सावन मनभावन
राम प्यारा गौड़
वडा, नण्ड सोलन (हिमाचल प्रदेश)
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सावन तेरे संग-संग
धरा पे निखरे अनेकों रंग
हरितिमा के कालीन पर
मेघ शिशु अठखेलियां करते
तितलियों संग उड़ते
छुपते,करते कभी अट्टहास
वर्षा बूंदों से नहाए पल्लव
सूरज रश्मियों से पा गरमाहट
मंद सुगंध हवा के संग
हाथ हिला करते अभिवादन
राग मल्हार गाते भंवरे
कोकिल गान कानों में पसरे
घनघोर शोर लिए मोर हरषे
बहुरंगी बादल उमड़े
क्षण भर में रुप बदले..
भयानक रूप
बना सबको डराए
गड़गड़ ध्वनि से
सब थर्राए
अगले ही क्षण
वर्षा की झड़ी लगाए
देख कृषक
मन ही मन हर्षाए
सावन की है
महिमा निराली
हर जीव जंतु की
चाल हो जाए मतवाली
नेह संचार हृदय में होता
वियोग में प्रेमी युगल
छुप कर रोता
हर कोई सावन की
बाट है जोहता
सबसे तेरा नाता है
सबको तू भाता है
मन में मधु उपजाता है
इसीलिये तू
मधुमास कहलाता है।
सतरंगी इंद्रधनुष
का हार...























