इश्क़-सी कुछ लगे है हवा
डॉ. कामता नाथ सिंह
बेवल, रायबरेली
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इश्क़-सी कुछ लगे है हवा
मनचली-सी लगे है हवा
इससे उससे लिपटती फिरे
पागलों-सी लगे है हवा
मौसमों-सी बदलती है यह
दिल्लगी-सी लगे है हवा
बाग, जंगल, पहाड़ी, नदी,
ये तो सब को लगे है हवा
बन्द कमरों से बाजा़र तक
बेहया-सी लगे है हवा
परिचय :- डॉ. कामता नाथ सिंह
पिता : स्व. दुर्गा बख़्श सिंह
निवासी : बेवल, रायबरेली
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।
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