में ।...
कामना
लघुकथा

कामना

रचयिता : अर्चना मंडलोई =========================================================================================================== कामना वह लकडियों के ढेर के बीच बैठा, उनिंदा सा जली हुई लाशों की राख के ढेरों को देख रहा था। अपनी जर्जर होती काया को सहलाते हुए सोचने लगा - लाशों को जलाने के लिए लकडियाँ बेचते-बेचते एक दिन स्वयं भी राख के ढेर में बदल जाऊँगा। निर्धनता और जीविकोपार्जन की कोशिशों ने इस श्मशान में रहते-रहते मेरे जीवन को भी मृतप्राय बना दिया हैं। उसने आसमान की ओर देखा -! सूर्यास्त का समय होने को था - कातर आँखों से अपने पाँच वर्षीय पुत्र की ओर देखते हुए वह सोचने लगा - क्या आज एक भी लाश नहीं आयेगी? क्या आज रात का भोजन नहीं बन पाएगा? तभी रघु पति राघव की धुन उसके कानों पर पडी ! उसने अपनी सोच को विराम दिया, और फुर्ती से उठकर लकडियाँ तोलने की तैयारी करने लगा। तराजू के हिलते पलडों के...
अधखिला फूल
लघुकथा

अधखिला फूल

रचयिता : कुमुद के.सी.दुबे =========================================================================================================== अधखिला फूल        संजू , ओ संजू, कब तक खेलेगा दिन चढ़ रहा है..?        काम पर चले जा बच्चा... समय पर ना पहुंचा तो सेठ दहाड़ी का पैसा काट लेगा। रमा ने अपने आठ वर्षीय बेटे को आवाज दी।  संजू मां की आवाज सुन दौड़कर आया और लड़ियाने के अंदाज में मां के कंधे पर झूलते हुए बोला मां मैं आज से काम पर नहीं जाऊंगा होटल के सेठ ने मोहन चाचा को काम से निकाल दिया है, और बडे़-बडे़ बर्तन सब मुझ से मंजवाता है। ठीक से साफ नही हुए कहकर, रुपिया भी काट लेता है।       रमा ने प्यार से संजू को समझाने की कोशिश की ...। बेटा, वहां न जा कोई और काम ढुंढ ले। इस पर संजू  पैर पटकते हुये बोला नहीं मां मैं काम पर नहीं, सामने वाले बंगले के दीपू की तरह नीली पेंट सफ़ेद क़मीज़ पहन स्कूल ...
साहित्य और सरकार
कविता

साहित्य और सरकार

रचयिता : ईन्द्रजीत कुमार यादव ======================================================= साहित्य और सरकार किस प्रकार की है तेरी सियासत है कैसा इसका आकार, प्यार मोहब्बत आग को गए फिर कैसे है तेरा शाषन साकार। यहाँ न शिक्षा है , न रोजगार है बस जुमलों की बौछाड, बस पैसों के हि कान सही है नही तो बहरी है सरकार। मुँह चिढ़ाए देखो कैसे हंसता है ये अदना सा भृष्टाचार, शिल्प सुत सब महंगे हो गए बस सस्ता है ईमान। देखो कलम भी खो रही है अपनी ताकत हो रहा स्याही बेकार, ईमानदारी का चोला पहने होता है पत्रकारों का व्यपार। है जिसकी जैसी जमीर की किमत है मिलता वैसा साहूकार, फिरता नही बिका जमीर है साहुकार आज संसद का पहरेदार। देकर अपने मातृभूमि को गाली दिखाता है वो अपना राष्ट्रवाद, बहाकर कतरा-कतरा लहु का सिपाही है बचाता हमारा स्वराज। यहाँ मजबुरी और गरीबी की लगता है हर पल एक बाजार, मुर्दों ...
शब्दाँजली
कविता

शब्दाँजली

रचयिता : मुनव्वर अली ताज =================================== शब्दाँजली   शब्द को शर्मसार मत करना शब्द को गुनहगार मत करना शब्द हो जाए न विमुख तुम से शब्द का तिरस्कार मत करना शब्द को संगसार मत करना शब्द पे अत्याचार मत  करना शब्द संवाद की सदाक़त है शब्द से व्याभिचार मत करना शब्द से झूटा प्यार मत करना शब्द से धोका यार मत करना शब्द सद्भावन का हामी   है शब्द को दाग़दार मत करना शब्द को मनमुटाव मत देना शब्द को भेद-भाव मत देना राम अपना है रब पराया है शब्द को ये सुझाव मत देना शब्द को तन से प्यार कर  लेना शब्द को मन से प्यार कर  लेना शब्द देगा तुम्हें अमर जीवन शब्द को धन से प्यार कर लेना शब्द का धर्म भी नहीं होता शब्द का कर्म भी नहीं होता सच है लेकिन ये सच नहीं प्यारे शब्द का मर्म भी नहीं होता शब्द पे दिल निसार कर देना शब्द पे जाँ निसार कर   देना शब्द को...
धरा तू महान है
कविता

