ऐ नारी, तू नर से भारी
संजू "गौरीश" पाठक
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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अखिल भारतीय कविता लिखो प्रतियोगिता
विषय :- "नारी और स्वतन्त्रता की उड़ान"
उत्कृष्ट सृजन पुरस्कार प्राप्त रचना
ऐ नारी ! सच में तू नर पर भारी
कहां रही अब बेचारी?
क्षेत्र नहीं है कोई अछूते
थामी डोर स्वयं बलबूते
बन जाती है रणचंडी भी
जहां मिले व्यभिचारी।
सच में तू नर पर भारी।।
तोड़ बेड़ियां आगे आई।
शिक्षा पाकर अलख जगाई।।
सकल जगत की जन्म दात्री,
तू ही जग की पालनहारी।।
अब आया है समझ सभी के
बदल दिए हैं तौर तरीके
भरी उड़ान गगन छूने की
बनी बड़ी अधिकारी।।
सारे तेरे रूप है सुंदर
मिल जाए गर कोई पुरंदर
सीमा में अपनी रहकर तुम
देना दंड दुराचारी।।
मत बनना तुम बेचारी!!
परिचय :- संजू "गौरीश" पाठक
निवासी : इंदौर मध्य प्रदेश
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलि...




















