पिता हूँ… पिता का दर्द जानता हूँ …
प्रीतम कुमार साहू
लिमतरा, धमतरी (छत्तीसगढ़)
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पिता हूँ, पिता का दर्द जानता हूँ !
गम छिपाकर मुसकुराने का मर्म जानता हूँ..!!
छाले हो पांव में कोई गम नहीं !
कंधे पर बैठाकर दुनिया घुमाना जानता हूँ..!!
जिम्मेदारियों ने जकड़ लिए है पर मेरे !
वरना ख्वाबों के शहर में उड़ना जानता हूँ..!!
अपनों की खुशी और अपनों का प्यार !
यही जिंदगी का मकसद मैं भी जानता हूँ..!!
मुफ्त में मिल जाएंगे नसीहते हजार !
अच्छी जिंदगी जीने का हर राज जानता हूँ..!!
जी रहे है हम भी बेहतर जिंदगी !
पर पिता हूँ, पिता का हर फर्ज जानता हूँ…!!
परिचय :- प्रीतम कुमार साहू (शिक्षक)
निवासी : ग्राम-लिमतरा, जिला-धमतरी (छत्तीसगढ़)।
घोषणा पत्र : मेरे द्वारा यह प्रमाणित किया जाता है कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।
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