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चौपाई

सतगुरु चालीसा एवं आरती
चौपाई, दोहा

सतगुरु चालीसा एवं आरती

सुधीर श्रीवास्तव बड़गाँव, गोण्डा, (उत्तर प्रदेश) ******************** सतगुरु चालीसा -:दोहा:- गुरुवर की कर वंदना, नित्य झुकाऊँ माथ। प्रभु जी विनती आप से, रखना सिर पर हाथ।। -:चौपाई:- सतगुरु का जो वंदन करते। ज्ञान ज्योति निज जीवन भरते।।१ गुरू शिक्षा का तोड़ नहीं है। इससे सुंदर जोड़ नहीं है।।२ गुरु वंदन का शुभ दिन आया। सकल जगत का उर हर्षाया ।।३ गुरु चरणों में खुशियाँ बसतीं। सुरभित जीवन नदियाँ रसतीं।।४ गुरु दरिया में आप नहाओ। जीवन अपना स्वच्छ बनाओ।।५ गुरुवर जीवन साज सजाते। ठोंक-पीटकर ठोस बनाते।।६ पाठ पढ़ाते मर्यादा का। कष्ट मिटाते हर बाधा का।।७ गुरू कृपा सब पर बरसाते। समय-समय पर गले लगाते।।८ गुरुवर जीवन मर्म बताते। जीवन से अवरोध हटाते।।९ साहस शिक्षा गुरुवर देते। ज्ञान सीख उर में भर देते।।१० गुरू शिष्य का निर्मल नाता। जीवन को है सहज बनाता।।११ भेद-भा...
बिसुआ
चौपाई, छंद

बिसुआ

नरेंद्र सिंह मोहनपुर, अतरी, गया जी (बिहार) ******************** आज पर्व है सत्तूयानी। इसे पवित तिथि कहते ज्ञानी।। आज जगे जो रवि से आगे। किस्मत तुरंत उसकी जागे।। नमन करो पहले धरनी का। लेना असीस पितु-जननी का।। नित्य क्रिया से निवृत्त होकर। करो स्नान सारे तन धोकर।। तब जपना प्रभु को हे प्राणी। मंत्र पढ़ो निकले मृदु वाणी।। दान-पुण्य करना सब भाई। जीवन की ये असली कमाई।। फिर सत्तू का भोग लगाना। बिसुआ का ये पर्व मनाना।। घी-शक्कर संग दूध सानो। आम टिकोला को शुभ मानो।। बिसुआ जो भी लोग मनाता। पाप-पुंज जो हो कट जाता।। ग्रह गोचर उसके मिट जाते। आज मनुज जो सत्तू खाते।। लगन आज से उत्तम जानो। शादी का शुभ मुहूर्त मानो।। लगी गूँजने अब शहनाई। अशुभ मास की हुई विदाई।। परिचय :-  नरेंद्र सिंह निवासी : मोहनपुर, अतरी, गया जी (बिहार) सम्प्रति : सेवनिव...
रविदास ईश प्रभु धर्मा
चौपाई

रविदास ईश प्रभु धर्मा

सुधीर श्रीवास्तव बड़गाँव, गोण्डा, (उत्तर प्रदेश) ******************** माघ मास पूनम को जन्में। भक्ति भाव था खासा जिनमें।। पितु संतोष मातु हैं कर्मा। रविदास ईश प्रभु धर्मा।। कर्मशील प्राणी रविदासा। रखता सदा ईश विश्वासा।। समाजिक सुधार थे लाए। संत शिरोमणि आप कहाए।। सामाजिक सद्भाव दिखाया । जाति पाति का भेद मिटाया॥ निश्चल धारा भक्ति बहाया। जीवन का फिर सार बताया॥ कर्म निरंतर करते रहते। ध्यान मगन रह सदा विचरते।। गंगा मैय्या आप थीं आईं। लाज भक्त की मातु बचाईं।। कभी नहीं मन मैला राखा। ईश कृपा का फल था चाखा।। धर्म कर्म की ज्योति जगाए। योगी संत सुजान कहाए।। छोटा-बड़ा कर्म नहीं माना। ईश कृपा को सबमें माना।। भटक रहा क्यों प्राणी जग में। ईश्वर तो है तेरे मन में।। मीराबाई गुरु रैदासा। सतपथ पर उनका विश्वासा।। गुरु ग्रंथ में जगह हैं पाए। भक्ति भजन रसधार बहाए। सत्य...
बहना चालीसा
चौपाई

