हंगामा है…
डॉ. बी.के. दीक्षित
इंदौर (म.प्र.)
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हंगामा मचाया है..... सियासत के झमेले में।
ज़रा तुम पूँछ लो भाई, खुद से खुद अकेले में।
बना कानून संसद में, तब मैदान छोड़ा क्यों?
महज़ नाटक किया करते, काम अच्छे में रोड़ा क्यों?
बिन पेंदी के लोटे हैं, उन्हें साथी बनाया क्यों?
माया और शिवसेना? भरोसा यूँ जताया क्यों?
लगाकर आग खुश हो तुम, संपत्ति बाप की है क्या?
गंदी सोच और तिकड़म मंशा आपकी है क्या?
सारे काम कर डाले (मोदी जी ने) जो जितने जरूरी थे।
ठोकर ख़ाकर ना सुधरे (राहुल जी) गुरूरी हो गुरूरी थे।
अमन और चैन की भाषा, तुम्हें शायद पता है क्या?
सोचते क्यों नहीं प्यारे, जलाकर यूँ नफ़ा है क्या?
बिजू बहुत अच्छे हैं..... वो सच्चे पथ के अनुगामी। (मोदी,शाह)
सपा, बसपा और पंजे की, समझ न आती नादानी।
गद्दारों से देश घिरा है, भृम जो भी थे टूट गये।
है श्रंगार भाव ना दिल में, इक़ झटके में भूल गये।
बिंद...



















