जनता जनार्दन
गोविंद पाल
भिलाई, दुर्ग (छत्तीसगढ़)
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झूठ के पीठ लदे
"सत्यमेव जयते" की लाशें
आंखों पर पट्टी बंधी कानून के
लाशघर के फ्रीजर में बंद है
जरूरत के मुताबिक जिसका
किया जाता है पंचनामा,
कभी-कभी चीरघर में
उसका पोस्टमार्टम होता है
इसके बाद मरघट में शुरू होता है
लाशों का धर्मिय बहस
की इसे जलाया या दफनाया जाय,
इधर इंसानियत ओढने की नुमाइशे
जोरो पर चलती है
इस ताक में बैठे कुछ जन विरोधी प्यादे भी
बहती गंगा में धो लेते हैं हाथ
इस मौके की ताक में बैठे
कुछ लोग अपने को
इश्वर होने की घोषणा कर देते हैं,
हर तरफ इस अवसरवादी
कानफोड़ू शोरगुल में
अंदर की सच्चाई कब दफ्न हो जाती है
उसका अहसास भी नहीं कर पाती
जनता जनार्दन।
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परिचय :-गोविंद पाल
शिक्षा : स्नातक एवं शांति निकेतन विश्व भारती से डिप्लोमा इन रिसाइटेशन।
लेखन : १९७९ से
जन्म तिथि : २८ अक्तूबर १९६३
पिता : स्व. नगेन्द्र नाथ पाल,
माता : स्...
