बहना चालीसा

अभिषेक मिश्रा चकिया, बलिया (उत्तरप्रदेश) ******************** ॥दोहा॥ स्नेह-सुमन सरसाइ बहै, राखी रस की धार। मंगल मूर्ति बहन रूप, बंधे प्रेम उपहार॥ अभिषेक वंदन करे, बहना चरणों धार। तेरे पावन प्रेम से, जीवन हो उजियार॥ ॥चालीसा (चौपाई)॥ जय बहना स्नेह की रानी। ममता रूपी जीवन वाणी॥ तेरी महिमा कौन बखाने। हर रिश्ते में प्रेम जगावे॥ बाल्यकाल में साथ निभाया। हर मुस्कान में दुख छुपाया॥ बचपन की तू राजकुमारी। भाई की तू रही सहारी॥ राखी बाँधे रख भाव पवित्रा। मन में बसती शक्ति चित्रा॥ रूठे तो खुद पास बुलाए। माँ जैसी ममता बरसाए॥ तू लक्ष्मी बन घर में आए। भाई के हित द्वार सजाए॥ तेरी हँसी सुखद सुनाई। मन में शांति करे समाई॥ तेरी आँखें स्वप्न सँवारे। तेरे आँसू दुख सब मारे॥ तू ही शक्ति, तू ही पूजा। तू ही सेवा, तू ही दूजा॥ तेरे बिना घर सूना लागे। भाई का र...
सतगुरु चालीसा
चौपाई

सतगुरु चालीसा

सुधीर श्रीवास्तव बड़गाँव, गोण्डा, (उत्तर प्रदेश) ******************** -: दोहा :- गुरुवर की कर वंदना, नित्य झुकाऊँ माथ। गुरुवर विनती आप से,रखना सिर पर हाथ।। -: चौपाई :- सतगुरु का जो वंदन करते। ज्ञान ज्योति निज जीवन भरते।।१ गुरू ज्ञान का तोड़ नहीं है। इससे सुंदर जोड़ नहीं है।।२ गुरु वंदन का शुभ दिन आया। सकल जगत का उर हर्षाया।।३ गुरु चरनन में खुशियाँ बसतीं। सुरभित जीवन नदियाँ रसतीं।।४ गुरु दरिया में आप नहाओ। जीवन अपना स्वच्छ बनाओ।।५ गुरुवर जीवन साज सजाते। ठोंक- पीटकर ठोस बनाते।।६ पाठ पढ़ाते मर्यादा का। भाव मिटाते हर बाधा का।।७ गुरू कृपा सब पर बरसाते। समय-समय पर गले लगाते।।८ गुरुवर जीवन मर्म बताते। नव जीवन की राह दिखाते।।९ साहस शिक्षा गुरुवर देते। जीवन नैया जिससे खेते।।१० गुरू शिष्य का निर्मल नाता। जीवन को है सहज बनाता।।११ भेद-भाव नहिं गुरु ह...
सदाचार के पथ पर
चौपाई

सदाचार के पथ पर

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** सदाचार के पथ पर चलना, कभी न फिर तुम आँखें मलना। जीवन में अच्छाई वरना, हर दुर्गुण को नित ही हरना।। कभी काम खोटा नहिं करना, नेह-नीर होकर तुम झरना। हरदम ही बनना उजियारा, करना दूर सकल अँधियारा।। नैतिकता के होकर रहना, मानवता का पथ ही वरना। सबकी सेवा में जुट जाना, जीवन अपना धन्य बनाना।। सच्चाई से जीवन बनता, दुर्गुण तो खुशियों को हनता। चाल-चलन मर्यादित रखना, कभी नहीं कड़वे फल चखना।। सदाचार से प्रभु खुश होते, ऐसे जन बिलकुल नहिं रोते। गिरे हुए तुम कर्म न करना, बस अच्छाई को ही वरना।। मन को शोधित करते रहना, गंगाजल बनकर के बहना।। पापों को बिलकुल तज देना, सद्कर्मों को तुम गह लेना।। नैतिकता से खुशहाली हो, उपवन महकें,खुश माली हो। सद्चरित्र से सद्गति होती, मानवता किंचित नहिं रोती।। नैतिकता से सं...
विश्व जल दिवस पर चौपाई-छंद
चौपाई, छंद

