अतिरिक्त
राजीव डोगरा "विमल"
कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश)
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तुम चेहरे की
मुस्कुराहट पर मत जाओ
बहुत गम होते हैं
सीने में दफन।
तुम झूठी
वफाओं में मत आओ
बहुत ख़्वाब होते हैं
आधे अधूरे से।
तुम इन सिमटी हुई
निगाहों पर मत जाओ
बहुत कुछ बिखरा हुआ होता है
छुपी हुई निगाहें में।
तुम टूटे हुए ह्रदय पर
मत जाओ
बहुत शेष होता है प्रेम
ओरों के लिए।
परिचय :- राजीव डोगरा "विमल"
निवासी - कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश)
सम्प्रति - भाषा अध्यापक गवर्नमेंट हाई स्कूल, ठाकुरद्वारा
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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