चादर
डॉ. किरन अवस्थी
मिनियापोलिसम (अमेरिका)
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हम अपनी चादर में पैर
समेटे सदियों तक बैठें रहे
धूल का गुबार उनका उड़ा
जो पांव पसारते चले गये
हमने न की कभी शिकायत
वो चादर हमारी उघाड़ते चले गये
इतनी बड़ी थी चादर हमारी
वो काटते चले गये
हम अपना रक्त मानते रहे
हम खुशी से और देते रहे
हम सहिष्णुता से रहते रहे
कुछ फिर भी असहिष्णु होकर
हमें नकारते रहे
बची खुची चादर भी खींचते रहे
हम एक-एक टुकड़ा भी दान कर दें?
चादर तो छोड़ें, स्वयं को दान कर दें?
परिचय :- डॉ. किरन अवस्थी
सम्प्रति : सेवा निवृत्त लेक्चरर
वर्तमान निवासी : मिनियापोलिस, (अमेरिका)
शिक्षा : एम.ए. अंग्रेजी, एम.ए. भाषाविज्ञान, पी.एच.डी. भाषाविज्ञान
सर्टिफिकेट कोर्स : फ़्रेंच व गुजराती।
सम्प्रति : आप राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच अमेरिका शाखा की अध्यक्षा है।
पुनः मैं अपने देश को बहुत प्यार ...


















