तेरे चरणों की धूल पाकर मां
गगन खरे क्षितिज
कोदरिया मंहू (मध्य प्रदेश)
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मां तूने मुझे
जन्म नहीं दिया
संसार में लाकर जो
अमृतपान कराया
में धन्य हो गया
तेरे चरणों की
धूल पाकर मां,
इस खूबसूरत
दुनिया में
अमर हो गया।
परिस्थितियां चाहे
जैसी भी रही मां
तूने मुझे जन्म दिया
धूप छांव से बचाकर
एक नैक इंसान बनाया,
मर्यादा में
जीना सिखलाया।
संसारिक जीवनशैली में
परिवर्तन लाकर
ईश्वर में आस्था का
पाठ पढ़ाकर जीवन
दान मां दिया
तेरे चरणों की
धूल पाकर
मैं अमर हो गया।
परमसत्य है मां,
ईश्वर का स्वरूप है मां,
तेरी छवि सबसे है
निराली मां,
मां सरस्वती
शारदा का रूप,
अन्नपूर्णा का रूप,
जगत जननी तू
कहलाई मां,
क्या नहीं कहलाई मां
निस्वार्थ भाव
सार्थक प्रयास,
जिज्ञासाओं का गगन
प्रतिक व सकारात्मक
सोच प्रेरणा देती रही हैं
मां तेरे तेरे चरणों की
धूल पाकर
मैं अमर हो गया।
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