धरा तू महान है

रचयिता : मनोरमा जोशी =============================================== धरा तू महान है है घरती माँ ,तुझे प्रणाम , तू कितनी हैं महान । तेरे आँचल में पले जग सारा , हर प्राणी की तू हैं जान , तू बड़ी महान । सम भाव से सबको हांके चहुँ और रखती हैं ध्यान, हर समस्या का समाधान , तू बड़ी हैं महान । कभी बहाती तीव्र धारा, कभी रूखा रेगिस्तान, हर कृषक की पालनहार, तू हैं अमिट निशान , तू बड़ी हैं महान । तुझ पर अडिंग थमे हूए है महल कचहरी और मकान , कितने बोझ सहन कर तुमनें किया जन जन पर उपकार , तेरी महिमा अपरंपार , तुझमें उर्वरक शक्ति महान तुझ से रोशन सारा जहाँन तू माँ बड़ी महान । शत शत करु प्रणाम । लेखिका का परिचय :-  श्रीमती मनोरमा जोशी का निवास मध्यप्रदेश के इंदौर में है। आपका साहित्यिक उपनाम ‘मनु’ है। आपकी जन्मतिथि १९ दिसम्बर १९५३ और जन्मस्थान नरसिंहगढ़ है। शिक्षा-स्नातकोत्तर और स...
धरा बचाओं-जीवन बचाओं (पृथ्वी दिवस विशेष)
आलेख

धरा बचाओं-जीवन बचाओं (पृथ्वी दिवस विशेष)

रचयिता : शिवांकित तिवारी "शिवा" =========================================================================================================== धरा बचाओं-जीवन बचाओं (पृथ्वी दिवस विशेष)          आज हमारी धरती माँ का दिन है यानि "विश्व पृथ्वी दिवस" - जिस धरा पर हमारा जन्म होता है और जन्म से लेकर मृत्यु तक का सम्पूर्ण समय हम इसी पावन पुनीत धरा पर व्यतीत करते है। यह हमारे जीवन की सबसे अनमोल धरोहर है और सबसे पवित्र स्थान है। जिस प्रकार माँ नौ महीने कोख में रख कर हमें जीवन देती है और हमारे जीवन का संरक्षण करती है उसी तरह धरती माँ हमारे सारे जीवन को सदैव संरक्षण प्रदान करती है। हमारे जीने के लिये आश्रय स्थान,खाने के अनाज और जीवन-यापन के लिये जो भी आवश्यक वस्तुयें चाहिये वह समस्त वस्तुयें इस धरा से ही प्राप्त होती हैं। यदि इस धरती में रहकर हम इसको बचाने के लिये जागरुक नहीं...
धैर्य परीक्षा न लें
कविता

धैर्य परीक्षा न लें

रचयिता : श्रीमती मीना गोदरे 'अवनि' ========================================================== धैर्य परीक्षा न लें 'अवनि' की धैर्य परीक्षा न लें न अस्मिता धरा की लुटने दें ला सकती है भूचाल 'अति' जो उसका है, उसको लौटा दें आओ मां की लाज बचा कर मातृभूमि का कर्ज़ लौटा दें दोहन कर न उसे निचोड़ें नहीं पर्यावरण प्रदूषण छेडें मूक पीड़ा से हम उसे उबारें वृक्ष लगा धानी चूनर ओढा दें आओ मां की लाज बचा कर मातृभूमि का कर्ज चुका दें मानव से दानव बन चुके इंसानों का भार हटा दें जो रक्त से उसको रंग दें उनका नामोनिशान मिटा दें आओ मां की लाज बचा कर मातृभूमि का कर्ज चुका दे पर्वत नदियां बाग बगीचे सिंचित फूलें फलें गोद में पाला जिसने सब कुछ खोकर उसको शोषण मुक्त करा दें आओ मां की लाज बचा कर मातृभूमि का कर्ज चुका दे नहीं कृतघ्नी बनकर लुटे न बंजर हो सूखी धरती न ज्वालामुखी भूमि ...
 आशियाना तिनका का 
कविता

 आशियाना तिनका का 

रचयिता : ईन्द्रजीत कुमार यादव =================================================================== मालुम है ये शाख हि जमीन है मेरी और एक दिन काट दि जाएगी, मरने से पहले मरना और हारने से पहले हारना फितरत नही हमारी, जा रहा हुँ उस तूफ़ान से आंख में आंख मिलाने को, मैं तिनका - तिनका जोड़ूँ एक आशियाना बनाने को। भरोसा अपने पंखों पर बनता और बिगड़ता रहता है, मगर ये तमाशा जिंदगी भर यूँही चलता रहता है, जितनी अंबर बक्शी है तुने काफी है उड़ान भरने को, मैं तिनका - तिनका जोड़ूँ एक आशियाना बनाने को। ये जो पतझड़ है मौसम हि तो है ऐसे हि बदलते रहेंगे, इन्तेजार क्यों बसन्त और बहार का बदलना तो तेरे मिजाज से सिख लिया, तु कुछ कहे या मैं कुछ कहुँ अब दौड़ नही कुछ भी आजमाने को, मैं तिनका - तिनका जोडूं एक आशियाना बनाने को। चाँद थोड़ा धुंधला गया है अब केह- कहे युहीं लगते रहेंगें, अहम कि बातें थी ये सब वख्त...
मां भारती की पीड़ा
कविता

