क्यों भूल गए आज
भारत भूषण पाठक देवांश
धौनी (झारखंड)
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क्यों भूल गए आज।
नववर्ष है अपना आज।।
कल तक तो खूब चिल्ला रहे थे।
अँग्रेज़ी नववर्ष पर इठला रहे थे।।
आज क्यों हो मौन।
कहो न आज नववर्ष की शुभकामनाएं।
क्यों न दे रहे आज शुभकामनाएं।।
आज शान्त क्यों हो।
आज क्लान्त क्यों हो।।
आज ही तो नववर्ष है।
देखो लताएं भी मुस्कुरा रही है।
डालियां भी इठला रही है।।
आज कहाँ है तुम्हारा वो ध्वनि विस्तारक यन्त्र।
मौन क्यों हो आज साथ दे रही प्रकृति के सब तन्त्र।।
देखो क्या आनन्दमय सा चहुँओर वातावरण है।
मन आनन्दित तन आनन्दित और आनन्दित उपवन है।।
देखो मैं ये नहीं कह रहा मत मनाओ आंग्ल नववर्ष।
पर देखो यह अपना आनन्दमय पुनीत नववर्ष।
हिन्दी नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।
परे हो विश्व से आतंक की घटाएं।
पूरित हो सबकी सम्पूर्ण अभिलाषाएं....
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परिचय :- भारत भूषण पाठक देवांश
लेखनी नाम - तुच्छ कवि 'भारत '
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