सुनहरी शाम
मालती खलतकर
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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सुनहरी शाम के बादल भी झुक आऐ।
तुम ना आए प्रिय तुम ना आए।
बही बयार शीतल और मेघ नीर लाए
तुम ना आए प्रिय तुम ना आए।
पोखरों के पास का किट स्वर प्रिय
रवि चले अंतर तल में संबल
क्षितिज का लिए
तुमन आए प्रिय तुम ना आए।
एक बार फिर बादल घिर आए याद के
कोकिला का मधुर स्वर छू गया शाम
मधु पा मधु गुंजन भी कर रहे भौर से
मेरे उपवन के आंगन में काग बोले देर से
फिर भी तुम ना आए प्रिय तुम ना आए।।
परिचय :- इंदौर निवासी मालती खलतकर आयु ६८ वर्ष है आपने हिंदी समाजशास्श्र में एम ए एल एलबी किया है आप हिंदी में कविता कहानी लेख गजल आदि लिखती हैं व आपकी रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं मैं प्रकाशित होते हैं आप सन १९६८ से इंदौर के लेखक संघ रचना संघ से जुड़ीआप शासकीय सेवा से निमृत हैं पीछेले ३० वर्षों से धार के कवियों के साथ शिरकत करती रही आ...
