विश्व जल दिवस पर चौपाई-छंद

धर्मेन्द्र कुमार श्रवण साहू बालोद (छत्तीसगढ़) ******************** आज विश्व जल दिवस मनाओ, सब जनता को यह परखाओ। अब जन जागरूकता लाओ, गली खोर अभियान चलाओ।। जल बिन मछली तड़पे कैसे, प्राण वायु बिन मरते जैसे। एक बूँद का कीमत जानो, कितना महत्व इसको मानो।। आओ प्यारे सब मिल गाओ, बचाने का संकल्प उठाओ। अब जन जागरूक हो जाओ, जल संरक्षण मिशाल लाओ।। पानी के बिन यह जग सूना, जीव जंतु है प्रकृति नमूना। बेकार की अब इसे न बहाओ, आसपास को स्वच्छ बनाओ।। जल बचाव का नियम बनाओ, जल-जंगल-जमीन महकाओ। पेड़ लगाकर छाया पाओ, खुशहाली जीवन हर्षाओ।। जल बिन सावन भादो कैसा, धरा तृषित अनावृष्टि जैसा। धरती मैय्या हरियाली पाओ, पानी बचाने घर-घर समझाओ।। *श्रवण* मनन कर लिख चौपाई, जल ही जीवन समझो भाई। हँसी खुशी महोत्सव मनाओ, अब प्रतिज्ञाबद्ध हो जाओ।। परिचय :- धर्मेन्द्र कुमार श...
होली पर चौपाई
चौपाई

होली पर चौपाई

धर्मेन्द्र कुमार श्रवण साहू बालोद (छत्तीसगढ़) ******************** हिरण्यकश्यप पापी राजा, काम क्रोध का मृदंग बाजा। विष्णु भक्त घर में अवतारी, दिये जन्म कयाधु महतारी।। प्रहलादा मारे किलकारी, किया नरेश जब अत्याचारी। मंत्र जाप सुन नहीं सुहाया, पापी होलिका को बुलाया।। बहन यंत्र जल्द सीख पाया, भैया का कह मान बढ़ाया। मिली होलिका को वरदाना, आग दहन से जल ना पाना।। राजा का आज्ञा वो पायी, जलती ज्वाला में बैठायी। असुरी भक्तिन स्वाहा होई, अजर अमर पुत्र श्री हरि कोई।। नाम प्रहलाद संतति पाया, ब्रह्म ज्ञान से मन हर्षाया। सत्य धर्म पथ जो चल पाया, विष्णु भक्त विजयी हो आया।। आत्म शुद्धि का पर्व मनाया, शक्ति भक्ति से भाव जगाया। मन पवित्र तब हो बढ़ पाया, परब सफलता गुण सिखलाया।। मिलजुल कर उत्सव मनाया, प्रेम रंग सब जन को भाया। रंग भरो मारो पिचकारी, भींगे चाहे गोरी कारी।। छ...
वंदनीय विद्या विज्ञापक – शिक्षक चालीसा
चौपाई

वंदनीय विद्या विज्ञापक – शिक्षक चालीसा

कन्हैया साहू 'अमित' भाटापारा (छत्तीसगढ़) ******************** दोहा :- जगहित जलता दीप सम, सहज, मृदुल व्यवहार। शिक्षक बनता है सदा, ज्ञान सृजन आधार।। चौपाई :- जयति जगत के ज्ञान प्रभाकर। शिक्षक तमहर श्री सुखसागर।।-१ वंदनीय विद्या विज्ञापक। अभिनंदन अधिगुण अध्यापक।।-२ आप राष्ट्र के भाग्य विधाता। सदा सर्वहित ज्ञान प्रदाता।।-३ जन-जन जीवनदायी तरुवर। प्रथम पूज्य हैं सदैव गुरुवर।।-४ शिक्षित शिष्ट शुभंकर शिक्षक। विज्ञ विवेचक विनयी वीक्षक।।-५ अतुलित आदर के अधिकारी। उर उदार उपनत उपहारी।।-६ लघुता के हो लौकिक लक्षक। सजग, सचेतक सत हित रक्षक।।-७ वेदित विद्यावान विशोभित। प्रज्ञापति हो, कहाँ प्रलोभित?-८ अंतर्दर्शी हैं आप अभीक्षक। प्रमुख प्रबोधी प्रबुध परीक्षक।।-९ विद्याधिप विभु विषय विशारद। उच्चशिखर चमके यश पारद।।-१० विश्व प्रतिष्ठित प्रबलक पारस। ढुनमुनिया मति के दृढ़ ढ...
लता चालीसा
चौपाई

