कमाल हो जाएगा (घनाक्षरी)
डॉ. विजय गुप्ता "मुन्ना"
दुर्ग (छत्तीसगढ़)
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यदि याद पाठ शाला, पाला किए बुजुर्ग से,
अवसर चूको नहीं, वक्त चला जाएगा।
जवाब हर बात या, भूल की अवहेलना,
तर्क अज्ञान वश तो, विद्वता ना पाएगा।
घर परिवार देश, समाज क्रम घटित,
जानी अनजानी कभी, रोक कैसे पाएगा।
समझकर संवाद को, सभा समूह विवाद,
मुंह अपना खोलिये, वाह ही करायेगा।
युग जो बदल गया, मौन भाषा भूल गया,
बोले बिना चैन गया, आदत बनाएगा।
नजर तो घुमाइये, शहर से गांव तक,
मुख्य शीर्ष बैठकें तो, सुनना सिखाएगा।
विवाद के महारथी, बिना सुने बन गए,
झूठ ज्ञान गढ़ गए, तो जीत क्या पाएगा।
वक्ता पहचान यही, तथ्य बोध कला सही,
प्रभाव सामने सही, नाम ही कमाएगा।
पड़ोस परिवार में, बोलकर भाषा कटु,
खड़े स्वाभिमान लिए, टपक ही जायेगा।
छपना है अच्छा बुरा, छपास बना आसरा,
बिखरा जो यही रोग, राह क्या दिखाएगा।
चूकना नहीं...















