कन्हैया तुम्हारा सहारा न होता : सनातनी गज़ल
शिमला शर्मा "लक्ष्मी प्रिया"
ग्वालियर (मध्यप्रदेश)
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सनातनी गज़ल
कन्हैया तुम्हारा सहारा न होता।
तो दुनिया में कोई हमारा न होता।
जो पकड़ा न होता मेरा हाथ तुमने,
तो ग़म की नदी का किनारा न होता।
न होते लता, पुष्प, पर्वत ये झरने।
तो जग में ये अनुपम नज़ारा न होता।
दिया ज्ञान गीता का तुमने जहां को,
बिना कर्म जग में गुज़ारा न होता।
भरा स्वार्थ सारे ज़माने में दिखता
बिना काम कोई भी प्यारा न होता।
बनाते नहीं प्रेम की रीत जग में,
तो इंसा किसी से भी हारा न होता।
"प्रिया" मोह माया में सोई हुई थी,
न जगती जो तुमने पुकारा न होता।
परिचय :- श्रीमती शिमला शर्मा "लक्ष्मी प्रिया"
निवासी : ग्वालियर (मध्यप्रदेश)
रुचि : गद्य/पद्म लेखन एवं गायन
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।
प्रिय मित्र, शुभचिंतक ...