लता चालीसा

डाॅ. दशरथ मसानिया आगर  मालवा म.प्र. ******************* (विनम्र शब्दांजलि) भारत मां की लाड़ली, गाये गीत हजार। सुर संगीत खजान है, कहत है कवि विचार।। हे सुर देवी कंठ सुहानी। लता नाम से सब जग जानी।। मास सितंबर सन उनतीसा। जन्मी बेटी सुर की धीसा।। इंदुर नगरी खुशियां छाई। मातु अहिल्या मन मुसकाई।। पंडित दीना पिता कहाये। मां सेवंती गोद खिलाये।। ज्योतिष हेमा नाम बताया। लता नाम को पिता धराया।। सुर कोकिल है नाम तुम्हारा। राग सुनाती नित नव प्यारा।। सुर सम्राज्ञी भारत कोकिल। मधुर कंठ से जीते सब दिल।। आशा, मीना, ऊषा बहिना। हृदयनाथ भाई जग चींहा।। पांच साल की आयु पाई। नाटक अभिनय धूम मचाई।। प्रथम गुरु थे तात तुम्हारे। जो संगीत कला रखवारे।। राग धनाश्री पिता सिखाया। फिर कपूरिया को समझाया।। तेरह बरस की उम्र थी भाई। पिता भूमिका आप निभाई।। सन पैंतालिस ...
प्रथम पूज्य हैं गणपति देवा
चौपाई, छंद

प्रथम पूज्य हैं गणपति देवा

रजनी गुप्ता 'पूनम चंद्रिका' लखनऊ ******************** प्रथम पूज्य हैं गणपति देवा। सर्वप्रथम हो उनकी सेवा।। संकट टालो अतिशय भारी। हनुमत आई शरण तिहारी।। सबका मंगल करने वाले। मुझको अपने चरण बिठा ले।। तुलसी कृत मानस है भाती भक्ति-सुभाव हृदय में लाती।। मानस में वर्णित चौपाई। उर में श्रद्धा बहु उपजाई।। मातु पिता की महिमा गाई। गुरु के चरण बहुत सुखदाई।। प्रेम करें सब भाई-भाई। सकल विश्व पूजित रघुराई।। कैकेई ने प्रभु को माना। राह सुगम की वन को जाना।। तज महलों को सीता माता। संग पिया का अति मन भाता।। उर्मिल सहती थी दुख भारी। रहें कर्म-पथ लखन सुखारी।। निज इच्छा से प्रभु की सेवा। राम सकल जग के हैं देवा।। सीख भरत से यह हम लेते। प्रभु के चरण परम सुख देते।। प्रातः वेला अति मनभायी। पुण्य प्रताप मधुर रसदायी।। राम नाम अति मंगलकारी। प्रमुदित हो लेते नर-नारी।। धन्य-ध...
त्राहिमाम
चौपाई, छंद

त्राहिमाम

अजय गुप्ता "अजेय" जलेसर (एटा) (उत्तर प्रदेश) ******************** तुम हो जग के पालनहारे, ब्रहां, विष्णु, महेश हमारे। हे आपदा प्रबंध प्यारे, सबहु तेरी कृपा सहारे।। सूनी सड़क गली चौबारे, जैसे नभ से ओझल तारे। घर-घर में नर-नारी सारे, बिन प्राणवायु जीवन हारे।।१ भौतिक सुख इच्छा ने भुलाये, पर्यावरण क्षति हमें रुलाये। जगह जगह हम पेड़ लगायें, अब नहीं वन-कटान करायें।। त्राहिमाम! हम शीश नभायें, माथे पग रज तिलक लगायें। प्राणवायु जग भर फैलाये, फिर से धरा सकल महकायें।।२ हमने किये पाप हैं भारी, भूले थे हम तुम अधिकारी। म़ाफ करो हम रचना त्यारी, त्राहिमाम! देवधि उपकारी।। हम तेरे बालक मनुहारी, त्राहिमाम! हे जग गिरधारी।। प्रभु सुन लीजिए अरज हमारी, करो दया जग लीलाधारी।।३ परिचय :- अजय गुप्ता "अजेय" निवासी : जलेसर (एटा) (उत्तर प्रदेश) शिक्षा : स्नातक ऑफ लॉ एंड कॉमर्स, आगरा वि...
बसंत चालीसा
चौपाई, छंद