मां भारती की पीड़ा

रचयिता :  दिलीप कुमार पोरवाल "दीप"  ===================================================================== मां भारती की पीड़ा मैं हैरान थी, परेशान थी मुझे लूटा था, जकड़ा था उन धूर्त फिरंगीयों ने, मुझे आजाद कराया मेरे वीर सपूतों ने, तब मैं खुलकर हंसी चहकी थी, मेरी उन्मुक्त खिलखिलाहट चारों ओर फैली थी, मुझे गर्व होता था मेरे गांधी, जवाहर, सुभाष, चंद्रशेखर, भगत सिंह जैसे वीर सपूतों पर, मेरी लक्ष्मी जैसी वीरांगना बेटियों पर तब मैंने देखे थे ख्वाब, अब सब कुछ मेरा अपना होगा, अब ना होगा कोई बेसहारा, ना कोई भूखा सोएगा, अब मेरे बच्चे कामयाब होंगे अपना भविष्य बनाने में, अब मेरी बेटियां फिर से मान-सम्मान पाएगी l पर अब मैं हैरान हूं परेशान हूं, अपने टूटते सपनों को देखकर क्यों, क्योंकि अब मेरे अपने ही मुझे लूट रहे हैं मेरी बेटियों की आबरू से खेल रहे हैं मेरे बेटे एक दूसरे के खून के...
तूने देखा नजर लगी
कविता

तूने देखा नजर लगी

रचयिता : विनोद सिंह गुर्जर =========================================================================================================== तूने देखा नजर लगी तूने देखा नजर लगी, पिया खिला बदन मुरझाया।।... मैं नाजुक सी कली चमन की, तू भंवरा दीवाना।-२ मुझे भरमाने भ्रमर करे, क्यों छेड़े राग तराना ।। तूने देखा नजर लगी, पिया कोमल तन कुम्हलाया।।... तूने देखा नजर लगी, पिया खिला बदन मुरझाया।।... नीम-हकीम सभी आए, वैरन ना नजर हटे है ।-२ सांसों की गति तेज हुई, मन ही मन क्या-क्या रटे है।। तूने देखा नजर लगी, पिया अंग-अंग झुलसाया।।... तूने देखा नजर लगी, पिया खिला बदन मुरझाया।।... दिन में तारे दिखते हैं, और रातें किरणों वाली। घरके जन सब कहें बावरी, सखियां देतीं गाली।। तूने देखा नजर लगी पिया, कहें प्रेत का साया ।।... तूने देखा नजर लगी, पिया खिला बदन मुरझाया।। परिचय :-   विनोद सिंह ग...
तेरा प्यार
गीत

तेरा प्यार

रचयिता : मोहम्मद सलीम रज़ा ===================================================================================================================== तेरा प्यार दिल में बसा है तेरा प्यार गोरिए कर लेने दे मुझे दीदार गोरिए सपनो में आके क्यूँ मुझे तड़पती हो अपना बनाले दिलदार गोरिए                     oo जाना तेरे दिल को बेक़रार करूँगा जी भर के तुझे आज प्यार करूँगा तेरे लिए चांदनी का सेज लगा दूँ चाँद सितारों से तेरी मांग सजा दूँ तुझपे ये ज़िंदगी निसार गोरिए                      oo पतली कमर मत ऐसे बल खा सोंडा सोंडा मुखड़ा न बांहों में छुपा सजनी दीवानी यूँ न अँखियाँ चुरा तेरे सुने जियरा में हमको बसा प्यार करूँगा बे - सुमार गोरिए                      oo सोड़े-सोड़े मुखड़े पे जादू तेरे जाना तेरे पीछे पड़ गया सारा ज़माना मुझ सा दीवाना न तू पाएगी दीवानी तुझपे निसार किया सारी ज़िंदगानी किया...
आज का राशिफल २३ अप्रैल सन २०१९ ईस्वी
राशिफल

आज का राशिफल २३ अप्रैल सन २०१९ ईस्वी

📜««आज का पञ्चांग»»📜 कलियुगाब्द.........................५१२१ विक्रम संवत्........................२०७६ शक संवत्...........................१९४१ रवि................................उत्तरायण मास.................................बैशाख पक्ष....................................कृष्ण तिथी.................................चतुर्थी प्रातः ११ .०८ पर्यंत पश्चात पंचमी सूर्योदय...........प्रातः ०६ .०० .२५ पर सूर्यास्त...........संध्या ०६ .५० .४७ पर सूर्य राशि................................मेष चन्द्र राशि...........................वृश्चिक नक्षत्र..................................ज्येष्ठा संध्या ०५ .१५ पर्यंत पश्चात मूल योग....................................परिघ रात्रि १२ .५५ पर्यंत पश्चात शिव करण.................................बालव प्रातः ११ .०८ पर्यंत पश्चात कौलव ऋतु........................