स्वीकार करो
माधुरी व्यास "नवपमा"
इंदौर (म.प्र.)
********************
जो होना है वो होता है,
तो फिर काहे को रोता है....।
नागफनी से भरा हो मरुस्थल,
या गुलाब से खिला हो उपवन।
काँटो को तो जब सहना है।
तो फिर कहे का रोना है।
जो होना है वो होता है,
तो फिर कहे को रोता है....।
फ़ुहारों से भीगा हो मरुस्थल,
या बरखा से महके उपवन।
ना भीगा मन का वो कोना है,
तो फिर कहे का रोना है।
जो होना है वो होता है,
तो फिर काहे को रोता है....।
उष्ण बयार से तपे मरुस्थल,
या पवन से हो शीतल उपवन।
मधु से भी जख्मों को सीना है,
तो फिर काहे का रोना है।
जो होना है वो होता है,
तो फिर कहे को रोता है....।
शुष्क रेत से जमा हो मरुस्थल,
या कीचड़ से सना हो उपवन।
हँस-हँस कर जब जीना है,
तो फिर काहे का रोना है।
जो होना है वो होता है,
तो फिर काहे को रोता है....।
परिचय :- माधुरी व्यास "नवपमा"
निवासी - इंदौर म.प्र.
सम्प्रति - शिक्षिका (हा.से. ...
