बसंत चालीसा

प्रवीण त्रिपाठी नोएडा ******************** मधुमासी ऋतु परम सुहानी, बनी सकल ऋतुओं की रानी। ऊर्जित जड़-चेतन को करती, प्राण वायु तन-मन में भरती। कमल सरोवर सकल सुहाते, नव पल्लव तरुओं पर भाते। पीली सरसों ले अंगड़ाई, पीत बसन की शोभा छाई। वन-उपवन सब लगे चितेरे, बिंब करें मन मुदित घनेरे। आम्र मंजरी महुआ फूलें, निर्मल जल से पूरित कूलें। कोकिल छिप कर राग सुनाती, मोहक स्वरलहरी मन भाती। मद्धम सी गुंजन भँवरों की, करे तरंगित मन लहरों सी। पुष्प बाण श्री काम चलाते, मन को मद से मस्त कराते। यह बसंत सबके मन भाता, ऋतुओं का राजा कहलाता। फागुन माह सभी को भाता, उर उमंग अतिशय उपजाता। रंग भंग के मद मन छाये, एक नवल अनुभूति कराये। सुर्ख रंग के टेसू फूलें, नव तरंग में जनमन झूलें। नेह रंग से हृदय भिगोते, बीज प्रीति के मन में बोते। लाल, गुलाबी, नीले, पीले, हरे, केसरी रंग रँगीले। सराबोर होकर नर-नारी, ...
जैसे को तैसा धुनूँ
चौपाई, छंद, दोहा

जैसे को तैसा धुनूँ

अर्चना अनुपम जबलपुर मध्यप्रदेश ******************** रस - रौद्र, अलंकार - अतिशयोक्ति। भाव - आत्मकुंठोपजित भक्ति। छंद - दोहा, सोरठा एवं कुंडलियों के प्रयास। कारक - बचपन में अपने आस पास समृद्ध और सभ्य परिवार की उपाधि प्राप्त परिवारों में वधुयों की दहेज़ या अन्य पारिवारिक कारणों से हुई परिचिताओं की जीवित जलकर या अन्य हनित संसाधनों द्वारा हत्या एवम आत्महत्या से उत्पन्न भाव जो अधिकाधिक बारह या तेरह वर्ष की आयु के समय प्रभु से करबद्ध अनुरोध करते मेरे द्वारा ही वरदान स्वरूप चाहे गए थे। कुछ परिवार ने उनकी हत्या को भाग्य कुछ ने उनमें थोपी गई अतिवादी स्त्री सहनशीलता की कमी बताया मायके वालों ने कहा "बिटिया तो ना मिलेगी हमारी" अतः कोई केस नहीं लगाया। और मेरे हृदय में उस उम्र में दहेज़ के दानवों विरुद्ध, अवस्था; अतिशह क्रुद्ध क्रांति जनित यह भाव! 'यूँ ही' आया। कि..... दुष्टन से कंजर बनूँ...
नानकदेव चालीसा
कविता, चौपाई

नानकदेव चालीसा

डाॅ. दशरथ मसानिया आगर  मालवा म.प्र. ******************* आदिगुरु हैं नानका, पीछे अंगद देव। अमरदास गुरू रामजी, पंचम अर्जनदेव।। हरगोविन्द हररामजी, हरकिशन अरु तेग। दशम गुरु गोविन्दजी, हरते पीडा वेग।। जय जय जय गुरुनानक देवा। प्रभु की वाणी मानव सेवा।। रावी तट तलवंडी ग्रामा। गुरु जनमें पावन ननकाना।। सन चौदह उनहत्तर साला। कातिक पूनम भया उजाला।। कालू मेहता घर अवतारा। मां तृप्ता की आंखों तारा।। देवी सुलछणी धरम निभाये। श्रीचंद लखमी दो सुत पाये।। गुरु गोपाला पाठ पढाये। नागरि लिपि आखर समझाये।। नानक नितनव प्रश्न बनाते । शिक्षक सब सुनके घबराते।। हिंदी संस्कृत फारस सीखा। सबमें एक प्रकाश ही दीखा।। लिपि गुरुमुख भाषा पंजाबी। जागा ज्ञान कुशंका भागी।। अ अविनाशी सत्य है भाई। जो सतनाम तुम्ही बतलाई।। नाच भांगडा लंगर द्वारा। सिख संगत गावे संसारा।। वाहेगुरु सतनाम बताया। छोड़ अहम ओंकार सिखाया।। पंथ ...