मैं रंग हूॅं…
शैल यादव
लतीफपुर कोरांव (प्रयागराज)
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हाॅं! मैं रंग हूॅं।
मेरी कोई
जाति नहीं,
मेरा कोई धर्म नहीं,
मैं किसी का शत्रु नहीं,
किसी विशेष
का मित्र नहीं,
सब हमारे हैं,
मैं सबका अंग हूॅं,
हाॅं! मैं रंग हूॅं।
दिन-रात,
सुबह-शाम में,
जामुन, गुलाब
और आम में,
तन बदन
धरती आकाश में,
रजनी के तम
दिवस के प्रकाश में,
वृक्ष लता गुल्म में,
रहम करम ज़ुल्म में,
मैं सभी के संग हूॅं,
हाॅं! मैं रंग हूॅं।
प्रकृति के यौवन
के श्रृंगार में,
फूलों के साथ-साथ
अंगार में,
गिरगिट और
सियार में,
प्यार और
तकरार में,
नफ़रतों से तंग हूॅं,
हाॅं! मैं रंग हूॅं।
सफ़र में
हमसफ़र में,
गली गाॅंव
शहर में,
आठों प्रहर में,
जीवन जीने का
अलग-अलग ढंग हूॅं,
हाॅं! मैं रंग हूॅं।
हाॅं! मैं रंग हूॅं...।
परिचय :- शैल यादव
निवासी : लतीफपुर कोरांव (प्रयागराज)
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