राम नाम महिमा
प्रेम नारायण मेहरोत्रा
जानकीपुरम (लखनऊ)
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राम का नाम मुक्ति का साधन सरल,
शक्ति दो नाम लेखन बढ़ाता चलूं।
ऐसी गंगा बहा दो हृदय में प्रभु,
आखिरी सांस तक नाम सुमिरन करूं।
राम का नाम मुक्ति..........
नाम महिमा अकल्पित, असीमित है प्रभु,
ज्ञान अनुरूप महिमा को गाता रहूं।
भाव मां दे रही, शक्ति हनुमत ने दी,
मैं तो बस लेखिनी को चलाता रहूं।
राम का नाम मुक्ति...........
बहुत संतो ने महिमा सुनाई सदा,
पर नहीं कोई संपूर्ण को गा सका।
नाम पर शोधकर लोग डॉक्टर बने,
पर नहीं कोई भी अंत को पा सका।
मुझको हनुमतकृपा राम सेवा मिली,
सांस जब तक चले, मैं निभाता रहूं।
राम का नाम मुक्ति........
सोते जगते सदा, साथ में नाम हो,
कार्य जग के करूं, मन में बस राम हो।
नाम के जाम इतने पिला दो हनु,
जिसको देखूं उसी में मेरा राम हो।
मेरी सांसों में बस नाम चलने लगे,
राम ही राम मैं ग...
















