जीवन उत्सव
सपना
दिल्ली
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जीवन उत्सव है
सुख-दुःख का संगम....
दुश्मनी, जलन
ऊंच-नीच की बात
अकड़, जाति-पाति बन्धन
से ऊपर उठकर
प्रेम करके देखो
जीवन उत्सव है।
छोड़ कल की चिंता
आज में जी
बड़ी खुशियों के
पीछे न भाग
छोटी-छोटी खुशियां
बटोर कर तो देखो
जीवन उत्सव है।
बड़ों का आदर
छोटों से प्रेम
सहारा बेसहारा का
ज़रूरतमंद की मदद
करके तो देखो
जीवन उत्सव है।
छोड़ मोबाइल, लेपटॉप
चंद लम्हे अपनों के साथ
कुछ अपनी सुनाएं
कुछ उनकी सुनो
जीवन उत्सव है।
उगते सूरज की
पहली किरण
चांदनी रात
चिड़ियों की चहचहाहट...
सप्तरंगी दुनिया क़ुदरत की
खोकर तो देखो...
जीवन उत्सव है।
परिचय :- सपना
पिता- बान गंगा नेगी
माता- लता कुमारी
शैक्षणिक योग्यता- एम.ए.(हिंदी), सेट, नेट, जेआर. एफ. अनुवाद में डिप्लोमा ( अंग्रेज़ी से हिंदी), पी.एचडी. (ज़ारी)
साहित्यिक उपलब्धियां- १५ से अधिक राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय संगोष्ठियों में सहभ...





















