विरह की वेदना
अर्चना अनुपम
जबलपुर मध्यप्रदेश
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रस- करुण, शांत।
भाषा- तत्सम हिन्दी शब्द संयोजन।
समर्पित- शास्वत पौराणिक पात्र हेतु।
कर धर भटकते मौन कम्पित स्वर, दशा ज्यों मार्मिक।
सती देह मृत स्थूल शिव, वो शास्वत भी पार्थिव।।
मधुकर लताकर वट समूहों से व्यथा निज गा रहे।
श्री राम सिय की वेदना सह अश्रु जनित सुना रहे।।
प्रियतम पुनः मधुमास में आकर हमारी स्वास में।
वंशी की देकर तान वृन्दावन सुसज्जित रास हो।।
अनिमेष अपलक राधिका कुछ यूँ वो विरहाधीन है।
निष्ठुर नियति के सामने मछली ज्यों नीर विहीन है।।
विक्षिप्त, गिरती सी संभलती कौंध कहती हे!वरा ।
सर पीटती रोती विलापित भाव बेसुध उत्तरा।।
दावाग्नि ज्वलित प्रतीत श्रावण की घटा प्रिय क्षोभ में।
देवों के हित ले प्रीत भस्म, रति; अति विकल विक्षोह में।।
व्यापक अनादि देव विह्हल, द्रवित अंतर श्री पतैय।
व्या...

























